अपनों को ही 'नकली' समझने लगता है इंसान, क्या आपने सुना है इस अजीब मानसिक बीमारी के बारे में?
कैपग्रास भ्रम एक दुर्लभ मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपने करीबियों को नकली समझने लगता है। फिजियोथेरेपी और काउंसलिंग इस बीमारी के मरीजों को सामान्य ...और पढ़ें

कैपग्रास सिंड्रोम
HighLights
फिजियोथेरेपी और काउंसलिंग है मरीज के लिए सहारा
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। कल्पना कीजिए, कोई व्यक्ति अपनी मां, पिता या जीवनसाथी को देखकर यह कहने लगे कि ये असली नहीं हैं, इनकी जगह कोई और आ गया है। सुनने में भले यह फिल्मी लगे, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य की दुनिया में इसे कैपग्रास भ्रम कहा जाता है। यह एक दुर्लभ मानसिक स्थिति है, जिसमें मरीज अपने बेहद करीबी लोगों को हमशक्ल या भ्रम समझने लगता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या अक्सर सिजोफ्रेनिया, डिमेंशिया, ब्रेन इंजरी या स्ट्रोक के बाद देखने को मिलती है। ऐसे मरीजों में डर, अविश्वास, बेचैनी और चिड़चिड़ापन तेजी से बढ़ सकता है। कई बार मरीज अपने ही परिवार से दूरी बनाने लगता है। फिजियोथेरेपिस्ट का कहना है कि इस बीमारी का मुख्य इलाज मनोचिकित्सक करते हैं, लेकिन फिजियोथेरेपी भी मरीज के जीवन को सामान्य बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।
यदि स्ट्रोक या ब्रेन इंजरी के कारण दिमाग का चेहरा पहचानने वाला हिस्सा प्रभावित हुआ हो, तो फिजियोथेरेपी शरीर के संतुलन, चाल और मूवमेंट को सुधारती है। इससे मरीज का आत्मविश्वास बढ़ता है और तनाव कम होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रतिदिन टहलने, हल्की एक्सरसाइज, योग और ब्रीदिंग एक्सरसाइज मरीज की एंग्जायटी कम करने में मदद करती हैं।
कुछ मामलों में आक्यूपेशनल थेरेपी और फिजियोथेरेपी मिलकर सेंसरी थेरेपी भी देती हैं, ताकि मरीज का अपने आसपास के माहौल से जुड़ाव बेहतर हो सके। उनका मानना है कि फिजियोथेरेपी भ्रम को सीधे खत्म नहीं करती, लेकिन मरीज को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाकर उसकी जिंदगी को आसान जरूर करती है।
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ये हैं प्रमुख लक्षण
- करीबी लोगों को नकली या हमशक्ल समझना
- परिवार के प्रति अचानक अविश्वास बढ़ना
- डर, तनाव और चिड़चिड़ापन
- सामाजिक दूरी बनाना
- नींद और व्यवहार में बदलाव
इन बातों का रखें ध्यान
- मरीज की बातों पर बहस न करें
- शांत और सुरक्षित माहौल दें
- मरीज को अकेला न छोड़ें
- दवा और काउंसलिंग नियमित जारी रखें
- योग, टहलने और हल्की गतिविधि के लिए प्रेरित करें
ऐसे मरीजों में फिजियोथेरेपी भ्रम को सीधे खत्म नहीं करती, लेकिन मरीज को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाकर उसकी जिंदगी को आसान जरूर करती है।
- डा. इशिका सक्सेना, (पीटी) चंडीगढ़ विश्वविद्यालय
अक्सर स्ट्रोक और ब्रेन इंजरी के बाद ऐसा देखने को मिलता है। ऐसे मरीज स्वजन को नहीं पहचान पाते हैं। इन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास फिजियोथेरेपी में होता है।
- डा. दीपक राज गर्ग, फिजियोथेरेपिस्ट, मानसरोवर मुरादाबाद
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