जेवर एयरपोर्ट का 'उड़ान' मंत्र: मुरादाबाद के पीतल से बिजनौर की नगीना कला तक, अब पूरी दुनिया देखेगी यूपी का दम!
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उद्घाटित जेवर एयरपोर्ट मुरादाबाद मंडल के लिए विकास का नया मार्ग खोलेगा। यह एयरपोर्ट मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, अमरोहा और संभल ...और पढ़ें

जेवर एयरपोर्ट
HighLights
दिल्ली के जाम से मिलेगी मुक्ति, विदेशी बायर्स की सीधी पहुंच से पर्यटन और रोजगार के खुलेंगे नए द्वार
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन कर दिया। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) केवल गौतमबुद्ध नगर ही नहीं, बल्कि मुरादाबाद मंडल के लिए तरक्की का रास्ता बनेगा। शुरुआती 1.2 करोड़ वार्षिक यात्री क्षमता और 2.5 लाख टन कार्गो क्षमता वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के शुरू होने से मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, अमरोहा और संभल जिलों को इसका लाभ होगा।
स्थानीय उत्पादों (ओडीओपी) को वैश्विक बाजार मिलने, दिल्ली के जाम से छुटकारा और विदेशी खरीदारों की आसान पहुंच से पूरे मंडल में व्यापार, कृषि, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन को अप्रत्याशित रफ्तार मिलेगी। यह एयरपोर्ट मंडल को 'लोकल से ग्लोबल' बनाने की दिशा में सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
मुरादाबाद मंडल के उत्पादों को जेवर एयरपोर्ट से सीधे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई उड़ान मिलेगी। जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र (डीआइसी) के संयुक्त आयुक्त योगेश कुमार का कहना है कि जेवर एयरपोर्ट बनने से मंडल की इंटरनेशनल कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी।
इससे दिल्ली के जाम से निजात मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय यात्राएं करने वाले लोगों का समय बचेगा। शहर के प्रमुख हैंडीक्राफ्ट निर्यातक संदीप (संजीव), जो अमेरिका और यूके में लकड़ी, धातु, पीतल, फैब्रिक और लेदर के उत्पादों का निर्यात करते हैं, बताते हैं कि अभी तक दिल्ली के जरिए माल भेजने में जाम की भारी समस्या थी।
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मगर अब एयरपोर्ट शुरू होने से जाम से बचाव होगा और सप्लाई चेन में तेजी आएगी। होम डेकोरेटिव और हैंडीक्राफ्ट के एक अन्य निर्यातक सुहैल का भी मानना है कि जेवर एयरपोर्ट से माल भेजने में एक से डेढ़ घंटे की बचत होगी और विदेशी खरीदारों के लिए भी सीधे मुरादाबाद आना बेहद आसान हो जाएगा।
बिजनौर: नगीना की काष्ठ कला और ब्रश उद्योग की वैश्विक दस्तक
बिजनौर के वुडन हैंडीक्राफ्ट और ब्रश उद्योग के लिए जेवर एयरपोर्ट गेमचेंजर साबित होने वाला है। बिजनौर के जीएम डीआईसी अमित कुमार के अनुसार, नगीना की काष्ठ कला को 2023 में जीआई टैग मिल चुका है और जिले में 20 हजार से ज्यादा कारीगर व 500 से अधिक इकाइयां इस काम में जुटी हैं।
अकेले वुडन हैंडीक्राफ्ट और ब्रश उद्योग का सालाना टर्नओवर 250 से 300 करोड़ रुपये का है। पूरे देश में इस्तेमाल होने वाले 50 प्रतिशत ब्रश शेरकोट में बनते हैं। 10-10 करोड़ की लागत से बन रहे तीन कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) और जेवर एयरपोर्ट की कार्गो सुविधा से बिजनौर के अप्रत्यक्ष निर्यात को सीधे अंतरराष्ट्रीय मंच मिलेगा।
रामपुर, अमरोहा और संभल : जरी वर्क, ढोलक और हस्तशिल्प की गूंज
रामपुर का प्रसिद्ध जरी पैचवर्क भी अब वैश्विक उड़ान भरने को तैयार है। रामपुर के जीएम डीआईसी अनुराग यादव बताते हैं कि जिले में 15 से 20 हजार कारीगर जरी वर्क से जुड़े हैं। सरकार टूलकिट और दो करोड़ तक के लोन पर सब्सिडी देकर छोटे कारीगरों को उद्यमी बना रही है। जेवर एयरपोर्ट की सुविधाओं से इन कारीगरों को विदेशों में सीधे अपने उत्पाद बेचने का मौका मिलेगा।
वहीं, अमरोहा के जीएम डीआईसी अनूप श्रीवास्तव का कहना है कि जिले की मशहूर ढोलक अभी मुख्य रूप से घरेलू बाजार तक ही सीमित है। अब एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी के जरिए स्थानीय ढोलक उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने और उन्हें निर्यातक बनाने की योजना पर काम हो रहा है। इसके साथ ही संभल के जीएम डीआईसी मुकेश कुमार का कहना है कि जिले का प्रसिद्ध हॉर्न और बोन (सींग और हड्डी) हस्तशिल्प पहले से ही विदेशों में अपनी पहचान रखता है।
पर्यटन और कारीगरों की जगी उम्मीदें
इस नए विकास पथ से जिले के छोटे कारीगर भी बेहद उत्साहित हैं। मुरादाबाद के पद्मश्री सम्मानित कारीगर चिरंजीलाल का कहना है कि यह योजना बहुत अच्छी है और विदेशी खरीदारों का आना-जाना आसान होने से भाड़े में कमी आएगी, जिससे कारीगरों के उत्पाद ज्यादा बिकेंगे। पर्यटन के मोर्चे पर भी मंडल में भारी उछाल आना तय है।
मुरादाबाद के पर्यटन अधिकारी प्रदीप टम्टा का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट शुरू होने से एक्सेसिबिलिटी आसान हो जाएगी, जिससे घरेलू और विदेशी पर्यटकों का आना बढ़ेगा। इससे मुरादाबाद और बिजनौर में टूरिज्म सर्किट और इको-टूरिज्म को काफी बढ़ावा मिलेगा।
किसानों और लाजिस्टिक्स को मिलेगा बूम
जेवर एयरपोर्ट केवल उद्योगों के लिए नहीं, बल्कि मंडल के किसानों के लिए भी वरदान साबित होगा। कृषि उत्पाद अब एयर कार्गो के माध्यम से सीधे विदेशी बाजारों में भेजे जा सकेंगे। इसके साथ ही, मंडल में नए वेयरहाउस और लाजिस्टिक्स हब विकसित होंगे। इससे न केवल जिले की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि हजारों युवाओं को उनके ही क्षेत्र में रोजगार के बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे।