खुशहाली की पाठशाला: मेरठ कॉलेज कैंपस में खिलखिला रही युवा सोच; Oxford Happiness Index में छात्रों का शानदार 'स्कोर'
मेरठ कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के एक अध्ययन में सामने आया है कि कॉलेज के अधिकांश विद्यार्थियों का हैप्पीनेस इंडेक्स सामान्य से अधिक है। ...और पढ़ें

मेरठ कॉलेज कैंपस में खिलखिला रही युवा सोच (AI जेनरेटिड फोटो)
HighLights
मनोविज्ञान विभाग ने ऑक्सफोर्ड हैप्पीनेस प्रश्नावली के आधार पर किया अध्ययन।
सकारात्मक माहौल, शिक्षक-छात्र संबंध मानसिक स्वास्थ्य के लिए हैं अनुकूल।
जागरण संवाददाता, मेरठ। मेरठ काॅलेज का शांत, हरित और ऐतिहासिक परिसर केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और खुशहाली का भी मजबूत आधार बन रहा है। मनोविज्ञान विभाग की ओर से ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ऑक्सफोर्ड हैपीनेस इंडेक्स पर आधारित अध्ययन में यह सामने आया है कि कालेज के अधिकांश विद्यार्थियों का हैप्पीनेस इंडेक्स सामान्य स्तर से अधिक है।
शोध के अनुसार हरियाली, विशाल खेल मैदान, सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण, रैगिंग-मुक्त परिसर और शिक्षक-विद्यार्थी के आत्मीय संबंध विद्यार्थियों को तनावमुक्त और अधिक प्रसन्न बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

यह अध्ययन मनोविज्ञान विभाग की प्रो. मंजू खोखर के निर्देशन में 18 से 24 वर्ष आयु वर्ग के 246 विद्यार्थियों पर किया गया। शोध में ऑक्सफोर्ड हैप्पीनेस प्रश्नावली के 29 कथनों के आधार पर एक से छह अंक तक की रेटिंग ली गई।
तीन से चार अंक को औसत, चार से अधिक अंक को उच्च हैप्पीनेस और तीन से कम अंक को कम हैप्पीनेस का संकेत माना गया। विश्लेषण में अधिकांश विद्यार्थियों का स्कोर चार से अधिक पाया गया, जो सामान्य से बेहतर मानसिक प्रसन्नता का संकेत देता है।
'जीवन अच्छा है' और 'मैं बहुत खुश हूं' जैसे कथनों पर सबसे अधिक सहमति
शोधकर्ताओं ने 29 प्रश्नों का थीमेटिक विश्लेषण भी किया। इसमें जिन कथनों पर विद्यार्थियों ने सबसे अधिक सकारात्मक प्रतिक्रिया दी, उनमें 'जीवन अच्छा है), मैं बहुत खुश हूं, जीवन सार्थक और संतोषजनक है, अधिकांश लोगों के प्रति आत्मीय भाव रखता हूं और मुझे दूसरों के जीवन और समाज में रुचि है, प्रमुख रहे। इससे स्पष्ट हुआ कि विद्यार्थी केवल व्यक्तिगत स्तर पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक संबंधों और भविष्य के प्रति भी सकारात्मक सोच रखते हैं।
परिसर का वातावरण बना खुशहाली की सबसे बड़ी वजह

अध्ययन के अनुसार कालेज की घनी हरियाली, ऐतिहासिक इमारतें और खुला वातावरण विद्यार्थियों के तनाव को कम करने में सहायक हैं। विशाल खेल मैदान में नियमित खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों से शरीर में डोपामिन और अन्य 'हैप्पी हार्मोन' का स्राव बढ़ता है, जिससे मानसिक प्रसन्नता में वृद्धि होती है। रैगिंग-मुक्त परिसर, सीनियर-जूनियर के मधुर संबंध और शिक्षकों का सहयोगात्मक व्यवहार विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सुरक्षा की भावना और सीखने की प्रेरणा बढ़ाता है।
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शैक्षणिक प्रदर्शन पर भी पड़ सकता है सकारात्मक प्रभाव

प्रोफेसर मंजू खोखर का मानना है कि उच्च हैप्पीनेस इंडेक्स केवल भावनात्मक संतुष्टि का संकेत नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध बेहतर एकाग्रता, रचनात्मकता, निर्णय क्षमता, सामाजिक सहभागिता और शैक्षणिक उपलब्धियों से भी है। सकारात्मक मानसिक स्थिति वाले विद्यार्थी तनाव का बेहतर सामना करते हैं, टीमवर्क में अधिक प्रभावी होते हैं और नवाचार की ओर तेजी से बढ़ते हैं। ऐसे वातावरण में ड्रापआउट की संभावना कम होती है और कैंपस संस्कृति अधिक स्वस्थ बनती है।
विद्यार्थियों को दिए गए यह सुझाव
मेरठ कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर युद्धवीर सिंह ने बताया कि अध्ययन में विद्यार्थियों को सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी, कृतज्ञता का अभ्यास, आत्मसम्मान विकसित करने, कठिन परिस्थितियों का धैर्यपूर्वक सामना करने और आवश्यकता पड़ने पर मनोवैज्ञानिक परामर्श लेने की सलाह दी गई है। साथ ही जीवन में फोर-डी प्रिंसिपल डिसीप्लीन यानि अनुशासन, डिटरमिनेशन यानी दृढ़ संकल्प, डेडिकेशन यानी समर्पण और डेवलपमेंट यानि निरंतर विकास को अपनाने पर बल दिया गया है।
मेरठ कालेज के प्रेस प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी प्रो. चंद्रशेखर भारद्वाज ने बताया कि अध्ययन में आक्सफोर्ड हैप्पीनेस प्रश्नावली के 29 कथनों का कालेज संदर्भ में विस्तृत थीमेटिक विश्लेषण किया गया। परिणाम बताते हैं कि महाविद्यालय का सकारात्मक वातावरण विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास के लिए अत्यंत अनुकूल है।