चुनार के बलुआ पत्थरों को मिलेगी वैश्विक पहचान, सात करोड़ से बनेगा सैंड स्टोन हेरिटेज पार्क
मीरजापुर में 7 करोड़ रुपये की लागत से 5 एकड़ में 'चुनार सैंड स्टोन हेरिटेज पार्क' बनेगा, जिसे पर्यटन विभाग ने मंजूरी दे दी है। यह पार्क चुनार की सदियो ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
चुनार में 7 करोड़ से बनेगा सैंड स्टोन हेरिटेज पार्क।
प्रस्तर कला और शिल्पकारों को मिलेगी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
जागरण संवाददाता, चुनार (मीरजापुर)। सदियों से अपने ऐतिहासिक किले, गंगा तट और विश्वप्रसिद्ध बलुआ पत्थरों के लिए पहचान रखने वाला चुनार अब अपनी प्रस्तर कला को नई उड़ान देने जा रहा है। चुनार के शिल्पकारों और मूर्तिकारों की अद्भुत कारीगरी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्लान तैयार किया गया है।
नई कोतवाली परेड ग्राउंड के समीप लगभग पांच एकड़ भूमि पर सात करोड़ रुपये की लागत से चुनार सैंड स्टोन हेरिटेज पार्क (चुनार बलुआ पत्थर विरासत उद्यान) विकसित किया जाएगा। गुरुवार को पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में पर्यटन विभाग ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति प्रदान कर दी।
विधायक अनुराग सिंह ने बताया कि यह परियोजना केवल एक पार्क का निर्माण नहीं, बल्कि चुनार की हजारों वर्षों पुरानी प्रस्तर कला, यहां के शिल्पकारों की परंपरा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की पहल है।
उन्होंने बताया कि प्रस्तर कला से जुड़े कारीगरों और व्यापारियों के लिए लंबे समय से एक स्थायी एवं व्यवस्थित मंच की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी उद्देश्य से 13 मई 2026 को जिलाधिकारी के माध्यम से परियोजना का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था, जिसे अब स्वीकृति मिल गई है।
कारोबार को मिलेगी उड़ान
हेरिटेज पार्क बनने के बाद प्रस्तर कला और मूर्तिकला से जुड़े कारीगरों को अपनी कलाकृतियों के प्रदर्शन और विपणन के लिए स्थायी स्थान मिलेगा। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक, कला प्रेमी और व्यापारी एक ही परिसर में चुनार के बलुआ पत्थरों से बनी मूर्तियां, सजावटी कलाकृतियां, वास्तुशिल्प सामग्री और पारंपरिक शिल्प को देख सकेंगे तथा उनकी खरीदारी भी कर सकेंगे। इससे वर्षों से बिखरे हुए इस कारोबार को पहली बार संगठित स्वरूप मिलेगा और स्थानीय शिल्पकारों के लिए नए बाजार और रोजगार के अवसर भी विकसित होंगे।
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दुनिया भर में है हुनर की पहचान
चुनार में वर्तमान समय में आधा दर्जन से अधिक प्रस्तर प्रसंस्करण इकाइयां संचालित हैं, जबकि तीन दर्जन से अधिक अनुभवी शिल्पकार और मूर्तिकार अपनी बेजोड़ कला से साधारण पत्थरों को आकर्षक मूर्तियों और कलाकृतियों का रूप देते हैं। इनकी बनाई गई कलाकृतियां देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों तक पहुंचती हैं।
मौर्यकाल से जुड़ी है पत्थरों की गौरवशाली विरासत
चुनार की प्रस्तर कला का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। मौर्य और गुप्तकाल से यहां के बलुआ पत्थरों का उपयोग अशोक स्तंभों, लाटों, मंदिरों और अनेक ऐतिहासिक स्मारकों के निर्माण में होता रहा है।
अपनी मजबूती, टिकाऊपन और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण चुनार के पत्थरों ने देशभर में विशेष पहचान बनाई। आज भी यहां की प्रस्तर कला करोड़ों रुपये के कारोबार का आधार है और बड़ी संख्या में परिवार इसी व्यवसाय से अपनी आजीविका चला रहे हैं।
सैंड स्टोन हेरिटेज पार्क के विकसित होने से चुनार आने वाले पर्यटकों को ऐतिहासिक धरोहरों के साथ-साथ स्थानीय प्रस्तर कला और मूर्तिकला की समृद्ध परंपरा को भी करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
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