जंतर-मंतर लाठीचार्ज पर मेरठ में उबाल, छात्रों ने निकाली शिक्षा मंत्री की अर्थी; सेंट्रल बार एसोसिएशन ने सौंपा ज्ञापन
मेरठ में जंतर-मंतर पर छात्रों के लाठीचार्ज के विरोध में सेंट्रल बार एसोसिएशन ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा, जिसमें निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवा ...और पढ़ें

मेरठ में छात्रों ने शिक्षा मंत्री की अर्थी निकाली, छात्र को हिरासत में लेती पुलिस। जागरण
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जंतर-मंतर लाठीचार्ज के विरोध में मेरठ में जोरदार प्रदर्शन।
सेंट्रल बार एसोसिएशन ने ज्ञापन सौंपकर जांच की मांग की।
जागरण संवाददाता, मेरठ। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज के विरोध में सेंट्रल बार एसोसिएशन ने राष्ट्रपति के नाम डीएम को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, घायल प्रदर्शनकारियों को मुआवजा और मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने की मांग की गई।
उधर, इसी मुद्दे पर मेरठ कालेज के छात्रों ने शिक्षा मंत्री की अर्थी निकाली। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे एक छात्र को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हालांकि बाद में छोड़ दिया गया।
सेंट्रल बार एसोसिएशन ने राष्ट्रपति के नाम भेजे ज्ञापन में दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों द्वारा किए गए आंदोलन के दौरान हुई कार्रवाई पर आपत्ति जताई। एसोसिएशन का कहना है कि केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में शांतिपूर्ण धरना, प्रदर्शन और क्रमिक अनशन कर रहे आंदोलनकारियों के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत व्यवहार किया गया।

आरोप लगाया कि आंदोलन को दबाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से प्रदर्शनकारियों को घेरने, वाहनों में पत्थर भरकर लाने तथा टूटी-फूटी गाड़ियों का इस्तेमाल कर आंदोलनकारियों को झूठे मुकदमों में फंसाने का प्रयास किया गया। साथ ही बिना स्पष्ट पहचान वाले वर्दीधारियों की तैनाती को भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर बताया गया।
बार एसोसिएशन ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। ज्ञापन में घायल प्रदर्शनकारियों को उचित उपचार और मुआवजा देने के साथ-साथ आंदोलन के दौरान मृत लोगों के परिजनों को सरकारी सेवा में नियुक्ति देने की मांग भी की गई है।
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एसोसिएशन ने राष्ट्रपति से मामले की गंभीरता को देखते हुए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। आरोप लगाया गया है कि लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ है और संविधान की भावना के विपरीत कार्य किए गए हैं। वही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई है।