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    किठौर विधानसभा क्षेत्र: पूरे क्षेत्र में विकास का विधायक का दावा, दशकों से बुनियादी समस्याएं जस की तस

    By Sanjeev Kumar Jain Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Thu, 23 Jul 2026 05:09 PM (IST)

    Uttar Pradesh MLA Report Card: किठौर विधानसभा क्षेत्र में विधायक शाहिद मंजूर का विकास कराने का दावा है, हालांकि यहां बुनियादी समस्याएं आज भी जस की तस ...और पढ़ें

    किठौर विधानसभा क्षेत्र

    किठौर विधानसभा क्षेत्र

    HighLights

    1. सड़क, बिजली, पानी जैसी समस्याएं आज भी बरकरार।

    2. किठौर को तहसील बनाने की मांग दशकों से लंबित।

    जागरण संवाददाता, मेरठ। किठौर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति का एक स्थायी चरित्र रहा है, हर चुनाव में बड़े-बड़े विकास के वादे और उसके बाद जमीनी हकीकत में ठहराव। दशकों से मतदाता उम्मीदों के साथ जनप्रतिनिधि चुनते रहे हैं, लेकिन बुनियादी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं, जो राजनीतिक प्राथमिकताओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

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    सपा के शाहिद मंजूर यहां से चार बार 2002, 2007, 2012 व 2022 जीत दर्ज कर चुके हैं, जो उनके राजनीतिक प्रभाव और जनाधार को दर्शाता है। इसी के साथ यह सवाल भी उठता है कि इतनी लंबी राजनीतिक निरंतरता के बावजूद क्षेत्र में विकास की ठोस तस्वीर क्यों नहीं बन सकी?

    किठौर को तहसील बनाने की वर्षों पुरानी मांग पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। शाहजहांपुर में सड़क किनारे लगने वाली फल-सब्जी आढ़त के कारण यातायात जाम रहता है, इससे वाहन चालक ही नहीं, बल्कि पैदल आवागमन भी मुश्किल रहता है। यहां नवीन मंडी के निर्माण का सपना भी पूरा नहीं हुआ। बिजली और पेयजल आपूर्ति जैसी गंभीर समस्याएं हैं।

    काली नदी की सफाई के लिए कार्ययोजना बनाने की पहल शुरू हुई, लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में चली गई। शाहजहांपुर व किठौर के बीच आइटीआइ का करोड़ों रुपये की लागत से निर्माण हुआ, लेकिन दस साल बाद भी इसमें एक भी बच्चे का प्रवेश नहीं हो सका। रखरखाव के अभाव में इसका भवन खंडहर हो गया। यह न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।

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    ऐसा ही कुछ हाल कांशीराम आवासीय योजना के तहत किठौर में बनाए गए भवन का भी है, जो अब कूड़ाघर बन चुका है। सड़कों में गहरे गड्ढे हैं। उनके जीर्णोद्धार के लिए कोई दूरगामी योजना नहीं है। सिसौली में सड़क निर्माण कार्य पूरा न होने से पुल हवा में झूल रहा है। किठौर में पुल निर्माण अधर में लटका है। खरखौदा में भी सब्जी व फल मंडी निर्माण की मांग पर ध्यान नहीं दिया गया।

    कस्बे में ड्रेनेज सिस्टम विकसित नहीं करने से जलभराव की विकट समस्या है। यहां एक भी राजकीय महाविद्यालय नहीं है। युवाओं को खेल से जोड़ने के लिए स्टेडियम, मैनेजमेंट कालेज समेत अन्य विद्यालय के निर्माण पर भी ध्यान नहीं दिया गया। रोजगार के लिए कोई औद्योगिक इकाई अस्तित्व में नहीं आई।

    मेरठ व गढ़मुक्तेश्वर के बीच करीब 50 किलोमीटर सड़क चौड़ीकरण का कार्य वर्ष 2021 में शुरू हुआ था लेकिन अब भी अधर में है। कई गांवों के संपर्क मार्ग बदहाल हैं। उनके पुनर्निर्माण की आवश्यकता है। यातायात व्यवस्था ठीक नहीं है। किठौर हो या शाहजहांपुर, दोनों कस्बों में भी जाम की समस्या बनी रहती है।

