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    मेरठ के सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, सेटबैक की जगह हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश

    By Sanjeev Kumar Jain Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Tue, 14 Jul 2026 04:07 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ की शास्त्री नगर योजना-7 में सील की गई 44 संपत्तियों के अवैध हिस्सों को ध्वस्त कर मूल स्वरूप में लाने का आदेश दिया है। निम्न और द ...और पढ़ें

    फाइल  फोटो

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    HighLights

    1. निम्न और दुर्बल आय वर्ग के मकानों के भी सेटबैक तोड़ने का कोर्ट का आदेश।

    2. शहर के अन्य भागों में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों को चिन्हित करने का आदेश।

    3. नई भवन निर्माण उपविधि लागू करने से इन्कार, सितंबर में होगी अगली सुनवाई।

    जागरण संवाददाता, मेरठ। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख कायम है। राहत की उम्मीद लगाए बैठे लोगों के हाथ मंगलवार को भी मायूसी ही लगी।

    व्यापारियों की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने उत्तर प्रदेश सरकार की नई उपविधि का हवाला देते हुए कहा कि कंपाउंडिंग फीस जमा कराकर व्यापारिक गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है। इसे मानने से इन्कार करते हुए कोर्ट ने सभी संपत्तियों में सेटबैक के स्थान पर हुए अवैध निर्माण को तोड़ने के लिए आवास एवं विकास परिषद को आदेश दिया।

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मालवीय नगर और लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड का चार बार जिक्र किया। कहा-बच्चों की जान कीमती है। हम इस तरह अवैध निर्माणों को वैध करने की अनुमति नहीं दे सकते। वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश हुए आवास आयुक्त पी. गुरुप्रसाद को कोर्ट ने शहर के अन्य हिस्सों में आवासीय क्षेत्रों में चल रहीं व्यावसायिक गतिविधियों को चिन्हित करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि अन्य जगह की भी जांच होनी चाहिए।

    किसी भी प्रकार का पक्षपात या भेदभाव नहीं होना चाहिए। आप इससे आंख नहीं मूंद सकते। अवमानना याचिकाकर्ता लोकेश खुराना के अधिवक्ता तुषार जैन ने बताया कि कोर्ट ने सील हुए 44 संपत्तियों के सेटबैक के स्थान पर हुए अवैध निर्माण हटाने के आदेश दिए हैं। हालांकि अभी कोर्ट का आदेश अपलोड नहीं हुआ है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की डबल बेंच में सुनवाई के दौरान आवास एवं विकास परिषद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नवीन पाहवा ने पक्ष रखा।

    उन्होंने कहा कि शास्त्रीनगर योजना संख्या सात में कुल चिन्हित 860 संपत्तियों में से 128 में सेटबैक छोड़ दिया गया है। 201 संपत्तियों में सेटबैक छोड़ने के लिए तोड़फोड़ चल रही है। उन्होंने कोर्ट के समक्ष टूटे भवनों के फोटोग्राफ भी प्रस्तुत किए। कोर्ट से नई भू उपयोग उपविधि के कंपाउंडिंग और ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के लगभग 500 मकानों में सेटबैक छोड़ने से छूट देने की अपील भी की। इस पर कोर्ट ने कड़ रुख अपनाते हुए कहा कि सेटबैक सभी को छोड़ना होगा।

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    कोर्ट ने सेंट्रल मार्केट में सील की गईं 44 संपत्तियों के सेटबैक के स्थान पर किए गए अवैध निर्माण को भी तोड़ने का आदेश दिया। कार्रवाई से पहले संपत्तियों के स्वामियों को नोटिस देकर अवैध निर्माण तोड़ने के लिए 15 दिन का समय देने के लिए कहा। इस अवधि में अवैध निर्माण नहीं तोड़ा जाता तो आवास एवं विकास परिषद स्वयं ध्वस्त करे। ध्वस्तीकरण का खर्चा संपत्ति के स्वामी से वसूला जाए। कोर्ट ने आवासीय क्षेत्र में स्कूल, बैंक और नर्सिंग होम के संचालन की अनुमति देने से स्पष्ट इन्कार किया है।

    कोर्ट ने प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद से पूछा कि क्या आपको मेरठ क्षेत्र के अन्य अवैध बाजारों या अवैध निर्माणों की जानकारी है? प्रमुख सचिव ने कहा कि उनका फोकस शास्त्रीनगर में हैं। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या उन्हें इसकी जानकारी नहीं होनी चाहिए? कोर्ट ने मेरठ शहर के क्षेत्रों और बाहरी भागों में बने आवासीय क्षेत्रों में चल रहीं व्यावसायिक गतिविधियों की जांच कराने के आदेश दिए।

    सुनवाई की अगली तिथि 21 सितंबर निर्धारित की गई है, जिसमें आवास एवं विकास परिषद को मंगलवार को दिए गए कोर्ट के आदेश की अनुपालन रिपोर्ट के साथ शहर के अन्य हिस्सों में आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों की रिपोर्ट भी कोर्ट में प्रस्तुत करनी होगी। उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने कहा कि आदेश अभी प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश के अध्ययन के बाद अनुपालन किया जाएगा।