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खेत बने 'मौत का कुआं': मुरादाबाद में तेंदुए के हमले में महिला की मौत, अमरोहा-संभल तक फैला खौफ

Updated: Tue, 25 Aug 2026 10:07 PM (IST)

मुरादाबाद के बलिया गांव में तेंदुए के हमले में एक महिला की मौत हो गई, जिससे रामगंगा खादर क्षेत्र में ...और पढ़ें

बलिया में तेंदुए के हमले से महिला की मौत के बाद तैनात पुलिस फोर्स और इनसेट में मृतक मह‍िला मिथिलेश सैनी की फाइल फोटो

बलिया में तेंदुए के हमले से महिला की मौत के बाद तैनात पुलिस फोर्स और इनसेट में मृतक मह‍िला मिथिलेश सैनी की फाइल फोटो

HighLights

  1. मिथलेश के घर में रोने की आवाजें, गांव के बाहर जंगल की ओर टिकी रहीं डरी निगाहें

 

जागरण टीम, बलिया (मुरादाबाद)। मंगलवार में अमंगल होने पर शाम ढलते ही रामगंगा नदी के खादर क्षेत्र में बसे बलिया गांव की तस्वीर बदल गई। दिन में जहां धान के खेतों के बीच किसान नजर आ रहे थे, वहीं महिला मिथलेश देवी की तेंदुए के हमले में मौत के बाद शाम होते-होते खेतों की ओर जाने वाले रास्ते सूने पड़ गए। गांव के लोगों ने जैसे खुद को घरों की चारदीवारी में समेट लिया। रामगंगा के खादर में रात का अंधेरा सामान्य दिनों की तरह नहीं उतरा। इस बार अंधेरे के साथ तेंदुए का डर भी था।

गांव के बाहर खेतों की ओर नजर डालने पर दूर तक सन्नाटा दिखाई दिया। कहीं ट्रैक्टर की आवाज नहीं, न किसानों की बातचीत। जिस खेत में सुबह तक धान की नराई चल रही थी, वहां अब कोई नहीं है। खेत की मेंढ़ तक जाने की हिम्मत ग्रामीणों में नहीं है। जंगल से सटे इस इलाके में शाम के बाद लोगों का बाहर निकलना लगभग बंद हो गया।

घटना के बाद कोई खेत की तरफ नहीं गया। सुबह जो हुआ, उसे अपनी आंखों से देखने वालों के हाथ-पांव अब भी कांप रहे हैं। अंधेरा होने के बाद खेत में जाना मतलब अपनी जान खतरे में डालना है। यह कहना था कि गांव के एक बुजुर्ग का। उनकी बात के साथ ही आसपास बैठे लोग चुप हो जाते हैं।

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कुछ पल के लिए सिर्फ झींगुरों की आवाज सुनाई देती है। कहते हैं कि मंगलवार सुबह करीब 11:30 बजे तक बलिया में सब कुछ सामान्य था। किसान ट्रैक्टर-ट्राली से धान की नराई के लिए खेतों में पहुंचे थे। मिथलेश देवी भी अपने पति के साथ नराई कर रही थीं। खेत पेड़ों और जंगल के करीब था।

अचानक तेंदुए ने मिथलेश पर हमला कर दिया। वह बचने के लिए संघर्ष करती रहीं। हमलावर शिकारी ने उन्हें खेत के भीतर घसीट लिया। पति बृजपाल सिंह ने यह दृश्य देखा तो हाथपैर फूल गए लेकिन फिर भी हिम्मत जुटाकर लाठी लेकर उसकी तरफ दौड़ पड़े। आसपास काम कर रहे ग्रामीण भी शोर मचाते हुए पहुंच गए।

लोगों के एक साथ दौड़ने पर तेंदुआ महिला को छोड़कर जंगल की तरफ भाग गया लेकिन, पत्नी की जान बचाने में सफल नहीं हो सके। बलिया में जो हुआ, वह अब भी गांव की आंखों के सामने है।

मिथलेश की मौत की खबर कुछ ही देर में आसपास के गांवों तक पहुंच गई। लोग घरों से निकलकर उनके घर की ओर पहुंचने लगे। देखते ही देखते भीड़ जुट गई। महिलाएं रो रही थीं। पुरुष एक-दूसरे से घटना के बारे में बात कर रहे थे। मिथलेश के घर के बाहर रात तक लोगों की आवाजाही रही।

परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था। पति बृजपाल सिंह जैसे गहरे सदमे में चले गए। कई बार आसपास के लोग उनसे बात करने की कोशिश करते, लेकिन वह कोई जवाब नहीं दे पाते थे। बृजपाल की हालत देखकर समझ में आ रहा था क्या किया जाए? सुबह तक पत्नी साथ थी और कुछ देर बाद सब खत्म हो गया।

मां के शव से लिपटकर रोता रहा बेटा

इकलौता बेटा रोहित सैनी एटा में कांस्टेबल के पद पर तैनात है। मां की मौत की खबर मिलते ही वह लौटे और सीधे पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। वहां मां का शव देखते ही रोहित टूट गए। काफी देर तक शव से लिपटकर रोते रहे। घर लौटने के बाद भी उनकी आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे।

परिवार की बेटियां कांता और स्वाति भी मां की मौत से बेहाल हैं। घर में रिश्तेदारों और ग्रामीणों की भीड़ है, लेकिन इस भीड़ के बीच भी परिवार का अकेलापन साफ दिखाई देता है। रात में घर के भीतर से रोने की आवाज आती है तो बाहर खड़े ग्रामीणों के चेहरे भी उतर जाते हैं। रात गहराने लगी तो बलिया में एक अलग तरह की हलचल शुरू हुई।

कई घरों के दरवाजे बंद हो गए, लेकिन भीतर लोग सो नहीं रहे थे। कुछ ग्रामीण घरों के बाहर बैठे रहे। हाथ में लाठी और टार्च थी। कहीं से कुत्ते के भौंकने की आवाज आती तो लोग तुरंत चौकन्ने हो जाते। अब कुत्ता भी भौंकता है तो लगता है तेंदुआ गांव में आ गया।

कुछ ग्रामीण खेतों और जंगल की दिशा में टार्च की रोशनी डालते हैं। कुछ देर देखते हैं, फिर वापस दरवाजे पर आकर बैठ जाते हैं। हरपाल सिंह कहते हैं कि रामगंगा खादर की रात वैसे भी शांत होती है। नदी की तरफ से आती हवा और पेड़ों की सरसराहट इस रात डर को और गहरा कर रही है।

पति की आंखें सूनी थीं। बेटियां रोते-रोते थक गई थीं। बेटे रोहित की आंखों में मां को खोने का दर्द दिखाई दे रहा था। बाहर बैठे ग्रामीण परिवार की हालत देख रहे थे और अपने घरों की चिंता भी कर रहे थे। एक ग्रामीण ने कहा कि आज मिथलेश के घर में मातम है। कल किसी और के घर में न हो, यही डर है।

ड्रोन उड़ते रहे, लेकिन डर जमीन पर है

मिथलेश की मौत के बाद ग्रामीणों ने बच्चों को भी घर से बाहर नहीं निकलने दिया। शाम होते ही परिवारों ने बच्चों को अंदर बुला लिया। महिलाओं ने भी जरूरी काम जल्द निपटा लिए। महिला नीरज देवी कहती हैं कि पहले बच्चे शाम तक बाहर खेलते थे। आज किसी मां ने उन्हें बाहर नहीं भेजा।

सभी को डर लग रहा है। गांव में आने-जाने वाले रास्तों पर भी सामान्य दिनों की तुलना में आवाजाही कम रही। कई ग्रामीणों ने रात में खेतों की ओर जाने से पूरी तरह परहेज किया। बलिया के लोगों का डर मंगलवार की घटना से पैदा नहीं हुआ है। 18 अगस्त को इसी गांव में विरमों देवी की तेंदुए के हमले में मौत हुई थी।

इससे पहले तीन अगस्त को लालापुर पीपलसाना में संतोष देवी की मौत हुई थी। तीन अगस्त से अब तक तीन महिलाओं की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई तेंदुए पकड़े जाने के बाद भी हमले पूरी तरह बंद नहीं हुए। इससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।

दस तेंदुए पकड़े जाने की बात कही जा रही है, फिर भी अगर खेत में महिला सुरक्षित नहीं है तो हम किस बात का भरोसा करें। किसान यशपाल सिंह कहते हैं कि मिथलेश की मौत के बाद वन विभाग की टीम सक्रिय हुई।

डीएफओ डाॅ. विनय कुमार ने थर्मल ड्रोन से इलाके की निगरानी कराई। जंगल और खेतों के आसपास तलाश की गई, लेकिन ग्रामीणों के लिए निगरानी और सुरक्षा के बीच बड़ा अंतर है। ड्रोन आसमान में उड़ सकता है, लेकिन किसान को तो जमीन पर ही चलना है। खेत में उतरने वाले किसान को कौन बचाएगा?

