मुरादाबाद-अलीगढ़ हाईवे: इन 21 गांवों की जमीन पर रोक, सिर्फ 4-व्हीलर चलेंगे; जानें पूरा रूट
मुरादाबाद-अलीगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण तेज हो गया है, जिसमें मुरादाबाद के 21 गांवों की जमीन खरीदी जाएगी। यह हाईवे केव ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र
HighLights
दोपहिया-तिपहिया वाहनों पर रहेगी रोक, हाईवे किनारे अनियोजित निर्माण नहीं होगा
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। मुरादाबाद और अलीगढ़ के बीच प्रस्तावित 148.5 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड (नियंत्रित प्रवेश) हाईवे का सपना अब जमीन पर उतरता दिखाई देने लगा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी है। मुरादाबाद के 21 गांवों की जमीन इस परियोजना के लिए खरीदी जाएगी। प्रशासन और एनएचएआइ के अधिकारियों ने मंगलवार को विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के साथ भूमि अधिग्रहण की प्रगति और आगे की कार्रवाई को लेकर मंथन किया।
अधिकारियों का लक्ष्य अगले छह माह में प्रभावित भूमि का अवार्ड घोषित कर मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू करना है। प्रस्तावित हाईवे दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर पाकबड़ा से पहले सीएनजी पंप के पास से रिंग रोड को जोड़ते हुए निकलेगा। इसके बाद यह कुंदरकी क्षेत्र के गांवों और सिरसी क्षेत्र से होकर बुलंदशहर पहुंचेगा और आगे अलीगढ़ रिंग रोड से जुड़ेगा।
गंगा एक्सप्रेसवे की तर्ज पर बनने वाला यह एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे आधुनिक मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इस पर केवल चारपहिया और भारी वाहन चल सकेंगे। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी। हाईवे पर सीधे गांवों, दुकानों या मकानों से प्रवेश नहीं होगा। निर्धारित इंटरचेंज के माध्यम से ही वाहन हाईवे पर चढ़ और उतर सकेंगे।
इससे यात्रा अधिक सुरक्षित, तेज और निर्बाध होगी और दुर्घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है। मुरादाबाद और अलीगढ़ के बीच यात्रा का समय काफी कम होगा और शहरों के अंदर जाम से भी राहत मिलेगी। परियोजना के तहत मुरादाबाद सदर तहसील के चार व बिलारी तहसील के 17 गांवों की भूमि अधिग्रहित होगी। भूमि अधिग्रहण से किसानों को नियमानुसार मुआवजा मिलेगा।
खबरें और भी
लंबे समय में आसपास की भूमि के मूल्य में भी वृद्धि होने की उम्मीद जताई जा रही है। एनएचएआइ अब डिटेल सर्वे कराएगा, जिसमें प्रभावित भूमि की अंतिम सीमा तय की जाएगी। इसके बाद भूमि का मूल्यांकन, अवार्ड घोषित करने और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू होगी, यदि तय समयसीमा के अनुसार कार्य आगे बढ़ा तो आने वाले वर्षों में मुरादाबाद को प्रदेश के सबसे आधुनिक हाईवे नेटवर्क में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
व्यापारिक गतिविधियों को मिलेगी नई गति
हाईवे निर्माण से सबसे बड़ा लाभ मुरादाबाद को तेज और आधुनिक सड़क संपर्क के रूप में मिलेगा। दिल्ली, अलीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों तक माल ढुलाई आसान होगी। पीतल उद्योग, हस्तशिल्प और अन्य व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना है।
औद्योगिक इकाइयों के लिए परिवहन लागत कम होगी और निवेश आकर्षित करने में भी मदद मिलेगी। जिन गांवों से होकर हाईवे गुजरेगा, वहां भविष्य में वेयरहाउस, लाजिस्टिक पार्क, पेट्रोल पंप, होटल, ढाबे और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के विकसित होने की संभावना बढ़ेगी।
यह हैं सभी 21 गांव, जमीन खरीद-फरोख्त पर रोक
मुरादाबाद की सदर तहसील में गजगोला नानकबाड़ी, उमरी, गिन्नौर देह माफी और कस्बा मुरादाबाद शामिल हैं। बिलारी तहसील के रतनपुर कलां, मालीपुर, करीमपुर जब्ती, रसूलपुर हमीर, जाफरपुर, लालपुर गंगबारी, फत्तेहपुर खास, मलकपुर, अजमतपुर, ललवारा, कुतुबपुर रायब, खुर्रमनगर बिचौला, मदारपुरा, नौसना शेखूपुर, अल्लापुर भीकन, बघी गोबरधनपुर, कलालखेड़ा उर्फ शहजादखेड़ा, नगलिया मशमूला महमूदपुर माफी, महमूदपुर माफी, असालतनगर बघा और बहादुरपुर राजपूत गांव प्रभावित होंगे। इन गांवों की जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी है।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा में पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है। हाईवे बनने से मुरादाबाद को तेज, सुरक्षित और आधुनिक सड़क संपर्क मिलेगा। इससे यात्रा का समय कम होगा, सड़क सुरक्षा बेहतर होगी और औद्योगिक, व्यापारिक तथा आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
- अरविंद कुमार, परियोजना प्रबंधक, एनएचएआइ, मुरादाबाद
यह भी पढ़ें- मुरादाबाद-बरेली हाईवे होने जा रहा है पूरी तरह हाईटेक, ₹50 करोड़ से लगेंगे 150 'तीसरी आंख' वाले स्वदेशी कैमरे