Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    मेरठ में बस अड्डे को शहर से बाहर किया जा रहा शिफ्ट, 4 गांवो से 40 करोड़ से ज्यादा में खरीदी जाएगी जमीन

    Updated: Sat, 11 Apr 2026 04:09 PM (IST)

    मेरठ में नए बस अड्डों के लिए भूमि अधिग्रहण के भुगतान संबंधी मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी के 15 सवालों का जवाब जिला प्रशासन ने भेज दिया है। ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक तस्वीर

    प्रतीकात्मक तस्वीर

    HighLights

    1. मंडलायुक्त ने भूमि अधिग्रहण भुगतान पर उठाए थे 15 सवाल।

    2. जिला प्रशासन ने सभी सवालों के जवाब मंडलायुक्त को भेजे।

    3. 40 करोड़ से अधिक भुगतान की अनुमति जल्द मिलने की उम्मीद।

    जागरण संवाददाता, मेरठ। मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी का आदेश है कि किसी भी परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण और सीधी खरीद के लिए भुगतान से पहले जमीनों का पुराना रिकार्ड चेक करके उसका सत्यापन किया जाए।

    इसके बाद ही जमीन की मुआवजा राशि का भुगतान करें। रोडवेज के भैंसाली बस अड्डा को शहर के बाहर स्थानांतरित करने के लिए की जा रही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में 40 करोड़ से अधिक राशि का भुगतान किया जाना है। जिसके लिए मंडलायुक्त की अनुमति आवश्यक है।

    इस अनुमति की पत्रावली पर कमिश्नर ने 15 सवाल खड़े करते हुए जवाब मांगा था। इन सभी का जवाब जिला प्रशासन ने तैयार करके कमिश्रर कार्यालय भेज दिया है। माना जा रहा है कि अब जल्द कमिश्नर से भुगतान की अनुमति मिल जाएगी। जिसके बाद जिला प्रशासन भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरा कर लेगा।

    शहर को जाममुक्त करने के लिए रोडवेज के भैंसाली बस अड्डे को शहर के बाहर मोदीपुरम और भूडबराल में स्थानांतरित किया जा रहा है। इससे भैंसाली बस अड्डे में रोजाना विभिन्न राज्यों और जनपदों से आने वाली चार सौ से ज्यादा बसों का शहर के भीतर आना बंद हो जाएगा। भूडबराल और मोदीपुरम में बस अड्डों के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है।

    प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जमीन मालिकों को दी जाने वाली मुआवजा राशि के अवार्ड तैयार करने की कार्रवाई की जा रही है। भैंसाली बस अड्डा और उसकी वर्कशाप की जमीन को रैपिड और मेट्रो रेल के स्टेशन निर्माण के लिए एनसीआरटीसी को दे दिया गया है। जिसके कारण दोनों नए बस अड्डों का निर्माण कराने की जिम्मेदारी एनसीआरटीसी के कंधों पर है।

    खरीदी जा रही जमीन सरकारी तो नहीं

    भुगतान की अनुमति के लिए पहुंची अधिग्रहण की पत्रावली पर मंडलायुक्त ने 15 सवाल दर्ज किए थे। उन्होंने इन जमीनों का 12 साला और 1359 फसली का रिकार्ड जांचकर यह स्पष्ट करने के लिए कहा है कि खरीदी जा रही जमीन कहीं सरकारी तो नहीं है।

    कमिश्नर के सवालों के जवाब के लिए जिला प्रशासन ने संबंधित सरधना और सदर तहसील के लेखपालों को बुलाकर रिकार्ड तलब किया। कलक्ट्रेट स्थित रिकार्ड रूम में भी जांच पड़ताल की गई। कमिश्नर ने एसडीएम के माध्यम से निरीक्षण कराकर जमीन की भौतिक स्थिति की रिपोर्ट मांगी है।

    खबरें और भी

    मूल्य निर्धारण समिति की बैठक को जिलाधिकारी की अद्यक्षता में करके उसका कार्यवृत्त उपलब्ध कराने के लिए कहा है। घोषणापत्र मांगा है कि उक्त भूमि के संबंध में कोई वाद न्यायालय में लंबित है अथवा नहीं। प्रस्ताव में कितनी भूमि पट्टे की है तथा कितनी भूमि विरासत की है।

    अनुसूचित जाति के लोगों की भूमि की सक्षम अधिकारी से विक्रय हेतु अनुमति की स्थिति की जानकारी मांगी है। इस भूमि का छह साला और 12 साला के सत्यापन की रिपोर्ट भी उन्होंने मांगी है। ये सभी कार्य कराने के बाद जिला प्रशासन ने रिपोर्ट मंडलायुक्त कार्यालय में भेज दी है। दोनों बस अड्डों के लिए 79 भूमि मालिकों की 39,930 वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है।

    इन गांवों की भूमि का हो रहा अधिग्रहण

    • भूडबराल
    • सिवाया
    • पल्हैड़ा
    • दुल्हैड़ा


    बस अड्डों के लिए अधिग्रहीत की जा रही जमीन की मुआवजा राशि 40 करोड़ से ज्यादा है। इसके लिए कमिश्नर की अनुमति की जरूरत होती है। कमिश्नर के सवालों का जबाव दे दिया गया है। उनकी अनुमति मिलते ही जमीन मालिकों को भुगतान करके जमीन पर कब्जा ले लिया जाएगा। -डा. वी के सिंह, जिलाधिकारी