महिलाओं के खेत जाने पर सवाल

उपजिलाधिकारी वेद प्रकाश पांडे ने ग्रामीणों से अपील की कि कोशिश करें कि महिलाओं को खेतों पर साथ न ले जाएं। प्रशासन ने सतर्क रहने और वन विभाग की टीम का सहयोग करने को कहा , लेकिन गांव की महिलाओं का कहना है कि खेती के काम में उनकी भूमिका जरूरी है।

महिलाएं खेत में नहीं जाएंगी तो घर का काम कौन करेगा? खेती में हम बरसों से काम करते हैं। डर आज पहली बार इतना बड़ा लगा है। एक महिला का कहना था कि अब अकेले जाने की तो सोच भी नहीं सकते। परिवार के लोग सदमे में हैं।

रात में गांव से खेतों की तरफ जाने वाले रास्ते पर एक बार नजर डालें तो सुबह की तस्वीर याद आती है। वही रास्ता, जिस पर ट्रैक्टर गया था। वही रास्ता, जिससे मिथलेश खेत तक पहुंची थीं। मगर अब वहां कोई नहीं।

मिथलेश की मौत के बाद बलिया में सिर्फ एक परिवार नहीं टूटा है। गांव की रोजमर्रा की जिंदगी का भरोसा टूटा है। खेत, जो अब तक परिवारों के पेट भरने का साधन थे, उनमें अब मौत का डर दिखाई दे रहा है।

इसी बीच भाजपा नेता अजय प्रताप सिंह ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार के आंसू भी पौंछे। वन विभाग की टीम से तेंदुए पकड़ने के लिए कहा। डीएफओ ने भरोसा दिलाया कि हम पूरा प्रयास कर रहे हैं।

तेंदुआ और बंदरों के लिए तैयार की पिंजरा रणनीति

तेंदुओं और बंदरों के बढ़ते आतंक को देखते हुए प्रशासन ने पिंजरा रणनीति पर चर्चा की। एसडीएम स्निग्धा चतुर्वेदी ने वन विभाग, नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी, ग्राम प्रधान प्रशासक एवं तहसील कर्मियों से बैठक की। जिसमें निर्णय लिया गया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर तेंदुओं और बंदरों को पकड़ने के लिए पिंजरे खरीदकर उनकी व्यवस्था की जाएगी। ताकि समय रहते वन्यजीवों को पकड़ा जा सके।

एसडीएम स्निग्धा चतुर्वेदी ने कहा कि, क्षेत्र में तेंदुए लगातार आक्रामक हो रहे हैं और लोगों सहित बच्चों पर हमला कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में लोगों की सुरक्षा के लिए तेंदुओं से बचाव बेहद जरूरी है। उन्होंने सभी ग्राम प्रधान प्रशासकों से वन विभाग को पूरा सहयोग देने की अपील की।

उन्होंने कहा कि तेंदुओं और बंदरों को पकड़वाने के लिए सभी विभागों एवं ग्राम पंचायतों को आपसी समन्वय के साथ ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने ग्रामीणों से सावधानी बरतने की अपील की। वन विभाग के डिप्टी रेंजर पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि तेंदुआ दोपहर दो बजे के बाद अधिक आक्रामक हो जाता है।

विशेष रूप से शावकों के साथ रहने वाली मादा तेंदुआ बेहद खतरनाक हो सकती है। उन्होंने ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इस अवसर पर तहसीलदार राजकुमार सिंह, अधिशासी अधिकारी रामेश्वर दयाल, नजम, अरविंद कुमार, राजेंद्र सिंह, राजस्व निरीक्षक, ग्राम प्रधान प्रशासक, लेखपाल एवं ग्राम पंचायत सचिव मौजूद रहे।

