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    मुरादाबाद में करोड़ों का हिसाब अटका: 138 पंचायतों की फाइलें क्यों नहीं खुल रहीं? सामने आया बड़ा सच!

    Updated: Sun, 05 Apr 2026 04:11 AM (GMT+05:30)

    मुरादाबाद में ग्राम पंचायतों के करोड़ों रुपये के ऑडिट में भारी देरी हो रही है। आठ में से केवल एक ब्लॉक का ऑडिट पूरा हुआ है, जबकि 138 ग्राम पंचायतों की ...और पढ़ें

    प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

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    HighLights

    1. आठ ब्लॉकों में से सिर्फ एक का हुआ आडिट

    जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। पंचायतों में करोड़ों रुपये के खर्च का ऑडिट अधूरा रहना अब सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है। वर्ष 2025-26 की ऑडिट प्रक्रिया तय समयसीमा से काफी पीछे चल रही है, जिससे वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों प्रभावित हो रही हैं। जिले के आठ विकास खंडों में से केवल कुंदरकी ब्लॉक का ही आडिट पूरा हो पाया है, जबकि सात ब्लाकों में प्रक्रिया अब भी अधूरी है।

    जिले की कुल 643 ग्राम पंचायतों में से अब तक 505 का आडिट पूरा किया गया है, यानी 138 ग्राम पंचायतों का आडिट अभी भी लंबित है। ग्राम निधि, मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन और हाट-बाजार जैसी योजनाओं में खर्च हुई धनराशि की जांच अधर में लटकी है।

    नियमों के मुताबिक यह प्रक्रिया एक महीने में पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन महीनों बीतने के बाद भी रिपोर्ट अधूरी है। इस बीच मूंढापांडे विकास खंड में सामने आए रिश्वत कांड ने पूरी व्यवस्था की साख पर और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

    उप्र सहकारी लेखा परीक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध द्विवेदी, जो सीनियर लेखा परीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात थे। उन्हें सतर्कता अधिष्ठान बरेली की टीम ने 50 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि उन्होंने एक ग्राम विकास अधिकारी से तीन लाख रुपये की मांग की थी।

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    रकम न देने पर आडिट में कमियां निकालकर फंसाने की धमकी दी थी। गौरतलब है कि आरोपित को महज 15 दिन पहले ही पदोन्नति मिली थी। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद भी ऑडिट प्रक्रिया में कोई तेजी या सुधार नहीं दिख रहा।

    स्थानीय स्तर पर आरोप है कि जिला और मंडल स्तर के अधिकारी ऑडिट की निगरानी में गंभीर नहीं हैं। शिकायत करने पर फोन तक नहीं उठाए जा रहे हैं। नए वित्तीय वर्ष के लिए ब्लॉक आवंटन को लेकर भी पैरवी का दौर शुरू हो चुका है, जिससे प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल और गहरे हो गए हैं।

    आडिट में देरी का सीधा असर वित्तीय अनुशासन पर पड़ रहा है। समय पर जांच न होने से अनियमितताओं को दबाने का मौका मिलता है और जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में सवाल यह है कि करोड़ों के खर्च का हिसाब आखिर कब पूरा होगा और जवाबदेही किसकी तय होगी?

     

    जिले में ग्राम पंचायतों का आडिट चरणबद्ध तरीके से कराया जा रहा है। अब तक 505 पंचायतों का आडिट पूरा हो चुका है और शेष को जल्द पूरा कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। संबंधित विभाग के अधिकारियों से लगातार बात हो रही है।

    - आलोक शर्मा, जिला पंचायत राज अधिकारी, मुरादाबाद


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