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    ITR भरने के बाद आया इनकम टैक्स नोटिस? घबराएं नहीं, समय पर करें ये काम और बचें ₹10,000 की पेनल्टी से

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 01:54 PM (GMT+05:30)

    आयकर रिटर्न दाखिल करने के बाद मिलने वाले नोटिस से घबराएं नहीं; समय पर सही जवाब देकर ₹10,000 तक की पेनल्टी और अन्य परेशानियों से बचा जा सकता है। आयकर व ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक चित्र

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    HighLights

    1. 31 जुलाई के बाद शुरू हुई नोटिस की प्रक्रिया, रिकार्ड में मामूली अंतर पर भी भेजता है आयकर विभाग नोटिस

    जागरण, संवाददाता, मुरादाबाद। 31 जुलाई तक आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने वाले जिले के हजारों करदाताओं के पास अब आयकर विभाग के नोटिस पहुंचने लगे हैं। हालांकि, नोटिस मिलते ही घबराने की जरूरत नहीं है। हर नोटिस टैक्स चोरी या बड़ी गड़बड़ी का संकेत नहीं होता।

    कई मामलों में विभाग केवल आय, टीडीएस, बैंक ब्याज, निवेश या अन्य वित्तीय रिकार्ड में मिले अंतर की पुष्टि के लिए नोटिस जारी करता है। सीए सौरभ का कहना है कि यदि नोटिस का समय पर और सही जवाब दे दिया जाए तो पेनल्टी, अतिरिक्त टैक्स डिमांड और रिफंड रुकने जैसी परेशानियों से आसानी से बचा जा सकता है।

    आयकर विभाग आईटीआर दाखिल होने के बाद करदाता की ओर से दी गई जानकारी का मिलान अपने रिकार्ड से करता है। इस प्रक्रिया में फार्म-26एएस, एनुअल इंफार्मेशन स्टेटमेंट , टैक्सपेयर इंफार्मेशन समरी तथा बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से प्राप्त जानकारी की जांच होती है। यदि किसी भी रिकार्ड में अंतर मिलता है तो विभाग नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांग सकता है।

    पहले जांचें नोटिस असली है या नहीं

    आयकर अधिवक्ता रवि राय का कहना है कि ईमेल, एसएमएस या डाक से नोटिस मिलने पर सबसे पहले उसकी सत्यता जांचनी चाहिए। इसके लिए आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लागिन कर पेंडिंग एक्शन सेक्शन में जाएं। यदि वही नोटिस पोर्टल पर भी उपलब्ध है तो वह वास्तविक है। यदि पोर्टल पर नोटिस नहीं दिखता तो किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और न ही अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करें।

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    घर बैठे ऐसे दें जवाब

    आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लागिन करने के बाद डैशबोर्ड में जाकर पेंडिंग एक्शन और फिर ई-प्रोसीडिंग्स विकल्प खोलें। संबंधित नोटिस का चयन करें और उसे ध्यान से पढ़ें। यदि आवश्यकता हो तो उसकी पीडीएफ डाउनलोड कर लें।

    इसके बाद सबमिट रिस्पान्स पर क्लिक कर मांगी गई जानकारी और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। यदि विभाग की जानकारी सही है तो एग्री और यदि आप असहमत हैं तो डिसएग्री विकल्प चुनकर संबंधित प्रमाण अपलोड करें। जवाब जमा होने के बाद मिलने वाली ट्रांजैक्शन आईडी भविष्य के लिए सुरक्षित रखें।

    नोटिस को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

    अधिवक्ता राय ने बताया कि नोटिस का जवाब समय पर नहीं देने पर आयकर विभाग उपलब्ध रिकार्ड के आधार पर कार्रवाई कर सकता है। ऐसे मामलों में धारा 144 के तहत एकतरफा असेसमेंट किया जा सकता है। इसके अलावा अतिरिक्त टैक्स डिमांड, ब्याज, रिफंड रोकने और कुछ मामलों में धारा 272ए के तहत 10 हजार रुपये तक की पेनल्टी भी लग सकती है।

    इन वजहों से सबसे अधिक आते हैं नोटिस

    सबसे ज्यादा नोटिस तब जारी होते हैं जब आईटीआर में दी गई जानकारी और विभाग के रिकार्ड में अंतर पाया जाता है। यदि किसी करदाता ने बैंक ब्याज, डिविडेंड, कैपिटल गेन, किराये की आय या अन्य आय का उल्लेख रिटर्न में नहीं किया, जबकि उसकी जानकारी विभाग के पास मौजूद है, तो नोटिस आ सकता है।

    दूसरा बड़ा कारण टीडीएस का मिलान नहीं होना है। कई बार नियोक्ता, बैंक या अन्य संस्था की ओर से काटे गए टीडीएस की जानकारी समय पर अपडेट नहीं होती या पैन नंबर दर्ज करने में गलती हो जाती है। ऐसी स्थिति में विभाग धारा 143(1) के तहत इंटिमेशन भेज सकता है और रिफंड भी रुक सकता है।

    बिना पर्याप्त दस्तावेजों के आयकर अधिनियम की धारा 80सी, 80डी या अन्य प्रावधानों के तहत अधिक कटौती का दावा करने पर भी विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है।

    इसके अलावा महंगी संपत्ति खरीदना, बड़ी रकम बैंक में जमा करना, भारी निवेश करना या बड़े क्रेडिट कार्ड भुगतान जैसी हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन यदि घोषित आय से मेल नहीं खाते, तब भी नोटिस जारी किया जा सकता है। यदि पिछले किसी वित्त वर्ष का टैक्स बकाया है और इस बार रिफंड बन रहा है तो आयकर अधिनियम की धारा-245 के तहत नोटिस भेजता है।

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