अमरोहा जनपद में तेंदुए का आतंक: पीछे दौड़ा तो कहीं रात में घूमता दिखा

जिलेभर में तेंदुए की दहशत बनी हुई है। कहीं तेंदुआ खेतों में विचरण करता दिखाई दे रहा है तो कहीं राहगीरों का रास्ता रोक रहा है। मंगलवार को अमरोहा शहर के पास तेंदुए ने मार्निंग वाक पर निकले मुहल्ला कुरैशनी निवासी उबैद अली पर झपटने का प्रयास किया।

उन्होंने दौड़कर आबादी में पहुंचकर अपनी जान बचाई। वहीं, रजबपुर के गांव पीठखेड़ा में रात के समय तेंदुआ दिखाई दिया। ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर जंगल में पहुंचे और काफी देर तक तलाश की, लेकिन तेंदुआ हाथ नहीं लगा।

गजरौला क्षेत्र में भी धनौरा रोड से सलेमपुर बाइपास जाने वाले मार्ग पर तेंदुआ दिखाई देने से ग्रामीणों और राहगीरों में दहशत है। मुहल्ला कुरैशी निवासी कारोबारी उबैद अली रोजाना अकबरपुर पट्टी गांव की ओर जाने वाले रास्ते पर मार्निंग वाक के लिए जाते हैं।

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मंगलवार सुबह करीब पांच बजे वह भी इसी रास्ते पर टहलने निकले थे। दरगाह से कुछ आगे पहुंचने पर उन्होंने बाग से निकलकर सड़क पार करता हुआ तेंदुआ देखा। उबैद के मुताबिक उन्हें देखते ही तेंदुआ उनकी ओर झपटा।

उन्होंने तत्काल पीछे की ओर दौड़ लगा दी और आबादी की तरफ पहुंच गए। इसी दौरान अकबरपुर पट्टी की ओर से नरेश और जगराम बाइक से आ रहे थे। लोगों को देखकर तेंदुआ पीछे हट गया और बाग में चला गया।

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। आबादी के नजदीक तेंदुए की मौजूदगी से लोगों में दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग की है।

पीठखेड़ा में रात में सड़क किनारे दिखाई दिया तेंदुआ

गांव पीठखेड़ा में एक महीने से तेंदुए की दहशत बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है तेंदुआ आए दिन गांव और आसपास के जंगल में अलग-अलग स्थानों पर दिखाई दे रहा है।

मंगलवार रात गांव में चल रही जाहरवीर गोगा जी महाराज की कथा में शामिल होने जा रहे प्रथी सिंह को 12 बजे गुरमीत चौधरी के घेर के पास सड़क किनारे तेंदुआ दिखाई दिया।

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उन्होंने टार्च की रोशनी डाली तो तेंदुआ छलांग लगाकर जंगल में चला गया। प्रथी ने कथा पंडाल में पहुंचकर ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंच गए।

तलाशी के दौरान जंगल में तेंदुए के पंजों के निशान भी मिले। लेकिन तेंदुए का पता नहीं लग सका। तेंदुए की मौजूदगी के बाद ग्रामीण रात में घरों से बाहर निकलने और खेतों की ओर जाने से भी बच रहे हैं। उन्होंने वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने की मांग की है।

धनौरा रोड पर भी दिखा तेंदुआ

धनौरा रोड से सलेमपुर बाइपास की ओर जाने वाले मार्ग पर सोमवार शाम खेतों के किनारे तेंदुआ दिखाई देने से ग्रामीणों और राहगीरों में खलबली मच गई। ग्रामीणों के मुताबिक,इस मार्ग पर दिनभर डिग्री कालेज के छात्र-छात्राओं के साथ ही किसान, ग्रामीण और राहगीरों का आवागमन रहता है।

रास्ते में रेलवे का अंडरपास भी पड़ता है। तेंदुआ दिखाई देने की सूचना से आसपास के किसानों और राहगीरों में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने, तेंदुए की तलाश और कार्रवाई करने की मांग की है। ताकि अप्रिय घटना को रोका जा सके।

आबादी की ओर बढ़ रहा तेंदुओं का कुनबा, दहशत में ग्रामीण

नवीन वर्मा, मंडी धनौरा (अमरोहा)। जिले में तेंदुओं की बढ़ती मौजूदगी अब ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है। मंडी धनौरा क्षेत्र में लगातार तेंदुए देखे जाने और पालतू पशुओं पर हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं। शिकार की तलाश में तेंदुए जंगल और खेतों से निकलकर आबादी का रुख कर रहे हैं। घरों के बाहर बंधे कुत्ते, बछड़े, बकरी और अन्य पालतू पशु उनके आसान शिकार बन रहे हैं। 

