बार-बार झपकी सताए, रहा न जाए... तो डाॅक्टर के पास जरूर जाएं
मेरठ में दिन में बार-बार झपकी आना अब सामान्य थकान नहीं, बल्कि हाइपरसोमनिया का संकेत माना जा रहा है, जिसके मामले तीन गुना बढ़ गए हैं। चिकित्सक इसे कई आ ...और पढ़ें

HighLights
मेरठ में हाइपरसोमनिया के मामले तीन गुना बढ़ गए।
झपकी थायराइड, डायबिटीज, लिवर रोगों का संकेत।
नियमित नींद, संतुलित आहार, जांच से बचाव संभव।
जागरण संवाददाता, मेरठ। दिन में बार-बार झपकी आना या अचानक नींद के झटके लगना सामान्य थकान नहीं, बल्कि हाइपरसोमनिया का संकेत हो सकता है। यह शरीर में पनप रही कई आंतरिक बीमारियों और मेटाबोलिज्म संबंधी गड़बड़ियों से जुड़ा है।

डॉ. अरविंद कुमार।
लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज में इस लक्षण के साथ पहले प्रतिदिन छह से सात मरीज आते थे, वहीं अब यह संख्या तीन गुना बढ़ गई है। सामान्य मेडिसिन विभाग, एंडोक्रेनोलाजी, नेफ्रोलाजी की ओपीडी में रोजाना लगभग 700 मरीज आते हैं। इनमें पहले छह से सात मरीज बार-बार झपकी आने की समस्या लेकर आते थे, अब यह संख्या 18 से 20 तक पहुंच रही है।
मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर डॉ. अरविंद कुमार का कहना है कि यह भविष्य के लिए खतरे का संकेत लग रहा है। मरीजों की हिस्ट्री पता करने पर जो बात निकलकर आ रही है कि ऐसे मरीज देर रात जागते थे। उनका खानपान अनियमित, तनाव और दिनचर्या अनियमित थी। ये समस्या कामकाजी युवाओं में ज्यादा देखी जा रही है।
लक्षण एक, बीमारी अनेक
बार बार झपकी की शिकायत पर कराई गई जांच रिपोर्टों में अनेक बीमारियां सामने आ रही हैं। थायराइड, खून की कमी, नींद संबंधी विकार, डायबिटीज यहां तक कि लिवर और गुर्दे संबंधी समस्या भी पाई जा रही है। हृदय संबंधी समस्या, बीपी बढ़ने और स्ट्रोक जैसी स्थिति भी इससे बन सकती है।
लक्षण उभरे तो जांच कराएं
चिकित्सक का कहना है कि बार-बार झपकी आने को हल्के में ना लेते हुए तुरंत चिकित्सीय सलाह लें। इस लक्षण के उभरने पर सीबीसी, लिवर फंक्शन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, थायराइड और हीमोग्लोबिन जैसी सामान्य जांच कराने से समस्या का पता लगाया जा सकता है। इससे समय रहते गंभीर बीमारियों की चपेट में आने से बचा जा सकता है।
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...इसलिए आती है झपकी
मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डाॅ. अरविंद कुमार का कहना है कि शरीर में थायराइड हार्मोन की कमी से मेटाबोलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे सुस्ती और अत्यधिक नींद आती है। स्लीप एपनिया जैसी स्थिति में रात की नींद पूरी नहीं होती। जिस कारण दिन में झपकी आती है।
हीमोग्लोबिन की कमी से कोशिकाओं तक पर्याप्त आक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इससे शरीर में ऊर्जा का स्तर गिर जाता है। इंसुलिन की अनियमितता से शरीर ग्लूकोज का सही उपयोग नहीं कर पाता, जो क्रोनिक थकान का कारण बनता है। खून में आक्सीजन की कमी मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को धीमा कर देती है। वहीं, जब मांसपेशियों और ऊतकों में लैक्टिक एसिड का अधिक संचयन होता है तो शारीरिक थकान और भारीपन महसूस होता है। लिवर के मरीज में अमोनिया का स्तर और गुर्दे के मरीजो में ब्लड यूरिया बढ़ने से झपकी आने लगती है। सिर्फ बीमारी तक ही खतरा सीमित नहीं है, गाड़ी चलाते वक्त झपकी आने से सड़क दुर्घटना का खतरा भी होता है।
बचाव के लिए ये जरूरी
-रोजाना सात से आठ घंटे की गहरी नींद लें। सोने जागने का समय तय करें
-सोने से एक घंटे पहले मोबाइल लैपटाप और टीवी बंद कर दें। स्क्रीन टाइम कम करें। रात 10 बजे तक सोने की कोशिश करें।
-संतुलित आहार लें। रात में भोजन आठ बजे से पहले करें और शाम के समय कैफीन (चाय और काफी) व अल्कोहल के सेवन से बचें।
-यदि रात में खर्राटे आते हैं और दिन में गहरी नींद आती है तो डाक्टर से मिलकर स्लीप स्टडी करवाएं।