Board Exams में नहीं आए अच्छे नंबर तो छात्रों का स्ट्रेस हो सकता है मैनेज, इस पर जाने-माने मनोचिकित्सकों ने दी राय
मुजफ्फरनगर में यूपी बोर्ड के रिजल्ट तनाव के कारण एक छात्र ने आत्महत्या कर ली। मनोचिकित्सकों ने अभिभावकों को बच्चों का तनाव कम करने, तुलना से बचने और भ ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
रिजल्ट के कारण छात्रों में होने वाले तनाव से बचाने में परिवार की बड़ी भूमिका।
बच्चों की दूसरों से तुलना करने से बचें अभिभावक, उनका आत्मविश्वास बढ़ाएं।
प्रवीण वशिष्ठ, मेरठ। मुजफ्फरनगर में यूपी बोर्ड का रिजल्ट आने के तनाव के चलते दसवीं के एक छात्र में जहरीला पदार्थ निगलकर आत्महत्या कर ली है। रिजल्ट से पहले और बाद में छात्रों में होने वाले तनाव से बचाने के लिए मनोचिकित्सक परिवार की बड़ी भूमिका मानते हैं। उनका कहना है कि अभिभावक बच्चों को बताएं कि परीक्षा में आए कम अंक या असफलता भी सीखने की प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है।
बच्चों के साथ मिलकर बनाएं भविष्य की योजनाएं: डा. रवि राणा

वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा. रवि राणा के अनुसार रिजल्ट से पहले और बाद में बच्चों का तनाव कम करने में अभिभावकों की बड़ी भूमिका है। उन्हें बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि रिजल्ट चाहे जो भी हो, उनके लिए सदा नए अवसर हैं। बच्चों के साथ मिलकर भविष्य की नई योजनाएं बनाएं।
बच्चों को बताएं कि परीक्षा या किसी भी क्षेत्र में असफलता भी हमारे सीखने का एक हिस्सा है। अगर रिजल्ट उम्मीदों के हिसाब से नहीं आता तो उन्हें हिम्मत दें और आगे बढ़ने और बेहतर करने के लिए प्रेरित करें। तनाव को कम करने के लिए योग और मेडिटेशन बहुत अच्छा तरीका है। इससे बच्चों का मन शांत रहेगा और रिजल्ट को लेकर होने वाली नेगेटिव सोच से दूर होगी।
रिजल्ट की प्रतीक्षा करते समय बच्चों का ध्यान दूसरी पॉजिटिव चीजों की ओर लगाएं। उन्हें उनके पसंदीदा खेल, किताबें पढ़ने, म्यूजिक सुनने या किसी क्रिएटिव काम में व्यस्त रखें। इससे उनका मन अच्छा रहेगा और वे ज्यादा सोचने से बचेंगे।
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बच्चों की दूसरों से तुलना करने से बचें
डा. रवि राणा कहते हैं कि कई बार माता-पिता या शिक्षक अनजाने में ही बच्चों की तुलना दूसरों से कर देते हैं। इससे उनका आत्मविश्वास कम होता है। बच्चों को समझाएं कि हर व्यक्ति की अपनी अलग योग्यता होती है और किसी दूसरे से तुलना करना उचित नहीं है। उन्हें उनकी खुद की प्रोग्रेस पर ध्यान करने के लिए प्रोत्साहित करें।
रिजल्ट खराब आना लाइफ का एक फेज, मंजिल नहीं: डा. तरुण पाल

लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज मेरठ में मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष डा. तरुण पाल कहते हैं कि अभिभावक बच्चों को अपना या प्रसिद्ध हस्तियों का उदाहरण देते हुए बताएं कि उनका रिजल्ट अच्छा नहीं रहा, लेकिन फिर भी उन्होंने जीवन में बहुत कुछ हासिल कर लिया। रिजल्ट खराब आना लाइफ का फेज है, मंजिल नहीं है।
अपनी बातों को परिवार व मित्रों के साथ शेयर करें
रिजल्ट खराब आने पर मायूसी में कई बार छात्र गलत कदम उठा लेते हैं। इससे बचाव के लिए उन्हें अपने पैरेंट्स, भाई-बहनों या दोस्तों से बात करनी चाहिए। उनके साथ समय बिताएं। दरअसल, चुप रहने से तनाव और बढ़ सकता है, इससे बचने को अपनी बातों को शेयर करें।
रिजल्ट खराब है तो सोशल मीडिया से दूरी बनाएं
डा. तरुण पाल कहते हैं कि रिजल्ट आने पर सोशल मीडिया पर कई लोग अच्छे नंबरों को लेकर बहुत दिखावा करते हैं। ऐसे में कम नंबर आने वालों का तनाव बढ़ सकता है। यदि किसी बच्चे का रिजल्ट खराब है तो कुछ दिनों सोशल मीडिया से दूरी रखना बेहतर होगा।
भविष्य की बनाएं योजना
रिजल्ट खराब आने पर तनाव के बजाय उससे सबक लें। आगे की अच्छी तैयारी करें। अपने कमजोर विषयों को पहचानें और उनकी अच्छी तैयारी करने का संकल्प लें। जिससे अगली बार आप बेहतर कर पाएं। दोबारा परीक्षा देना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इस पर विचार करें।
अपने आपको समय दें, हर बच्चा दूसरे अलग है
स्ट्रेस से बचने का अच्छा तरीका है कि अपने आपको समय देना। अपने पसंदीदा कामों करें। इसी के साथ अभिभावकों को सोचना चाहिए कि हर बच्चा दूसरे से अलग होता है, कोई पढ़ाई में अच्छा होता है तो कोई खेल या अन्य गतिविधि में। बच्चे की दूसरे से तुलना न करें। उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार आगे बढ़ने को प्रेरित करें।