सैरकपुर, रसूलपुर भांवर, मुकरामपुर, चौखट, पेली तगा, कपसुआ, जसौरा, देहरा चक, कुआखेड़ा, वासीपुर, जूझैला चक, ताजपुर और मोहद्दीनपुर समेत कई गांवों में तेंदुए देखे जा चुके हैं। कुछ दिन पहले ही शेरपुर गांव में तेंदुए ने घोड़ी घायल कर दिया था।

जसौरा के आम के बाग में बंधे लंगूर को तेंदुआ शिकार बना चुका है। चौखट में घर के बाहर बंधे विदेशी नस्ल के कुत्ते को भी तेंदुए ने निवाला बना लिया था। कई गांवों में पशुशालाओं में घुसकर बछड़े और बकरियों के शिकार की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

वन विभाग के अनुसार जिले के तीनों वन सर्किल में 50 से अधिक तेंदुए विचरण कर रहे हैं। फतेउल्लापुर, पेली तगा और बल्दाना हीरा सिंह में पिंजरे लगाए हैं। मुकरामपुर में सुरक्षा के लिए लगाई गई तारबंदी में एक तेंदुआ फंस गया था।

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वन विभाग ने उसे सुरक्षित पकड़कर अमानगढ़ वन रेंज, बिजनौर में छोड़ दिया था। वहीं, रामगंगा पोषक नहर के पास हाईटेंशन विद्युत लाइन की चपेट में आने से एक तेंदुए की मौत भी हो चुकी है। सहजादपुर और नाव वाला गांव में तेंदुए किसानों पर हमला भी कर चुके हैं।

तेंदुओं की लगातार मौजूदगी का असर ग्रामीणों की दिनचर्या पर भी पड़ा है। खेतों में फसल की देखभाल के लिए जाने वाले किसान अकेले खेतों का रुख करने से बच रहे हैं।

ग्रामीण समूह बनाकर खेतों पर जा रहे हैं और शाम होते ही घर लौटने का प्रयास करते हैं। अभिभावक बच्चों को भी अकेले घर से बाहर भेजने से कतरा रहे हैं। शाम ढलने के बाद गांवों के आसपास सन्नाटा बढ़ जाता है।

बाघों की बढ़ती संख्या से अमरोहा के जंगलों में बढ़ रहा तेंदुओं का कुनबा

वन विभाग के अनुसार बाघों से बचने के लिए तेंदुए बिजनौर से सटे अमरोहा के जंगलों की ओर बढ़ रहे हैं। यहां के जंगल तेंदुओं को अपेक्षाकृत सुरक्षित नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि मादा तेंदुए यहां शावकों को जन्म दे रही हैं, जिससे इनकी संख्या बढ़ रही है।

बिजनौर वन क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ ही तेंदुओं के लिए सुरक्षित ठिकाने की चुनौती भी बढ़ी है। जंगलों में सुरक्षित वातावरण मिलने से यहां इनका कुनबा बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

वन विभाग के घट रहे संसाधन, तेंदुआ की बढ़ रही संख्या

जिले में एक दर्जन पिंजरे उपलब्ध हैं। तेंदुओं की पकड़ने के दौरान कर्मचारियों के लिए लाइफ जैकेट, हेलमेट और डंडे आदि संसाधन मौजूद हैं, लेकिन इनकी संख्या भी सीमित है।

अमरोहा, मंडी धनौरा और हसनपुर तहसील के वन विभाग के स्टाफ पर नजर डालें तो 60 वनकर्मी ही तैनात हैं। बढ़ते तेंदुआ मूवमेंट के बीच सीमित संसाधनों और कम स्टाफ ने विभाग की चुनौती बढ़ा दी है। फिलहाल वन विभाग ग्रामीणों को जागरूक करने की अपील के साथ स्थिति संभालने में जुटा है।

संभल में खेत में तेंदुआ दिखने से मची हलचल, वन विभाग ने जांचे पदचिह्न

जुनावई के गांव भोनांगला और दिल्लीपुर में मंगलवार शाम खेतों में तेंदुआ दिखाई देने की सूचना से ग्रामीणों में हलचल मच गई। तेंदुआ दिखाई देने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण खेतों की ओर पहुंच गए। ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।

