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सावधान! चाशनी में डूबे और मैदा के बने व्यंजन बढ़ा सकते हैं शुगर लेवल, डॉक्टर ने दिया ये सुझाव

Published: Sat, 28 Feb 2026 07:09 PM (IST)

होली पर गुझिया, शकरपाला जैसे चाशनी वाले और मैदा के व्यंजन शुगर रोगियों के लिए खतरनाक हो सकते हैं। विशेषज्ञ ...और पढ़ें

सावधान! चाशनी में डूबे और मैदा के बने व्यंजन बढ़ा सकते हैं शुगर लेवल - एआई जनरेटेड तस्वीर

सावधान! चाशनी में डूबे और मैदा के बने व्यंजन बढ़ा सकते हैं शुगर लेवल - एआई जनरेटेड तस्वीर

HighLights

  1. चाशनी और मैदा के व्यंजन शुगर लेवल तेजी से बढ़ाते हैं।

  2. उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स से डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

  3. स्वस्थ विकल्पों से मनाएं सुरक्षित और सेहतमंद होली का त्योहार।

जागरण संवाददाता, मेरठ। होली के त्योहार पर गुझिया, शकरपाला, मालपुआ, जलेबी यानी चासनी में डूबे व्यंजनों की खुशबू हर घर में महकती है। रेडीमेड ठंडाई भी खूब पी जाती है। त्योहार पर आने वाले अतिथियों की खातिरदारी में उनके सामने यही व्यजंन परोसे जाते हैं।

चार से पांच दिन तक यह सिलसिला चलने वाला है। ऐसे में सेहत को न भूले। जो लोग शुगर रोगी हैं या जिनका शुगर का स्तर बार्डर पर है, वह संभल जाएं। मैदा और चीनी के घातक संयोजन से बने ये व्यंजन ब्लड शुगर के स्तर को खतरनाक रूप से बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह है कि त्योहार मनाएं, लेकिन खाने-पीने पर संयम बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञ चिकित्सक ने कहा कि...

  • चासनी में डूबे गुझिया, शकरपाला या मालपुआ खाने और ठंडाई पीने से बचें। ये उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ होते हैं।
  • इन्हें खाते ही शरीर में ग्लूकोज का स्तर तेजी से बढ़ता है। जिसे नियंत्रित करने के लिए पैंक्रियाज को भारी मात्रा में इंसुलिन छोड़ना पड़ता है।
  • बार-बार ऐसा होने से इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
  • चीनी और मैदा के व्यंजन , रेडीमेड ठंडाई उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स की श्रेणी में आते हैं।
  • जो शुगर रोगी हैं और जिनकी शुगर बार्डर पर है, वे चीनी और मैदा के व्यंजनों का सेवन न करें।
  • ज्यादा चीनी और मैदा शरीर में सूजन को बढ़ाता है। पकवान खाने के बाद थकान और सुस्ती इसीलिए महसूस होती है।
  • तले और भु़ने खाद्य पदार्थ बैड कोलेस्ट्राल को बढ़ाते हैं। जो हृदय संबंधी समस्या बढ़ा सकते हैं।
  • फाइबर की कमी के कारण ये व्यंजन पाचन तंत्र को धीमा करते हैं। जिससे कब्ज की समस्या भी पैदा होती है।
  • त्योहार पर सबसे ज्यादा मरीज शुगर लेवल बढ़ा हुआ लेकर आते हैं। लंबे समय तक उपचार पर रहना पड़ता है।

डा. अमित रस्तोगी, हार्मोंस रोग विशेषज्ञ।

होली पर अधिकांश व्यंजन मैदा व चीनी से बनते हैं। मैदा बनाने में गेंहू से फाइबर और पोषक तत्व निकाल दिए जाते हैं। यह शुद्ध कार्बोहाइड्रेट बन जाता है।

  • मैदे को घी में तलने और व्यंजन को चीनी की चाशनी में डुबोकर खाने से कैलोरी की मात्रा एकाएक कई गुना बढ़ जाती है।
  • गुझिया या शकरपाला खाने, ठंडाई पीने से एक बार में करीब 300 ग्राम कैलोरी मिल जाती है। दिनभर में खाने से स्थिति बिगड़ती है।
  • पूरे दिन में सामान्य वयस्क पुरुष को 2000 से 2500 कैलोरी की आवश्यकता होती है। महिलाओं को 1600 से 1800 तक होती है।
  • अत्यधिक कैलारी का सेवन करने से शरीर में अधिक ऊर्जा वसा के रूप में जमने लगती है।
  • अधिक कैलोरी का सेवन टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। मोटापा का कारण बनी है।
  • डायबिटिक मरीज खाली पेट होली न खेेलें। इससे बीपी का स्तर लो हो सकता है। शुगर लेवल गिर सकता है। नमक की मात्रा तीन ग्राम से अधिक न लें।
  • त्योहार के बाद ओपीडी में सबसे ज्यादा मामले बीपी-शुगर लेवल बढ़े होने के आते हैं। इसलिए त्योहार पर खाने-पीने में सावधानी बरतें।

डा. अरविंद कुमार, वरिष्ठ फिजिशियन एलएलआरएम.

खजूर, अंजीर, किशमिश व मेवा की बनी मिठाई ले सकते हैं। खरबूजा, तरबूज, खसखस व सफेद तिल लगा दें। चीनी न डालें.

  • मैदा के बजाए मोटे अनाज, सूजी या रागी के आटे से गुझिया बनाएं। उसमें मेवा व किशमिश डालें। चीनी न डालें। तेल में फ्राई न करें।
  • भारी खाने से पहले प्रोटीन युक्त व्यंजन करें। जैसे पनीर, अंकुरित अनाज या दही, दही भल्ले का सेवन करें।
  • फ्रुट चाट, मटर की चाट, मूंगदाल के बड़े कम नमक और कम तेल का उपयोग करते हुए बनाएं।
  • प्रोटीन युक्त व्यंजन कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा कर देते हैं। इससे शुगर लेवल अचानक नहीं बढ़ता।
  • मिठाई या तले-भुने खाद्य पदार्थाें की जगह ड्राई फ्रूट या सेब, पपीता,अमरूद, अनार आदि फलों से खातिरदारी करें।
  • काजी के बड़े बनाएं। इसका पानी पाचन के लिए बढ़िया होता है। नींबू पानी, शिकंजी, नारियल पानी का सेवन करें।
  • रेडीमेड ठंडाई की जगह मलाई रहित दूध और मेवा के साथ बिना चीनी की ठंडाई बनाकर पीएं।
  • दिनभर में ढाई से तीन लीटर पानी का सेवन करें।

डा. भावना गांधी, डायटिशियन।