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    रालोद की पश्चिमी यूपी में बढ़ती हलचल, भाजपा से सीटों के बीच बढ़ सकती है खींचतान

    Updated: Mon, 27 Apr 2026 08:41 AM (IST)

    UP Politics: राष्ट्रीय लोकदल की एकता रैली के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा और रालोद के बीच सीट बंटवारे को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। रालोद उन स ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर।

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    प्रदीप द्विवेदी, मेरठ। UP Politics: राष्ट्रीय लोकदल की एकता रैली की शुरुआत करने से पश्चिम उत्तर प्रदेश में भाजपा और रालोद के बीच सीट बंटवारे को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। जिन सीटों पर भाजपा चुनाव लड़ती रही है उस पर भी रालोद ने नजर गड़ा दी है इससे सरगर्मी बढ़ सकती है।

    पिछले विधानसभा चुनाव में आठ सीटें जीतने वाली रालोद ने इस बार विधानसभा में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अपनी क्षेत्रीय ताकत दिखाने की कसरत तेज कर दी है। 2022 में सपा से गठबंधन पर 32 सीट हिस्से में मिली थी, जयन्त चौधरी खोेई हुई जमीन तलाशने में जुटे थे क्योंकि 2017 में सिर्फ एक ही विधानसभा सीट जीत सके थे।

    उन दिनों संघर्ष और अस्तित्व को बचाने का समय था लेकिन इस बार वह केंद्रीय मंत्री हैं। 71 सीटों वाले पश्चिम उप्र में रालोद पहले से अधिक सीटें चाहेगा।

    इन जिलों की सीटों पर दावेदारी ज्यादा

    मेरठ की तीन सीटों पर हलचल अधिक बढ़ गई है। ये हैं सिवालखास, किठौर और सरधना। सिवालखास विधानसभा क्षेत्र में 2022 में यहां रालोद के सिंबल पर सपा नेता रहे गुलाम मोहम्मद जीते थे। रालोद ने यहां से रैली की शुरुआत की है, जिससे चर्चा आम हो गई है कि रालोद यहां पर अपनी मौजूदगी बरकरार रखेगा और चेहरा बदल सकती है।

    उधर, चर्चित सीट सरधना सीट को लेकर भी सुगबुगाहट शुरू हो गई है कि खेल विश्वविद्यालय के बहाने से रालोद इस सीट पर नजरें गड़ाए हुए है। इस सीट से भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम दावेदारी कर रहे हैं।

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    रालोद की नजर इन सीटों पर इसलिए

    सरधना भले ही मेरठ जिले का हिस्सा है लेकिन लोकसभा के हिसाब से मुजफ्फरनगर में है। मुजफ्फरनगर से रालोद ने कई बार दांव आजमाया लेकिन सफलता नहीं मिली। मेरठ का किठौर और गाजियाबाद की मुरादनगर त्यागी बहुल है, जिस पर रालोद की नजर है। जदयू से आए केसी त्यागी की सक्रियता से त्यागी बहुल गांवों पर नजर है। शामली जिले में शामली सदर और थानाभवन रालोद के पास है, तब गन्ना मंत्री रहे सुरेश राणा को रालोद के अशरफ अली ने हरा दिया था। यहां पर भाजपा और रालोद के बीच रस्साकशी हो सकती है क्योंकि सुरेश राणा अपनी राजनीतिक जमीन को फिर से पाना चाहेंगे।

    विधानसभा चुनाव 2022 में रालोद जीती थी आठ सीट

    अलीगढ़ मंडल की चार सीटों पर रालोद अपनी दावेदारी करता रहा है। इनमें हाथरस जिले में सादाबाद विधानसभा क्षेत्र और अलीगढ़ जिले में इगलास, खैर व बरौली विधानसभा क्षेत्र हैं। वर्तमान में सादाबाद में रालोद विधायक प्रदीप कुमार सिंह उर्फ गुड्डू हैं। 2022 के चुनाव में सपा से गठबंधन था। हाथरस की कुल तीन सीटों में से रालोद ने एक ही सीट सादाबाद मांगी थी, जिस पर उनका प्रत्याशी जीता। सादाबाद में पहले भी दो बार रालोद विधायक रहे हैं।

    सपा से बंटवारे में मिली थी 32 सीट

    अलीगढ़ में सात सीटों में से तीन सीट रालोद ने मांगी थीं। इनमें बरौली, इगलास और खैर रहीं। इन तीनों में भाजपा की जीत हुई थी। यहां पर रालोद फिर से दावेदारी चाहेगा। 2022 में मथुरा की पांच सीटों मेें रालोद ने तीन सीट बलदेव, छाता और गोवर्धन से प्रत्याशी उतारे थे। हालांकि सभी पांच सीटों पर भाजपा ने कब्जा कर लिया था। यहां भी बंटवारे पर समीकरण उलझ सकता है।

    रालोद के वर्तमान विधायक

    मेरठ का सिवालखास, बागपत जिले का छपरौली, शामली जिले का सदर और थानाभवन, मुजफ्फरनगर का पुरकाजी व बुढ़ाना व हाथरस का सादाबाद। मुजफ्फरनगर के खतौली में उपचुनाव हुआ था जिसमें रालोद प्रत्याशी जीते थे। वर्तमान में रालोद के एक एमएलसी भी हैं।

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