मेरठ में मांगों को लेकर गरजे किसान, कमिश्नरी चौराहा किया जाम; ट्रैक्टरों के साथ पहुंचे कलक्ट्रेट
भारतीय किसान यूनियन ने मेरठ में कमिश्नरी चौराहे पर दो घंटे तक जाम लगाकर प्रदर्शन किया और ट्रैक्टरों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे। किसानों ने प्रधानमंत्री क ...और पढ़ें
HighLights
भाकियू ने मेरठ में कमिश्नरी चौराहा दो घंटे जाम किया।
किसानों ने प्रधानमंत्री के नाम 13 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
जागरण संवाददाता, मेरठ। भारतीय किसान यूनियन ने मंगलवार को कमिश्नरी चौराहे पर जमकर हंगामा किया। किसानों ने कमिश्नरी पर करीब दो घंटे तक जाम लगाए रखा। कमिश्नर कार्यालय के गेट पर ट्रैक्टर खड़े कर दिए। अपर आयुक्त काे प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन देने के बाद सभी किसान ट्रैक्टरों के साथ कलक्ट्रेट पहुंच गए।
भाकियू ने किसानों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर मंडलायुक्त को 13 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। संगठन का कहना है कि कई मुद्दों को पहले भी जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के समक्ष उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक उनका समाधान नहीं हुआ। भाकियू ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो किसानों को अनिश्चितकालीन आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
ज्ञापन देने से पहले कमिश्नरी पर किसानी ने खूब हंगामा काटा। करीब दो घंटे तक कमिश्नरी पर जाम लगा रहा। करीब एक 30 ट्रैक्टरों से जाम किया कमिश्नरी चौराहा। दो घंटे बाद अपर आयुक्त अमित कुमार को ज्ञापन दिया। इसके बाद किसान ट्रैक्टर लेकर कलेक्ट्रेट लेकर पहुंचे और धरना शुरू कर दिया।
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के नेतृत्व में किसानों ने प्रधानमंत्री के नाम मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपकर किसानों से जुड़े लंबित मामलों के शीघ्र समाधान की मांग की। ज्ञापन में कहा गया है कि जनपद की कई समस्याओं से संबंधित अधिकारियों को पूर्व में भी अवगत कराया गया था।
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किसान दिवस, धरना-प्रदर्शन और विभिन्न बैठकों के माध्यम से भी प्रशासन का ध्यान इन मुद्दों की ओर आकर्षित किया गया, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हो सका। भाकियू ने कहा कि किसानों की समस्याओं को विभागवार संकलित कर मंडलायुक्त के समक्ष रखा गया है।
संगठन ने मांग की कि सभी संबंधित विभागों को निर्देशित कर समयबद्ध तरीके से समस्याओं का निस्तारण कराया जाए। संगठन का कहना है कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो किसानों को अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
ज्ञापन में एमएसपी की कानूनी गारंटी, गन्ना भुगतान, स्मार्ट मीटर, ट्यूबवेल मीटर, नई ग्राम पंचायतों के गठन, किसान खरीद योजना, गन्नौली कट सहित कई स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों को शामिल किया गया है। संगठन ने कहा कि किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान प्रदेश के लाखों किसानों के हित में आवश्यक है।
भाकियू की प्रमुख 13 मांगें
- एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की कानूनी गारंटी दी जाए।
- अमेरिका के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड डील न की जाए।
- दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान किसानों से किए गए वादे पूरे किए जाएं।
- प्रत्येक जिले में किसान खरीद योजना प्रभावी ढंग से लागू की जाए।
- कृषि योजनाओं की भ्रष्टाचार मुक्त निगरानी कर उन्हें धरातल पर लागू किया जाए।
- ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर व्यवस्था पूरी तरह समाप्त की जाए।
- ट्यूबवेल मीटर लगाने की व्यवस्था बंद की जाए।
- किसानों का बकाया गन्ना भुगतान तत्काल कराया जाए तथा फसल बीमा का लाभ सुनिश्चित किया जाए।
- गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) सत्र शुरू होने से पहले 500 रुपये प्रति कुंतल घोषित किया जाए।
- नए कांवड़ सेवा शिविरों को अनुमति प्रदान की जाए।
- पोस्टमार्टम अनुमति प्रक्रिया को सरल एवं समयबद्ध बनाया जाए।
- एक हजार से अधिक आबादी वाले गांवों को अलग ग्राम पंचायत का दर्जा दिया जाए।
- दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे पर गन्नौली कट खोला जाए तथा गन्ना, बिजली, सिंचाई, शिक्षा, एनएचएआई, तहसील, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी समस्याओं का समाधान कराया जाए।