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    प्रशासक बनते ही बदले ग्राम प्रधान: मुरादाबाद के 1345 स्कूलों में मिड-डे मील पर संकट, शिक्षक जेब से खिला रहे खाना

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 10:44 PM (IST)

    मुरादाबाद के 1345 ग्रामीण विद्यालयों में मिड-डे मील व्यवस्था पर संकट गहरा गया है, क्योंकि प्रशासक बने ग्राम प्रधान सहयोग नहीं कर रहे हैं। शिक्षकों को ...और पढ़ें

    प्राथमिक विद्यालय में मध्याह्न भोजन करते विद्यार्थी। जागरण आर्काइव

    प्राथमिक विद्यालय में मध्याह्न भोजन करते विद्यार्थी। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. मिड-डे मील की व्यवस्थाएं करने में कर रहे आनाकानी, शिक्षक जेब से कर रहे इंतजाम

    जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। जिले के 1409 परिषदीय विद्यालयों में मिड डे मील व्यवस्था पर पंचायतों में प्रशासनिक बदलाव का असर दिखने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित 1345 विद्यालयों में इन दिनों भोजन के लिए राशन और अन्य व्यवस्थाएं जुटाने में प्रधान आनाकानी करने लगे हैं।

    विभाग के केवल 64 विद्यालय नगर क्षेत्र में हैं, जहां विभाग की ओर से वर्तमान में संस्थाओं की ओर से पका-पकाया भोजन बांटा जा रहा है। इसके अलावा 1345 विद्यालय ग्राम पंचायतों में संचालित हैं। इन विद्यालयों में प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के बाद विद्यालयों को पहले जैसा सहयोग नहीं मिल रहा है।

    शिक्षकों का कहना है कि मिड डे मील से जुड़ी व्यवस्थाओं में प्रधानों की सक्रियता कम होने से भोजन बनवाने में दिक्कत आ रही है। कई विद्यालयों में शिक्षकों को अपने स्तर पर व्यवस्था करनी पड़ रही है। शिक्षकों का कहना है कि यदि जल्द स्थिति नहीं सुधरी तो सबसे अधिक असर बच्चों के मध्याह्न भोजन पर पड़ेगा।

    प्रदेशभर में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें छह महीने के लिए प्रशासक बनाया गया है। कई जिलों में बेसिक शिक्षा विभाग ने मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) योजना के संचालन और बैंक खातों की संयुक्त हस्ताक्षरित शक्ति प्रधानों से वापस लेकर विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) के अध्यक्ष और प्रधानाध्यापक को सौंप दी है।

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    इसे लेकर जिले में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शिक्षकों का कहना है कि जिले में ऐसा कोई आदेश नही है, जिसमें प्रधान की राशन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी आदि मेें सहयोग न किये जाने की बात कही गई हाे। इसके बावजूद प्रधान सहयोग में आनाकानी कर रहे हैं या भोजन की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

    विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विद्यालय में बनने वाले मिड-डे-मील के लिए आने वाले राशन के अतिरिक्त दाल, मसाले और गेहूं को आटा बनाने के लिए पिसाई का पैसा प्रधान और अध्यापक के संयुक्त खाते में आता है। इसके लिए प्राथमिक विद्यालयों में पर बच्चा 6.15 रुपये मिलता है।

    अध्यापकों का कहना है कि इसका पैसा खाना खाने वाले बच्चों के हिसाब से आता है। इसके लिए महीने के अंत में विभाग को डाटा भेजा जाता है। छजलैट के शिक्षक रवि प्रकाश ने बताया कि विद्यालय में पिछले माह से कन्वर्जन आदि का पैसा लेने के लिए प्रधान समय नहीं दे रहे हैं।

    इससे जेब से पैसा देने की स्थिति आ रही है, आने वाले दिनों में भोजन व्यवस्था को चिंता बनी हुई है। कुंदरकी के एक प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक ब्रहम कुमार ने बताया कि प्रशासक होने के बाद प्रधान विद्यालय को समय नहीं दे रहे हैं। संयुक्त खाते से हस्ताक्षर के बिना पैसा निकलना मुश्किल है।

     

    विद्यालयों में राशन आदि की सुविधा पंचायतों में कोटेदार के माध्यम से होती है। कोटेदार महीने का राशन बांटते हैं और विद्यालय के शिक्षकों की जिम्मेदारी राशन रिसीव करने की है। प्रधान सहयोग नहीं कर रहे या कोई परेशानी है ऐसी कहीं से कोई शिकायत हमारे पास नहीं पहुंची है।

    - अमित सिंह, बीएसए।


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