विंध्य क्षेत्र में 35 हजार महिलाएं बनीं लखपति दीदी, आत्मनिर्भर होकर संवार रही भविष्य
विंध्य क्षेत्र में लखपति दीदी योजना के तहत 35,779 महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। ये महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर डे ...और पढ़ें

विंध्य क्षेत्र में 35 हजार महिलाएं बनीं लखपति दीदी।
HighLights
विंध्य क्षेत्र में 35,779 महिलाएं बनीं लखपति दीदी।
स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं हुईं आर्थिक सशक्त।
डेयरी, किराना, बकरी पालन से संवार रहीं भविष्य।
जागरण संवाददाता, मीरजापुर। लखपति दीदी योजना के तहत विंध्य क्षेत्र में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 35,779 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी यह महिलाएं किसी न किसी रोजगार के माध्यम से अपने आपको आर्थिक रूप से मजबूत बना रही हैं। इसके साथ ही स्वजन का सहारा व स्वावलंबन भी बन रही हैं।
लखपति दीदी योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है, जिससे उनकी वार्षिक आय एक लाख से अधिक हो जाए। इस योजना के माध्यम से महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता के साथ ही आजीविका का अवसर प्रदान करके आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। विकास खंड नरायनपुर के गांगपुर गांव में शीतला समूह की सपना देवी डेयरी पालन करके लखपती बन गई हैं।
समूह की ओर से प्रति दिन 200 लीटर दूध काशी मिल्क प्रोडूसर कंपनी को जाता है। इसी प्रकार नरायनपुर ब्लाक के फिरोजपुर की प्रिया सिंह भी डेयरी पालन करके आत्मनिर्भर के साथ लखपति दीदी बनी हैं।
इसी प्रकार विकास खंड छानबे की कंचन गुप्ता एफपीओ का संचालन कर रही हैं, तो दीदी नीतू सिंह किराना की दुकान संचालन, पटेहरा की अंजू सिंह डेयरी संचालन और रेनू बकरी पालन कर रही हैं।
डीसी एनआरएलएम रमाशंकर सिंह ने बताया कि स्वयं सहायता समूह की सभी महिलाएं अन्य दूसरी महिलाओं को रोजगार देकर स्वावलंबी बना रही हैं।
विंध्य क्षेत्र में 16259 समूहों से जुड़ी 1,70,983 महिलाएं
जनपद में 16259 समूहों का गठन किया गया है। इसके साथ ही 1150 ग्राम संगठन का गठन और 48 संकुल स्तरीय संघ का गठन किया गया है। इससे 1,70,983 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। जिले के 809 गांवों में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कार्य कर रही हैं। 1071 समूह सखी, 429 बीसी सखी, 102 बैंक सखी, 42 कृषि सखी, 44 पशु सखी, 40 कोटे की दुकान व 40 कैंटीन संचालित कर रही हैं।
स्वयं सहायता समूह के तहत कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता के साथ ही बाजार का समर्थन पाकर महिला आत्मनिर्भर बनीं हैं। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से इनकी संख्या बढ़ाने के लिए समूहों के आय स्रोत को बढ़ाने की रणनीति पर कार्य किया जा रहा है। -विशाल कुमार, मुख्य विकास अधिकारी।