ललिता गौतम के परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेसियों को रोका, प्रदेश प्रभारी बोले- गुंडों जैसा व्यवहार कर रही UP पुलिस
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल को ललिता गौतम के परिवार से मिलने से काशी टोल प्लाजा, मेरठ पर रोक दिया गया ...और पढ़ें

HighLights
पुलिस-प्रशासन पर पक्षपात और दलितों पर अत्याचार के आरोप लगाए गए।
कांग्रेस 27 जुलाई को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करेगी, संसद में उठेगा मुद्दा।
जागरण संवाददाता, मेरठ। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के नेतृत्व में ललिता गौतम के परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस के चार सांसदों, विधायक व अन्य पदाधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल को पुलिस और प्रशासन ने काशी टोल प्लाजा पर ही रोक लिया। इस दौरान काफी देर तक हंगामा और अधिकारियों के साथ नोंकझोक हुई। पुलिस प्रशासन ने इस प्रतिनिधिमंडल को टोल प्लाजा से आगे नहीं बढ़ने दिया।
आखिरकार सभी को वापस दिल्ली लौटना पड़ा। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने इस दौरान सरकार और पुलिस प्रशासन के व्यवहार पर रोष जताते हुए उन्होंने आरोप लगाया की भाजपा केवल अपने से संबंधित दलों को ही ललिता गौतम के गांव जाने दे रही है। कांग्रेस के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। भाजपा कांग्रेस से डरती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने पुलिस अधिकारियों को अपराधी बना दिया है। उन्हें खुली छूट दी गई है। वह गुंडों जैसा व्यवहार कर रहे हैं। कानून का रोजाना पुलिस मजाक उड़ा रही है। कभी भी किसी को हिरासत में लेकर उसके साथ इतनी मारपीट की जाती है कि मौत तक हो जाती है।
प्रदेश प्रभारी ने इस दौरान मांग की कि पुलिस हिरासत में लिए गए अधिवक्ता के साथ मारपीट करने वाले मेरठ के एसएसपी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करके संविधान के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को काफी देर इंतजार कराया और उसके बाद आगे भेजने से इनकार कर दिया। इस व्यवहार के खिलाफ कांग्रेस के सांसद संसद में आवाज उठाएंगे साथ ही 27 जुलाई को प्रदेश में हो रही विभिन्न घटनाओं के विरोध में जंतर मंतर पर धरना दिया जाएगा।
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प्रतिनिधिमंडल के मेरठ आने की सूचना पर पुलिस ने रात में ही कांग्रेस जिला अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियो के घरों पर पहरा बैठा दिया था लेकिन अधिकांश पदाधिकारी रात में ही मेरठ से दिल्ली पहुंच गए थे। सोमवार सुबह सभी लोग उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर एकत्र होकर मेरठ के लिए रवाना हुए।
प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, सांसद इमरान मसूद, बाराबंकी सांसद तनुज पूनिया, अमेठी सांसद केएल शर्मा, राज्यसभा सदस्य कर्मवीर बौद्ध, महाराजगंज के विधायक वीरेंद्र चौधरी, दिल्ली प्रदेश के एससी विभाग के अध्यक्ष संजय नीरज के साथ जिला अध्यक्ष गौरव भाटी, महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा आदि पदाधिकारी शामिल थे।
इस काफिले को पुलिस और प्रशासन की टीम ने काशी टोल प्लाजा पर रोक लिया। रोके जाने के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यहां जमकर नारेबाजी और हंगामा किया। एसपी सिटी और एडीएम सिटी ने उनसे वार्ता की और कहा कि गांव में ललिता गौतम के परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं है। वह प्रयागराज में परिवार के सदस्य की परीक्षा दिलाने गए हैं। आप लोगों के गांव में जाने से कानून व्यवस्था खराब हो सकती है।
परिवार का यदि कोई सदस्य होता तो आपकी यहीं पर उनसे मुलाकात कर दी जाती। अधिकारियों ने काफिले को टोल प्लाजा से आगे भेजने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद कांग्रेस सांसदों को वहां से वापस दिल्ली जाना पड़ा।
इसके बाद कांग्रेस प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में प्रदेश में दलितों पर अत्याचार हो रहा है। कई घटनाएं हो चुकी है और भाजपा विपक्षी दलो को पीड़ितों से मिलने तक नहीं दे रही है। अधिकारियों ने हमें डेढ़ घंटा से ज्यादा इंतजार कराया और उसके बाद आगे जाने देने से इनकार कर दिया गया जबकि हम लोगों ने कोई नारेबाजी अथवा कानून व्यवस्था खराब होने जैसा कृत्य ना करने का वादा किया था।
पांच लोगों के प्रतिनिधिमंडल को गांव ले जाने से भी अधिकारियों ने इनकार कर दिया। यह प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन की मनमानी है। जिसका विरोध किया जाएगा उन्होंने कहा कि प्रदेश में पक्षपात साफ नजर आ रहा है केवल भाजपा से जुड़े संगठन ही पीड़ित परिवारों के पास जा रहे हैं। पुलिस गुंडो जैसा व्यवहार कर रही है।
कांग्रेस इस मनमानी के विरुद्ध 27 जुलाई को जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस के सांसद इन सभी मुद्दों को संसद में उठाकर न्याय की मांग करेंगे। कांग्रेस ने पीड़ित परिवार को एक करोड रुपए मुआवजा, परिवार के सदस्यों को नौकरी, परिवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामले की सुनवाई करके शीघ्र न्याय दिलवाने की मांग की है।