सिस्टम फेल, बंदर शेर! मुरादाबाद में आतंक का नया नाम, घर की छतों पर जाने से भी कतरा रहे लोग
मुरादाबाद में बंदरों का आतंक अब जानलेवा हो गया है, जहां एक बुजुर्ग छत से गिरकर बंदरों के हमले से बचने के दौरान मर गए। जिलेभर में बंदरों के बढ़ते हमलों ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र
HighLights
शहर से गांव तक बढ़ता ही जा रहा है वानरों का आतंक
छत से गिरकर बुजुर्ग की मौत ने खोली सिस्टम की पोल
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। जिले में बंदरों का आतंक अब केवल लोगों को घायल नहीं कर रहा, बल्कि जान भी लेने लगा है। छजलैट थाना क्षेत्र के आन्यारी गांव में बंदरों के हमले से बचने के दौरान छत से गिरकर बुजुर्ग कल्लू सिंह की मौत ने जिलेभर में दहशत फैला दी है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब शहर और देहात दोनों जगह बंदरों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं और जिम्मेदार विभाग केवल एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
शनिवार दोपहर कल्लू सिंह घर की छत पर सूख रहे कपड़े उठाने गए थे। तभी अचानक बंदरों के झुंड ने उन पर हमला बोल दिया। जान बचाने के प्रयास में उनका संतुलन बिगड़ गया और वह छत से नीचे गिर पड़े। गंभीर चोट लगने से मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में दहशत फैल गई।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से बंदरों के झुंड आतंक मचा रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने कभी स्थायी समाधान नहीं निकाला। दरअसल, मुरादाबाद में बंदरों का खतरा अब लगातार विकराल होता जा रहा है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 15 से अधिक मरीज बंदरों के काटने और हमले के बाद उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा हमले हो रहे हैं। कई लोग गिरकर गंभीर चोट तक खा चुके हैं। शहर के मिलन विहार इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल है। कालोनी के मुख्य मार्ग पर बंदरों के झुंड राहगीरों और बाइक सवारों पर झपट्टा मारते हैं।
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आकांक्षा विद्या पीठ स्कूल के आसपास बच्चों को बंदर दौड़ाते दिखाई देते हैं। स्थानीय निवासी वैशाली पाहवा बताती हैं कि बंदरों ने हमला कर उन्हें गिरा दिया, जिससे हाथ की हड्डी टूट गई। संजय अग्रवाल को बंदर के काटने के बाद सात एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पड़े। बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि कई बार जान बचाने के लिए दूसरे घरों में घुसना पड़ता है। शहर में यह संकट नया नहीं है।
कुछ वर्ष पहले सिविल लाइंस क्षेत्र में बंदरों से बचने के प्रयास में छत से गिरकर एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थी। कांठ रोड पर बंदरों के अचानक सामने आने से बाइक सवार दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। कटघर और गलशहीद क्षेत्र में कई बच्चों को बंदरों ने काटा, जिसके बाद मुहल्लों में दहशत फैल गई थी।
मंदिरों में बंदरों से झुंड मचा रहे आतंक
जनवरी 2026 में कांठ क्षेत्र में बंदरों और आवारा कुत्तों के हमले में एक ही दिन में कई लोग घायल कर दिए थे। उस दौरान अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की लंबी लाइनें लग गई थीं। वहीं बस अड्डे और बाजार क्षेत्रों में दुकानदारों का सामान छीनने और महिलाओं के हाथ से खाने-पीने की चीजें झपटने की घटनाएं भी लगातार सामने आती रही हैं।
कई मंदिरों के आसपास बंदरों के झुंड श्रद्धालुओं को घेर लेते हैं। शहर में खुले में पड़े कूड़े के ढेर, धार्मिक स्थलों पर लोगों द्वारा भोजन डालने की आदत और सिकुड़ते प्राकृतिक क्षेत्र बंदरों के आक्रामक व्यवहार की बड़ी वजह बन रहे हैं।
शासन स्तर से नगर निकायों को साफ निर्देश दिए गए थे कि खुले में कूड़ा जमा न होने दिया जाए, ताकि बंदरों को भोजन आसानी से न मिले। इसके बावजूद पुराने शहर, लाइनपार, मंडी समिति क्षेत्र और कई कालोनियों में आज भी कूड़े के ढेर लगे दिखाई देते हैं।