    प्रत्येक गांव के साथ कस्बों में विकास कार्य कराए: विधायक

    विधायक शाहिद मंजूर का दावा है कि विपक्ष में रहते हुए विधायक निधि के साथ-साथ विभिन्न मदों से प्रत्येक गांव के साथ कस्बों में विकास कार्य कराए हैं। 25 करोड़ रुपये की विधायक निधि खर्च की है। दिसौरा में छोइया के पुल, जेई नंगला में पुल का निर्माण कराया गया। नंगलामल से भटीपुरा के बीच सड़क निर्माण दो चरण का रह गया था, उसे पूरा कराया।

    विधायक के अनुसार चंदपुर में बिजलीघर स्वीकृत कराया, लेकिन वर्तमान सरकार में यह वापस हो गया। गढ़ रोड से मेघराजपुर, पचपेड़ा से ख्वाजापुर, रजपुरा गांव में दो सड़कों का निर्माण कराया। विद्युत लाइन शिफ्टिंग, ट्रांसफार्मर का लोड बढ़ाने और स्वास्थ्य पर भी काफी पैसा खर्च हुआ है। मेडिकल कालेज से सिसौली के बीच सड़क निर्माण के लिए पैसा जारी हो चुका है।

    महापुरुषों के नाम से गेट बनवाए। आइटीआइ, कालेज व स्कूल सपा सरकार के कार्यकाल में बने थे, लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार इनका रखरखाव सही नहीं कर पा रही है। किठौर में 50 बेड का अस्पताल भी इस सरकार ने नहीं शुरू कराया।

    ठगा महसूस कर रही जनता: पूर्व विधायक

    पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे भाजपा प्रत्याशी व पूर्व विधायक सत्यवीर त्यागी का कहना है कि क्षेत्र की जनता विकास के मामले में ठगा महसूस कर रही है। बीते चार साल में विकास के कार्य दिखाई नहीं दिए। मौजूदा विधायक ने अपनी निधि के 25 करोड़ कुछ नजदीकी लोगों के सड़क व खड़ंजे बनवाने में खर्च किए।

    कई गांव ऐसे हैं, जिनके संपर्क मार्ग की बदहाली दूर करने के लिए विधायक ने अपनी निधि से पैसा खर्च नहीं किया, न ही किसी विभाग को कोई प्रस्ताव दिया। विधायक निधि से बनी सड़क टूटकर उखड़ गई और गहरे गड्ढे हैं। विधायक निधि का उपयोग कहां हो रहा है, कोई नहीं बता सकता। तहसील व मंडी निर्माण के मुद्दे भी दिखाई नहीं दे रहे हैं।

    जनता कहिन

    तहसील बनाने की मांग 1995 में शुरू हुई थी, लेकिन विधायक शाहिद मंजूर ने इसका समर्थन तक नहीं किया। आइटीआइ का भवन खंडहर हो चुका लेकिन एक भी बच्चे का एडमिशन नहीं हुआ। सब्जी मंडी बनाने की मांग जस की तस है। चार बार के विधायक होने के बावजूद वह किठौर में अपेक्षित विकास नहीं करा पाए।
    -गुलफाम अहमद, किठौर
    तहसील बनवाने, फायर सर्विस स्टेशन व दो आइटीआइ कालेज संचालित कराने के मुद्दे विधायक खरा नहीं उतर सके। कांशीराम आवासीय भवन में डाले जा रहे कूड़े का मुद्दा विधानसभा में उठाने के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी गई।
    -मास्टर आसिफ ताहिर, किठौर
    क्षेत्र के अनेक गांवों में सब्जी, फल व फूल की खेती होती है। कस्बे में फल व सब्जी मंडी बनवाने की मांग वर्षों पुरानी है। यह मांग चुनावी मुद्दा भी थी, लेकिन जनप्रतिनिधि मंडी नहीं बनवा सके, फिर ऐसे जनप्रतिनिधि क्यों चुने जाते हैं।
    -शौराज सिंह त्यागी, खरखौदा
    खरखौदा विधानसभा क्षेत्र को खत्म कर नए परिसीमन के साथ किठौर में जोड़ दिया, जिससे विकास प्रभावित हुआ है। मंडी के साथ तहसील बनाने की मांग कई दशक पुरानी है, लेकिन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते जनता खुद को ठगा सा महसूस कर रही है।
    -राजीव त्यागी, व्यापारी, खरखौदा