CCSU में इंसानी दिमाग की तरह काम करने वाली ‘सिनैप्टिक मेमोरी’ पर हुआ रिसर्च, इससे AI में भी खुलेंगी नई संभावनाएं
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक खास उपलब्धि हासिल की है। टीम का न्यूरोमार्फिक कम्प्यूटिंग पर आधारित सिनैप्टिक ...और पढ़ें

शोध में दर्शाएं गए जैविक तंत्रिका तंत्र और कृत्रिम तंत्रिका तंत्र का एक योजनाबद्ध निरूपण का चित्र। सौ. शोध जर्नल
HighLights
अंतरराष्ट्रीय जर्नल इन्फोमैट में प्रकाशित किया गया है शोध।
न्यूरोमार्फिक कंप्यूटिंग के लिए विकसित लेड-फ्री तकनीक।
जागरण संवाददाता, मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) के भौतिकी विभाग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। न्यूरोमार्फिक कम्प्यूटिंग पर आधारित सिनैप्टिक मेमोरी पर टीम का अभिनव शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल इन्फोमैट में प्रकाशित हुआ है।
वाइली की ओर से प्रकाशित इस शोध जर्नल का इम्पैैक्ट फैक्टर 22.3 है। शोध की उच्च गुणवत्ता को देखते हुए इसकी हाइलाइट इमेज को जर्नल के कवर पेज के लिए भी चयनित किया गया है जो किसी भी वैज्ञानिक कार्य के लिए अत्यंत सम्मानजनक उपलब्धि मानी जाती है।
यह शोध ‘न्यूरोमार्फिक कंप्यूटिंग’ पर आधारित है, यानी ऐसी कंप्यूटर तकनीक जो इंसानी दिमाग की तरह काम करती है। जिस प्रकार मानव मस्तिष्क में न्यूरान और सिनैप्स मिलकर सूचना को स्टोर और प्रोसेस करते हैं, उसी सिद्धांत पर यह नई ‘सिनैप्टिक मेमोरी डिवाइस’ विकसित की गई है।
इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें सीसा रहित अकार्बनिक हैलाइड पेरोव्स्काइट (लेड-फ्री इनआर्गेनिक हैलाइड पेरोस्काइट) मटेरियल का उपयोग किया गया है जो पारंपरिक लेड आधारित पदार्थों की तुलना में अधिक सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल है।
यह है तकनीक की प्रमुख विशेषताएं
शोध में शामिल रहे सीसीएसयू के फिजिक्स विभाग के प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा ने सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि इस तकनीक की विशेषओं में दिमाग जैसा व्यवहार है जो सीखने और भूलने की क्षमता प्रदर्शित करती है।
इसके ऊर्जा-कुशल संचालन भविष्य की ग्रीन कंप्यूटिंग के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें लंबे समय तक डेटा सुरक्षित रखने की क्षमता। इसकी तेज प्रोसेसिंग क्षमता में फास्ट स्विचिंग और बेहतर आन-आफ रेशियो के साथ ही यह बेहद पर्यावरण अनुकूल भी है। इसकी लेड-फ्री संरचना मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है।
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ऐसे किया गया यह शोध
शोधकर्ताओं ने बिस्मथ (बीआइ), एंटीमनी (एसबी) और टिन (एसएन) जैसे सुरक्षित तत्वों का उपयोग करते हुए उन्नत निर्माण तकनीकों, स्पिन कोटिंग, केमिकल वेपर डिपरेजिशन (सीवीडी) और ई-बीम एवापोरेशन के जरिए मेमोरी डिवाइस तैयार किए।
इन डिवाइस का मूल्यांकन कई वैज्ञानिक मानकों पर किया गया, जिनमें आन-आफ रेशियो, रिटेंशन टाइम, स्विचिंग स्पीड, स्थिरता (स्टेबिलिटी) के परिणामों में इन डिवाइस ने उत्कृष्ट प्रदर्शन दिखाया, जो इनके व्यावहारिक उपयोग की संभावनाओं को मजबूत करता है।
वैश्विक सहयोग से बना शोध
इस उच्चस्तरीय शोध कार्य में भारत और दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से योगदान दिया। सीसीएसयू के प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा, शाेधार्थी दीपक कुमार व मनीषा शर्मा, एनआइटी दुर्गापुर से प्रोफेसर अनिरुद्ध मंडल व सुभाशीष चंदा और डोंगुक यूनिवर्सिटी कोरिया से प्रोफेसर सेजून ली शामिल रहै।
प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा के अनुसार यह शोध कई उभरते क्षेत्रों में नई दिशा प्रदान कर सकता है। बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) को अधिक सक्षम और ऊर्जा-कुशल बनाने, स्मार्ट इलेक्ट्रानिक्स और ब्रेन-इंस्पायर्ड कंप्यूटिंग सिस्टम का विकास करने और न्यूरोलाजिकल समस्याओं, विशेषकर मस्तिष्क संबंधी चोटों के उपचार में संभावित उपयोगी साबित हो सकता है।