मेड इन मीरजापुर को 'ग्लोबल प्रीमियम ब्रांड' बनाने की तैयारी, दुनियाभर में चमक बिखेरेगी कालीन
मीरजापुर के कालीन उद्योग को अब 'ग्लोबल प्रीमियम ब्रांड' बनाने की तैयारी है, जिससे अमेरिकी टैरिफ के झटके के बाद वैश्विक बाजार में नई रणनीति के साथ उतरा ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
मीरजापुर के कालीन बनेंगे 'ग्लोबल प्रीमियम ब्रांड'.
भारत-ब्रिटेन समझौते से शुल्क मुक्त निर्यात संभव.
हजारों कारीगरों को मिलेगा नया रोजगार और खुशहाली.
जागरण संवाददाता, मीरजापुर। विंध्य धरा पर बुने गए रंग-बिरंगे कालीन और नफीस दरी को अब ग्लोबल प्रीमियम ब्रांड बनाने की तैयारी है। अमेरिकी टैरिफ के झटके से सबक लेते हुए मीरजापुर का कालीन उद्योग अब वैश्विक बाजार में नई रणनीति के साथ उतरेगा। अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, जापान, कोरिया, आस्ट्रेलिया, यूरोप और खाड़ी देशों में नए बाजार विकसित किए जाएंगे।
भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) ने विश्व प्रसिद्ध कालीन उद्योग के लिए ब्रिटेन समेत यूरोप के बड़े बाजारों के दरवाजे खोल दिए हैं। ब्रिटेन में शुल्क मुक्त पहुंच मिलने से हस्तनिर्मित कालीन-दरी की चमक बढ़ेगी ही, पारंपरिक हुनर भी रंग बिखेरेंगे। इससे कालीन उद्योग अर्थव्यवस्था और रोजगार का महत्वपूर्ण स्तंभ बनेगा।
उत्तर प्रदेश निर्यात संवर्धन परिषद के सदस्य, कालीन एवं दरी सेक्टर के प्रतिनिधि, विक्रम कार्पेट्स के सीईओ व हथकरघा हस्तशिल्प निर्यातक कल्याण संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं अटल सम्मान-2024 से सम्मानित ऋषभ कुमार जैन ने कहा कि भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के बाद हस्तनिर्मित कालीन पर लगने वाला 10 से 12 प्रतिशत तक का आयात शुल्क समाप्त हो गया है। इससे अब कालीन ब्रिटेन के बाजार में पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे। नए खरीदार मिलेंगे और निर्यात बढ़ेंगे।
भविष्य में अन्य देशों के साथ भी ऐसे समझौते होने पर निर्यात को और गति मिलेगी। वर्तमान में भारत से ब्रिटेन को करीब 700 करोड़ रुपये का कालीन निर्यात होता है। हालांकि कालीन उद्योग का सबसे बड़ा बाजार अभी भी अमेरिका है, जहां कुल निर्यात का लगभग 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा जाता है। इसके बाद जर्मनी सहित अन्य यूरोपीय देशों का स्थान है। ब्रिटेन तीसरे या चौथे प्रमुख बाजार के रूप में उभर रहा है।
खबरें और भी
आस्ट्रेलिया, नार्डिक देशों और गल्फ देशों में भी मीरजापुर-भदोही के कालीनों की अच्छी मांग है। उन्होंने बताया कि मीरजापुर-भदोही में लगभग 700 निर्यातक हैं। कालीन उद्योग से लगभग 3.5 लाख परिवार की आजीविका जुड़ी है। दुनिया के अलग-अलग देशों में सालाना लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का निर्यात होता है।
मुख्य रूप से अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया और नॉर्डिक देशों में निर्यात किए जाते हैं। इसके अलावा यूरोप के अन्य देशों, गल्फ देशों और दुनिया के कई छोटे बाजारों में भी कालीन भेजे जाते हैं। यदि ब्रिटेन और यूरोप में मांग बढ़ती है तो बंद पड़े करघे फिर चलेंगे, उत्पादन बढ़ेगा और हजारों कारीगरों को नया काम मिलेगा।
दुनिया के बाजार में होगी 'मेड इन मीरजापुर' की अलग पहचान
निर्यातकों की योजना अब केवल माल भेजने तक सीमित नहीं है। 'मेड इन मीरजापुर' को ग्लोबल प्रीमियम ब्रांड बनाने, डिजिटल प्लेटफार्म के जरिए विदेशी ग्राहकों तक सीधी पहुंच बनाने और अंतरराष्ट्रीय ट्रेड फेयर में जिले के कालीनों की मजबूत ब्रांडिंग पर जोर दिया जाएगा। इससे मीरजापुर का पारंपरिक हुनर वैश्विक लक्जरी होम डेकोर बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकेगा।
ओडीओपी को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान
उत्तर प्रदेश सरकार की एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में कालीन उद्योग प्रमुख स्थान रखता है। योगी सरकार ओडीओपी उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। आधुनिक तकनीक, बेहतर डिजाइन, गुणवत्ता सुधार, ब्रांडिंग और निर्यात प्रोत्साहन जैसी पहलों से कालीन उद्योग को नई गति मिल रही है।
अब कारीगरों और उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिलेगा। ओडीओपी के माध्यम से निर्यात बढ़ेगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी निर्यातक राज्य बनाने के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।
मीरजापुर-भदोही का कालीन उद्योग प्रदेश की औद्योगिक विरासत और निर्यात क्षमता का मजबूत आधार है। भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते से स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी। उद्योग विभाग निर्यातकों को हर स्तर पर सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रयास है कि पारंपरिक उत्पाद अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचें, जिससे निवेश बढ़े, रोजगार के नए अवसर सृजित हों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। -विरेंद्र सिंह, संयुक्त आयुक्त उद्योग, विंध्याचल मंडल।
अमेरिकी टैरिफ के बाद ब्रिटेन का बाजार हमारे लिए नई उम्मीद लेकर आया है। यदि सीईटीए का पूरा लाभ मिला तो कालीन उद्योग को नई गति मिलेगी। अमेरिका पर निर्भरता कम होगी, यूरोप में नए खरीदार मिलेंगे और बंद पड़े करघों पर फिर से काम शुरू होगा। इससे हजारों बुनकरों और कारीगरों के घरों में दोबारा रोजगार और खुशहाली लौटेगी। -ऋषभ कुमार जैन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, हथकरघा हस्तशिल्प निर्यातक कल्याण संघ।
यह भी पढ़ें- लखनऊ : बरेली मंडल में ऑपरेशन प्रहार से 81 बसों का किया चालान, 59 जब्त; बिना परमिट और नियम तोड़ने पर एक्शन