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    नशे में डूब गईं परिवार की खुशियां, बचे आंसू और गम... मासूम बेटियों के सिर से उठा माता-पिता का साया

    By Anand Prakash Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Sun, 09 Aug 2026 12:44 PM (IST)

    मेरठ के उमरनगर में नशे की लत ने एक परिवार को तबाह कर दिया। स्मैक के आदी युवक ने आत्मदाह कर लिया, जिसमें उसकी पत्नी की भी जान चली गई और दो मासूम बेटिया ...और पढ़ें

    जुबैर और निदा का फाइल चित्र। सौ. स्वजन

    जुबैर और निदा का फाइल चित्र। सौ. स्वजन

    HighLights

    1. नशे के आदी युवक जुबैर ने आत्मदाह कर जान दी।

    2. पत्नी निदा की भी आग में झुलसकर दुखद मौत हुई।

    3. दो मासूम बेटियां माता-पिता विहीन हो अनाथ हुईं।

    जागरण संवाददाता, मेरठ। हर नशा स्वास्थ्य, परिवार और समाज के लिए घातक होता है। कोई स्मैक के नशे में डूब रहा तो कोई शराब का आदी हो चुका है। युवाओं की रगों में दौड़ता नशा परिवारों को तबाह कर रहा है। उमरनगर गली नंबर-1 में रहने वाला परिवार इसी पीड़ा से गुजर रहा है। परिवार के 28 वर्षीय युवक को नशे की लत लग गई। परिवार वालों ने रोकने की कोशिश की तो उसने आत्मदाह कर लिया। इसी दौरान आग में झुलसी उसकी पत्नी की भी जान चली गई थी।

    परिवार की सारी खुशियां छिन चुकी हैं। दो मासूम बेटियों के सिर से माता-पिता का साया छिन चुका है। अब यहां पसरा है चौतरफा गम और बचे हैं सिर्फ दर्द के आंसू। उमर नगर निवासी हारुन पावरलूम कारखाना चलाते हैं। उनका इकलौता बेटा था जुबैर। तीन बेटियां हैं। कोरोना काल में दोस्तों की कुसंगत में हारुन को स्मैक के नशे की लत लग गई। मां शबनम बताती हैं कि जुबैर को एक माह के लिए दिल्ली के नशामुक्ति केंद्र में भिजवाया था।

    मेरठ में ही डा. जयप्रकाश से उसका उपचार कराया था। डाक्टर ने छह महीने की दवा लिखी थी, लेकिन जुबैर दवा का पूरा कोर्स नहीं करता था। दोस्त उसे चोरी-छिपे स्मैक लाकर देते थे। पत्नी निदा भी नशा करने का विरोध करती थी। उन्होंने जुबैर को लगभग दो माह तक घर से नहीं निकलने दिया, लेकिन उसके दोस्त उसे स्मैक उपलब्ध कराते रहे। इसी को लेकर इसी साल पांच अप्रैल को जुबैर और उसकी पत्नी निदा के बीच कहासुनी हुई तो जुबैर ने अपने साथ निदा को भी कमरे में बंद कर लिया। इसके बाद केरोसिन उड़ेलकर आग लगा ली थी।

    बुरी तरह से जली निदा की उसी दिन मौत हो गई थी, जबकि जुबैर ने अगले दिन छह अप्रैल को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ा था। परिवार में अब हारुन, उनकी पत्नी शबनम और दो पोती हैं। हारुन और शबनम का कहना है कि नशे ने हमारा परिवार उजाड़ दिया। नशा बेचने वाले गली-गली सक्रिय हैं। इनकी कमर तोड़कर अनेक युवाओं की जिंदगी बचाई जा सकती है। वह आसपास लोगों को यही समझाते हैं कि नशे से दूर रहो, अन्यथा हमारी तरह तड़पना पड़ेगा।

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    घर में अकेली रोती रहती हूं
    जुबैर की दो पुत्रियां पौने दो वर्ष की मरियम और छह महीने की हया को अहसास भी नहीं कि उनके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। जुबैर और पुत्रवधू की याद में मां शबनम बेसुध सी रहती हैं। जैसे ही इस घटना का जिक्र छिड़ा, उनकी आंखें छलछला उठीं। वह फफकते हुए बोलीं-क्या करूं, घर में अकेली बैठी रोती रहती हूं। पिता हारुन ने कहा कि नशे ने हमारे परिवार की खुशियां छीन लीं। युवाओं को नशे से दूर रहना चाहिए। नशे की लत इंसान की सामाजिक प्रतिष्ठा खराब करने के साथ स्वास्थ्य का भी नाश कर देती है।