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    11 साल का बेटा बना मां का बैडमिंटन कोच, 40 की उम्र में जीते दो गोल्ड; ट्रेनिंग के साथ-साथ डाइट पर भी दिया ध्यान

    By Amit Tiwari Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Mon, 06 Jul 2026 06:45 PM (IST)

    Meerut News: अनामिका मोहता ने अपने 11 वर्षीय बेटे आरव के प्रशिक्षण से मेरठ जिला बैडमिंटन टूर्नामेंट में दो स्वर्ण पदक जीते। आरव ने अपनी मां को अनुशासि ...और पढ़ें

    विजेता बनने के बाद अनामिका मोहता बेटे आरव मोहता के साथ।

    विजेता बनने के बाद अनामिका मोहता बेटे आरव मोहता के साथ। 

    HighLights

    1. कई अकादमियों में नहीं मिला प्रशिक्षण, कहीं बच्चों ने साथ खेलने से किया इन्कार

    2. ‘मदर्स आर नाट अलाउड’ कहा गया तो बेटा मां संग कोर्ट पर बहाने लगा पसीना

    जागरण संवाददाता, मेरठ। उम्र महज 11 साल, लेकिन भूमिका एक अनुशासित कोच की। शिष्या कोई और नहीं, अपनी मां। मां की उम्र 40 वर्ष से अधिक और खेलों का कोई पुराना अनुभव भी नहीं।
    जब मां को सही प्रशिक्षण नहीं मिला तो पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले बेटे ने खुद जिम्मेदारी संभाल ली। निरंतर कोर्ट पर अभ्यास कराया, फिटनेस पर काम किया, दौड़ लगवाई और खानपान पर ऐसी निगरानी रखी कि समोसा, कचौड़ी और पूड़ी तक बंद करा दी। करीब छह माह की इस मेहनत का परिणाम सामने आया तो मां ने एक नहीं, दो-दो स्वर्ण पदक जीत लिए।

    यह प्रेरक कहानी अनामिका मोहता और उनके 11 वर्षीय बेटे आरव मोहता की है। अनामिका ने मेरठ जिला बैडमिंटन टूर्नामेंट में महिला 35 वर्ष से अधिक और 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की।
    अपनी इस दोहरी सफलता का श्रेय उन्होंने बेटे आरव को दिया है, जो उनके लिए सिर्फ बेटा नहीं बल्कि कोच, फिटनेस ट्रेनर और सबसे बड़ा प्रेरक भी है।

    अनामिका बताती हैं कि उन्होंने करीब सात-आठ माह पहले ही बैडमिंटन खेलना शुरू किया था, जबकि व्यवस्थित अभ्यास करीब पांच-छह माह से कर रही हैं। इससे पहले वह कभी किसी खेल से नहीं जुड़ी थीं। खेल सीखने की इच्छा लेकर वह कई बैडमिंटन अकादमियों तक पहुंचीं, लेकिन राह आसान नहीं थी। कहीं बच्चों के साथ अभ्यास का अवसर नहीं मिला तो कहीं उम्र के कारण असहज स्थिति बनी।

    एक जगह तो उन्हें साफ कह दिया गया कि ‘मदर्स आर नाट अलाउड’। कई प्रयासों के बावजूद जब अपेक्षित प्रशिक्षण नहीं मिला तो निराशा बढ़ने लगी। इसके बाद मां-बेटे की जिंदगी का नया अध्याय शुरू हुआ। आरव ने मां की तकनीक, फुटवर्क, फिटनेस और नियमित अभ्यास पर काम करना शुरू किया। अनामिका के अनुसार, बेटा उन्हें दौड़ाता है, कोर्ट पर अभ्यास कराता है और डाइट का भी पूरा ध्यान रखता है।

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    उनकी मजाल नहीं कि बेटे की निगरानी होते हुए समोसा, कचौड़ी या पूड़ी खा लें। आरव ने अपने अधूरे खेल सपनों को मां की सफलता से जोड़ दिया और लगातार उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

    कोच नहीं मिला तो कोर्ट बुक कर खुद शुरू की ट्रेनिंग

    अनामिका वर्तमान में अपने बेटे के साथ माध्यवपुरम स्थित शटल आई एरीना में अभ्यास करती हैं। उन्होंने किसी निजी कोच को नियुक्त नहीं किया है। वह कोर्ट बुक करती हैं और वहां आरव उन्हें प्रशिक्षण देते हैं। स्कूल की व्यस्त दिनचर्या के बावजूद आरव मां के अभ्यास की योजना बनाते हैं। अनामिका अब ऐसे अच्छे कोच की तलाश में हैं, जो मां-बेटे दोनों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण दे सके।

    आरव बहुत छोटी उम्र से बैडमिंटन खेल रहे हैं और अंडर-9 आयु वर्ग से ही प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुका है। पैर में मोच आने के कारण भी हाल में वह एक प्रतियोगिता में नहीं उतर सके।

    अब उनका लक्ष्य कड़ी तैयारी के बाद अधिक मजबूत प्रदर्शन करना है। जिला प्रतियोगिता में दो स्वर्ण जीतने के बाद अनामिका का आत्मविश्वास बढ़ा है। उनका कहना है कि वह यहीं रुकना नहीं चाहतीं। अब उनका लक्ष्य राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल करना है।

    उन्होंने पूर्व में दिल्ली में आयोजित मास्टर्स स्तर की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया और वहां भी 35 और 40 आयु वर्ग में स्वर्ण पदक जीते हैं। पर्ल रेजिडेंसी निवासी अनामिका के पति गौरव मोहता अकार्ड कम्युनिकेशन के संचालक हैं। अनामिका के अनुसार पति के साथ उनके सास-ससुर भी खेल यात्रा में पूरा सहयोग कर रहे हैं। आरव डीपीएस मोदीनगर में पांचवीं कक्षा के छात्र हैं। अनामिका स्वयं उन्हें स्कूल छोड़ने और लेने जाती हैं।

    ‘हर बच्चा अपनी मां के सपनों के पीछे दीवार बनकर खड़ा हो’

    अपनी सफलता के बाद अनामिका की सबसे बड़ी इच्छा है कि उनकी कहानी दूसरी माताओं और बच्चों तक पहुंचे। वह कहती हैं कि जिस तरह उनका बेटा उनके पीछे मजबूत दीवार बनकर खड़ा हुआ, उसी तरह दूसरे बच्चे भी अपनी माताओं के सपनों को समझें और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। अक्सर मां बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए अपना समय और इच्छाएं पीछे छोड़ देती है, लेकिन आरव और अनामिका की कहानी ने इस रिश्ते की भूमिका ही बदल दी।

    इन्होंने कहा

    बेटे के साथ प्रशिक्षण कर अनामिका ने प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन किया और चैंपियन बनीं अब हम उनकी आइडी बनाएंगे और प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग कराएंगे। प्रदेश स्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता दो से पांच सितंबर तक मेरठ में ही होगी, जिसमें 700 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा लेने मेरठ पहुंचेंगे।
    -राजेश चौधरी, सचिव, जिला बैडमिंटन संघ