वन क्षेत्राधिकारी ब्रजमोहन भी टीम के साथ गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से तेंदुआ दिखाई देने के संबंध में जानकारी ली और खेतों में पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। टीम ने खेतों में तेंदुए के पैरों के निशान तलाशे और मिले पदचिह्नों की बारीकी से जांच की। वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और खेतों में अकेले न जाने की अपील की।

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वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि ग्रामीणों ने खेतों में तेंदुआ दिखाई देने की सूचना दी थी। सूचना मिलते ही टीम को मौके पर भेजा गया। मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। मौके से मिले निशानों समेत अन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। साथ ही ग्रामीणों से तेंदुए की गतिविधियों के संबंध में जानकारी ली जा रही है।

तेंदुए की दहशत में खेतों से दूरी...50 बीघा गन्ना आवारा पशुओं ने किया चौपट

इशमपुर सैलाब पुख्ता गांव में तेंदुए की दहशत अब किसानों की फसल पर भारी पड़ने लगी है। रात में खेतों पर जाने से ग्रामीण कतरा रहे हैं। नतीजा यह है कि आवारा पशु बेखौफ होकर खेतों में घुसकर गन्ने की फसल बर्बाद कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार अब तक 50 बीघे से अधिक फसल आवारा पशु चौपट कर चुके हैं।

मंगलवार को दैनिक जागरण की टीम गांव में पहुंची तो हर जगह तेंदुए की चर्चा सुनने को मिली। क्योंकि नौ दिन 17 अगस्त को गांव में रघुवर दास बाबा मंदिर की दीवार पर तेंदुआ दिखा थी। वहां के महंत बाबा तिलक दास ने बताया कि वह शाम को मंदिर में पूजा कर रहे थे।

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इसी दौरान अचानक मंदिर परिसर में तेंदुआ दिखाई दिया। इसके बाद अन्य गांव के लोगों ने भी तेंदुआ देखा। उसी की दहशत गांव में अभी भी बनी हुई है। ग्रामीण बलराम सिंह ने बताया कि पिछले चार दिन में आवारा गायों ने 10 बीघा गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाया है।

तेंदुए के डर से वह रात में अकेले खेत पर जाकर रखवाली नहीं कर सकते। ग्रामीण अमर सिंह, ऋषिपाल, मुकेश, धर्मपाल और सोनपाल ने बताया कि तेंदुआ कब और कहां से निकल आए, इसका डर बना रहता है।

सभी किसान एक साथ मिलकर खेतों की रखवाली भी नहीं कर सकते। ग्रामीण ओमवती ने बताया कि मंदिर के अगले दिन यानी 18 अगस्त को रात आठ बजे वह अपनी पोती भावना के साथ घर पर बैठी थीं। इसी दौरान तेंदुआ उनकी भैंसों की लडोरी के पास आकर खड़ा हो गया।

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तेंदुए को देखते ही भावना चीख पड़ी। ओमवती ने तत्काल पोती को गोद में उठा लिया। शोर सुनकर पड़ोसी लाठी-डंडे लेकर पहुंचे तो तेंदुआ भाग गया था। इसके बाद से दोनों डरी हुई हैं।

वन क्षेत्राधिकारी बृजमोहन ने बताया कि एक पिंजरा लगाया गया है और टीम लगातार निगरानी कर रही है। तेंदुए को पकड़ने के लिए अन्य तकनीकों का भी इस्तेमाल होगा। उन्होंने बताया कि अभी तेंदुए की मौजूदगी की सटीक और विश्वसनीय जानकारी नहीं मिल सकी है।

एक पिंजरा, बड़ा इलाका... कैसे पकड़ेगा तेंदुआ?

ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए को पकड़ने के लिए गांव में केवल एक पिंजरा लगाया गया है। इतने बड़े क्षेत्र में एक पिंजरे से तेंदुए को पकड़ना मुश्किल है।

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उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर पिंजरों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। साथ ही ड्रोन कैमरे से निगरानी कराने की मांग भी की है। उधर, वहां पर लगा पिंजरा का गेट खोल दिया गया है। लेकिन, शिकार के लिए बकरी नहीं लगी है।

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