बस vs नमो भारत: मेरठ नार्थ से निजामुद्दीन तक के सफर का पूरा गणित, महिलाओं के लिए क्या है बेहतर?
मेरठ में मेट्रो और नमो भारत ट्रेनें महिलाओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का साधन बन गई हैं। आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे और पर्याप्त ...और पढ़ें

HighLights
मेट्रो और नमो भारत ट्रेनें महिलाओं के लिए सुरक्षित।
आधुनिक सुरक्षा, सीसीटीवी से देर रात भी सुरक्षित सफर।
समय की बचत और भीड़भाड़ से मिलती है मुक्ति।
जागरण संवाददाता, मेरठ। मेट्रो सेवा शुरू होने के बाद महिलाओं के लिए यात्रा पहले से अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक हो गई है। आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी के कारण अब महिलाएं देर रात तक भी मेट्रो से सफर करने में सुरक्षित महसूस कर रही हैं। इसी संबंध में दैनिक जागरण ने महिला यात्रियों से बात की। महिलाओं ने कहा कि मेट्रो और नमो दोनों सुरक्षित ट्रेनें है।
बिना डरे अब घर आते हैं। पहले आटो, बस में डर लगता था। कोई हादसा न हो जाए। यहां पर लगे सीसीटीवी कैमरे, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा व्यवस्था होने से यात्रियों को सुरक्षित माहौल मिल रहा है। इसका सबसे अधिक लाभ रोजाना यात्रा करने वाली महिलाओं को मिल रहा है। आइए बताए किस महिला ने क्या कहा...।
यह बोली महिलाएं....
मेरा मेरठ नार्थ से रोज निजामुद्दीन जाना होता है। इसमें करीब 210 रुपये खर्च होते हैं, जबकि पहले बस से 120 रुपये लगते थे। लेकिन सबसे अहम बात यह है कि शाम 10 बजे तक बिना किसी जोखिम के सुरक्षित समय पर पहुंच जाती हूं। -नेहा मित्तल, पल्लवपुरम
पहले परतापुर से बेगमपुल तक आने में आटो से 30 रुपये लगते थे और मेट्रो में भी 30 रुपये ही लगते हैं। सफर में सुरक्षित महसूस करती हूं। रोज की भीड़ और धक्का-मुक्की से भी बचाव हो जाता है। पहले रास्ते का जाम काफी समय खराब करता था, अब समय की बचत हो रही है। -निकिता मित्तल, परतापुर
फुटबाल चौक से बेगमपुल आना-जाना लगा रहता है। मेरठ सेंट्रल से बेगमपुल पहुंचने में अब केवल चार मिनट लगते हैं, जबकि पहले आटो से करीब आधा घंटा लग जाता था। पहले 15 रुपये लगते थे, अब 20 रुपये लगते हैं। पांच रुपये ज्यादा सही, लेकिन सुरक्षा सबसे पहले है। -पूनम, फुटबाल चौक
मैं गुरुग्राम में जाब करती हूं। पहले बस से सफर करना पड़ता था, जिसमें करीब चार घंटे लगते थे और 200 रुपये खर्च होते थे। अब 120 रुपये में मात्र दो घंटे में दिल्ली पहुंच जाती हूं। सफर काफी सुरक्षित और सुविधाजनक लग रहा है। -सिमरन, मोदीनगर