क्या होता है 'स्लीप एपनिया', सोते समय होने वाली इस परेशानी को नजरअंदाज करना हो सकता है जानलेवा
रोटरी क्लब मेरठ ने 'स्लीप एपनिया' पर एक स्वास्थ्य संगोष्ठी आयोजित की, जहाँ विशेषज्ञों ने खर्राटों को एक गंभीर श्वसन विकार बताया। डॉक्टरों ने चेतावनी द ...और पढ़ें

कैसे होते हैं स्लीप एप्निया के लक्षण? (Picture Courtesy: Freepik)
जागरण संवाददाता, मेरठ। रोटरी क्लब द्वारा गुरुवार को बच्चा पार्क स्थित आइएमए हाल में स्वास्थ्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सभा का मुख्य विषय "स्लीप एपनिया का सच, खर्राटों से गंभीर बीमारी’ रहा। संगोष्ठी में शहर के जाने-माने चिकित्सकों ने हिस्सा लिया और नींद से जुड़ी इस गंभीर बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक किया।

वरिष्ठ सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डा. वीरोत्तम तोमर ने कहा कि स्लीप एपनिया केवल नींद में आने वाले सामान्य खर्राटे नहीं बल्कि एक गंभीर श्वसन विकार है। इस बीमारी में सोते समय व्यक्ति की सांस बार-बार रुकती और शुरू होती है। सांस रुकने के कारण शरीर में आक्सीजन का स्तर तेजी से गिरता है जो अंगों पर दबाव डालता है। डा. तोमर ने आगाह किया कि स्लीप एपनिया को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। आक्सीजन की कमी और बाधित नींद के कारण शरीर में कई घातक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इनमें उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, मधुमेह शामिल है।
क्लब अध्यक्ष पंकज कंसल, सचिव आलोक बंसल और डा. सतीश चंद्र शर्मा सहित सभी सदस्यों का विशेष सहयोग रहा। स्वस्थ जीवन के लिए नींद का महत्व : कार्यक्रम में कार्डियोलाजिस्ट डा. सुनील शर्मा ने कहा कि स्वस्थ हृदय और मस्तिष्क के लिए हर वयस्क को कम से कम सात घंटे की गहरी नींद लेना अनिवार्य है। नींद की कमी सीधे तौर पर मानसिक तनाव और शारीरिक थकान को जन्म देती है, जो बाद में गंभीर जटिलताओं का रूप ले लेती है। कहा कि यदि किसी को अत्यधिक खर्राटे आने या सोते समय अचानक सांस रुकने की समस्या महसूस होती है तो इसे सामान्य मानकर टालें नहीं बल्कि तत्काल विशेषज्ञ से परामर्श लें।