पंचायत चुनाव: सपा के लिए 'कांटों भरा ताज' बना मुरादाबाद, बाहरी या वफादार? किसका पलड़ा भारी?
मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी पंचायत चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन को लेकर आंतरिक कलह का सामना कर रही है। पार्टी को पुराने 'बागियों' और बाहरी चेहरों ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र
HighLights
समर्थन से पहले ही तकरार, सपा में अंदरूनी खींचतान
बाहरी नेताओं को तरजीह देने पर बढ़ सकता है असंतोष
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। पंचायत चुनाव की तारीख भले अभी घोषित न हुई हो, लेकिन जिले में सियासी सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। खासतौर पर समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर पुराने, बागी और विवादित चेहरों की बढ़ती सक्रियता ने संगठन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। समर्थन पाने की होड़ में ऐसे नेता सबसे आगे नजर आ रहे हैं, जिनका पिछला रिकार्ड पार्टी लाइन से अलग रहा है।
संगठन के भीतर यह चिंता गहराने लगी है कि यदि समर्थन दिए जाने को पत्र जारी करते समय संतुलन नहीं बनाया गया तो गुटबाजी खुलकर सामने आ सकती है। पिछले पंचायत चुनाव का अनुभव भी सपा के लिए सबक है, जब पार्टी के समर्थन से 16 जिला पंचायत सदस्य जीतकर आए थे लेकिन, इनमें से अधिकतर जिला पंचायत अध्यक्ष के नामांकन के समय गायब हो गए थे या बगावत का रास्ता चुनकर सत्ता के साथ खड़े थे।
कांठ विधानसभा क्षेत्र में स्थिति सबसे जटिल रही। यहां एक जिला पंचायत सदस्य पूर्व सांसद का करीबी माना जाता है, जबकि इसी क्षेत्र से दलित समाज का एक चेहरा भी सपा के समर्थन पर जीतकर आया था लेकिन, दोनों पर्चा भरने के समय लापता थे। इसके अलावा एक अन्य सदस्य चुनाव के समय मोबाइल बंद कर गायब हो गया था, जिससे संगठन को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा था।
पार्टी की फजीहत भी खूब हुई थी। ठाकुरद्वारा क्षेत्र में भी पार्टी के समर्थन से जीतने वाले सदस्य ने भी ऐन वक्त पर किनारा कर लिया था, जिससे अंदरूनी नाराजगी बढ़ी। वहीं, एक यादव परिवार से जुड़े जिला पंचायत सदस्य ने खुलकर बगावत की थी। बिलारी, मुरादाबाद देहात विधानसभा क्षेत्र में भी कई बागी सदस्य ऐसे हैं, जो बुरे समय में पार्टी के साथ नहीं रहे।
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कुंदरकी क्षेत्र के तीन जिला पंचायत सदस्य पिछले दरवाजे से सत्ता के साथ खड़े हो गए। दिखाते यह रहे कि पार्टी के साथ हैं। हाल ही में बसपा छोड़कर आए एक जिला पंचायत सदस्य इस बार सपा से समर्थन मांग रहे हैं। ऐसे में पार्टी के सामने यह चुनौती है कि बाहरी चेहरों को तरजीह दी जाए या पुराने कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता मिले।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा को इस बार समर्थन के लिए उम्मीदवार चयन में बेहद सतर्क रहना होगा। आंतरिक मूल्यांकन, ब्लाक और जिला स्तर पर फीडबैक और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाकर ही संगठन को एकजुट रखा जा सकता है।
बागी छवि वाले चेहरों से दूरी बनाना और जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका देना पार्टी की साख मजबूत कर सकता है यदि समय रहते रणनीति नहीं बनाई गई तो पंचायत चुनाव में सपा को अंदरूनी कलह और असंतोष का खामियाजा उठाना पड़ सकता है।
अभी तो सरकार पंचायत चुनाव ही नहीं कराना चाहती है। इसके बावजूद संगठन स्तर पर तैयारियां लगातार चल रही हैं। हमारा प्रयास रहेगा कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को ही समर्थन दिए जाने में प्राथमिकता मिले और उन्हें पूरा समर्थन दिलाया जाए। किसी भी स्तर पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी नहीं होगी, संगठन को मजबूत बनाकर ही चुनाव मैदान में उतरेंगे।
- जयवीर सिंह यादव, जिलाध्यक्ष, समाजवादी पार्टी, मुरादाबाद
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