VIDEO: मां की किडनी से मिला जीवन, शिव भक्ति ने दिया हौसला; ट्रांसप्लांट के बाद हरिद्वार से पैदल जल ला रहे रविशंकर
Kanwar Yatra 2026: रोहटा निवासी रविशंकर, जिन्हें मां की किडनी से नया जीवन मिला, अब गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। यह यात्रा अंग ...और पढ़ें
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वर्ष 2022 में हुआ था रविशंकर का गुर्दा ट्रांसप्लांट।
डॉक्टर बोले- किडनी फेल होना जीवन का अंत नहीं।
जागरण संवाददाता, मेरठ। गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद आप पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं। कोई भी कार्य प्रभावित नहीं होता है। इसका उदाहरण रोहटा निवासी 30 वर्षीय रविशंकर हैं। मां ने गुर्दा दानकर उन्हें नई जिंदगी दी और बेटा आज अपने संकल्प को पूरा करने के लिए कांवड़ यात्रा पर है। सैकड़ों किमी की उनकी यह कावड़ यात्रा अंगदान के महत्व और शिव के प्रति अटूट श्रद्धा की मिसाल है।
वर्ष 2022 में रविशंकर का गुर्दा ट्रांसप्लांट हुआ था, जिसमें उनकी मां कौशल्या ने अपनी एक किडनी देकर उन्हें नया जीवन दिया था। यह सफल ट्रांसप्लांट न्यूटीमा हास्पिटल के गुर्दा रोग विशेषज्ञ डाॅक्टर संदीप गर्ग की देखरेख में हुआ था। रोहटा क्षेत्र के रहने वाले रविशंकर बताते हैं कि इससे पहले वर्ष 2017 में कांवड़ यात्रा की थी। उसके बाद वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे जिस वजह से जोड़े की कांवड लाने का उनका संकल्प अधूरा रह गया था। जो अब पूरा करने निकले हैं।
स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से उबरने और पूर्णत स्वस्थ होने के नौ साल बाद वे इस वर्ष फिर से बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए हरिद्वार पहुंचे। गुरुवार को वे हरिद्वार से जल लेकर अपनी पैदल कांवड़ यात्रा पर वापस रवाना हो चुके हैं। पुरा महादेव मंदिर में पहुंच कर जल चढ़ाएंगे। गुर्दा प्रत्यारोपण के बावजूद उनका यह हौसला और भक्तिभाव पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
किडनी फेल होना जीवन का अंत नहीं: डाॅ. संदीप गर्ग

गुर्दा रोग विशेषज्ञ डाॅक्टर संदीप गर्ग ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के दोनों गुर्दे स्थायी रूप से काम करना बंद कर दें, तो उसे घबराने या निराश होने की आवश्यकता नहीं है। आज चिकित्सा विज्ञान ने इतनी प्रगति कर ली है कि किडनी फेल होने के बाद भी एक स्वस्थ, सक्रिय और सम्मानजनक जीवन जीना पूरी तरह संभव है।
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सफल ट्रांसप्लांट के बाद अधिकांश मरीज अपनी नौकरी कर सकते हैं, अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभा सकते हैं, बच्चों की परवरिश कर सकते हैं और सामान्य लोगों की तरह जीवन का आनंद ले सकते हैं।
यदि कई वर्षों बाद प्रत्यारोपित किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाए, तो आवश्यकता पड़ने पर दोबारा किडनी ट्रांसप्लांट भी किया जा सकता है। इसलिए किडनी फेल होना जीवन का अंत नहीं है। सही समय पर सही विशेषज्ञ से उपचार, नियमित दवाओं का पालन और सकारात्मक सोच के साथ आप एक लंबा, स्वस्थ, सुरक्षित और उज्ज्वल जीवन जी सकते हैं।