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    500 साल पुराने इस काली मंदिर के आगे अंग्रेजों को भी टेकने पड़े थे घुटने, मिट्टी बन गई थी 'मिश्री'!

    Updated: Sat, 11 Apr 2026 03:53 PM (IST)

    मुरादाबाद के लालबाग स्थित 500 वर्ष पुराने सिद्धपीठ काली मंदिर का इतिहास ब्रिटिश शासन से जुड़ा है, जहां महंत मिश्री गिरि के चमत्कार के आगे अंग्रेजों को ...और पढ़ें

    काली माता मंदिर के बाहर पुलिस बल तैनात।जागरण

    काली माता मंदिर के बाहर पुलिस बल तैनात।जागरण

    जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। शहर के लालबाग स्थित सिद्धपीठ काली मंदिर का इतिहास करीब 500 वर्ष पुराना बताया जाता है। इस मंदिर के प्रथम महंत मिश्री गिरि महाराज थे, जिन्होंने टीले पर स्थित काली मठ की सेवा आरंभ की। मान्यता के अनुसार मंदिर की संपत्ति पर ब्रिटिश शासन की नजर पड़ी थी, तब मिश्री गिरि महाराज ने चमत्कार दिखाते हुए मिट्टी उछाली और जहां तक मिट्टी गिरी, वहां तक मंदिर की भूमि मानी गई।

    कहा जाता है कि वह मिट्टी मिश्री में बदल गई, इस चमत्कार के आगे ब्रिटिश अधिकारियों ने भी घुटने टेक दिए थे और दावा वापस ले लिया था। इस चमत्कार ने मंदिर की महिमा को और बढ़ाया।

    इस पीठ पर ब्रह्मलीन महंत मिश्री गिरि, ओंकारेश्वर गिरि, कृष्णानंद गिरि, देवदत्त गिरि और यश गिरि जैसे सिद्ध संतों ने अपनी तपस्या से इसे सिद्धस्थल बनाया। इन संतों ने सनातन धर्म और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    400 वर्ष पुराना सिद्धपीठ नौ देवी मंदिर में स्वयं भू प्रकट हुईं थी मूर्ति

    सिद्धपीठ नौ देवी मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना प्राचीन धार्मिक स्थल है, जिसकी विशेषता इसकी स्वयंभू मूर्ति है। मान्यता है कि यहां देवी माता की मूर्ति जमीन के भीतर से स्वयं प्रकट हुई थी, जिसमें नौ देवियों का संयुक्त स्वरूप दिखाई देता है। इसी कारण इसे नौ देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है।

    यह मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस स्थल पर ब्रह्मलीन महंत ओंकारेश्वर गिरि महाराज, सोमवार गिरि महाराज, कृष्णानंद गिरि महाराज, दत्त गिरि महाराज और वेदांत गिरि महाराज जैसे संतों ने तपस्या की। उनकी साधना और सेवा ने इस स्थान को सिद्धपीठ का दर्जा दिलाया। यहां आने वाले श्रद्धालु माता के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं।

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    1860 से पंजीकृत हुआ था श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा

    श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा ने स्पष्ट किया है कि काली मंदिर और नौ देवी मंदिर उसकी संपत्ति हैं, जो खसरा-खतौनी में दर्ज हैं। अखाड़ा वर्ष 1860 से पंजीकृत संस्था है और देश-विदेश में करीब 50 हजार मंदिरों का संचालन करता है, जिनमें भारत के 127 प्रमुख मंदिर शामिल हैं। अखाड़े में पद योग्यता के आधार पर दिए जाते हैं।

    नौ वर्ष की आयु में बच्चों को दत्तक लेकर उन्हें गुरुकुल या आधुनिक शिक्षा के माध्यम से धर्म की शिक्षा दी जाती है। शिक्षा पूर्ण होने के बाद योग्यता के अनुसार जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं। काली मंदिर और नौ देवी मंदिर में हाल ही में नियुक्त कार्यवाहक महंत और पुजारी कानपुर स्थित आनंदेश्वर महादेव मठ से जुड़े हुए हैं।


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