नीदरलैंड में भारतीय हस्तशिल्प वेयरहाउस से यूरोप में बढ़ेगा बाजार और निर्यात, देशभर के निर्यातकों को फायदा
भारतीय हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नीदरलैंड में 5000 वर्ग फीट का वेयरहाउस स्थापित किया जाएगा। इससे यूरोप में उत्पादों की तेज आपूर्ति सुनिश ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
नीदरलैंड में बनेगा 5000 वर्ग फीट का हस्तशिल्प वेयरहाउस
यूरोप में भारतीय उत्पादों की आपूर्ति दो दिन में होगी
केंद्र सरकार वहन करेगी भंडारण का खर्च, निर्यातकों को लाभ
मेहदी अशरफी, मुरादाबाद। अमेरिका के टैरिफ वार और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच चुनौतियों का सामना कर रहे भारतीय हस्तशिल्प निर्यात उद्योग को नई मजबूती मिलने जा रही है। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) केंद्र सरकार के सहयोग से यूरोप के प्रमुख व्यापारिक केंद्र नीदरलैंड में भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों के लिए करीब पांच हजार वर्ग फीट क्षेत्रफल में वेयरहाउस स्थापित करने की तैयारी कर रही है।
परियोजना के शुरू होने से मुरादाबाद सहित देशभर के हस्तशिल्प निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। ईपीसीएच के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज खन्ना ने बताया कि केंद्र सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए परिषद को छह करोड़ रुपये उपलब्ध करा चुकी है।
इसी सप्ताह ईपीसीएच की टीम नीदरलैंड रवाना होगी, जहां वेयरहाउस के लिए उपयुक्त स्थान का चयनित किया जाएगा। स्थान चयन और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद परियोजना पर तेजी से काम शुरू होगा।
एक्सपो बाजार के सहयोग से नीदरलैंड में बनेगा हस्तशिल्प वेयर हाउस
यह मॉडल सफल रहा तो भविष्य में यूरोप के अन्य देशों और दुनिया के दूसरे प्रमुख बाजारों में भी इसी तरह के वेयरहाउस स्थापित किए जा सकते हैं। इससे भारतीय हस्तशिल्प उद्योग को वैश्विक बाजार में नई गति मिलेगी और मुरादाबाद समेत देश के प्रमुख हस्तशिल्प क्लस्टरों के निर्यात में वृद्धि हाेगी। बता दें कि पूरे भारत से हस्तशिल्प निर्यात का वार्षिक कारोबार करीब 35 हजार करोड़ रुपये का है।
20 जून को नीदरलैंड में होगी मीटिंग
वर्तमान में भारत से यूरोप भेजे जाने वाले हस्तशिल्प उत्पादों को समुद्री मार्ग से पहुंचने और कस्टम क्लियरेंस की प्रक्रिया पूरी होने में एक से डेढ़ माह तक का समय लग जाता है। इससे विदेशी खरीदारों को समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। लेकिन नीदरलैंड में वेयरहाउस बनने के बाद भारतीय निर्यातक पहले से ही अपने उत्पाद वहां स्टाक कर सकेंगे। ऐसे में यूरोपीय ग्राहकों को आर्डर मिलने के बाद माल महज दो दिनों के भीतर उपलब्ध कराया जा सकेगा।
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वेयरहाउस होगा फाइनल
नीदरलैंड को यूरोप का महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक और वितरण केंद्र माना जाता है। यहां से जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम, स्पेन, इटली और अन्य यूरोपीय देशों तक सड़क, रेल और जलमार्ग के माध्यम से तेज आपूर्ति संभव है। ऐसे में भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की पहुंच और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता दोनों में वृद्धि होगी। इससे यूरोप के बाजार में भारतीय उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। निर्यातकों के अनुसार, हाल के वर्षों में वैश्विक स्तर पर बढ़ते परिवहन जोखिम और अंतरराष्ट्रीय मार्गों में अस्थिरता के कारण कई बार आर्डर प्रभावित हुए हैं।
पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर समुद्री मार्गों पर भी असर पड़ता है
पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर समुद्री मार्गों पर भी असर पड़ता है, जिससे माल की आपूर्ति में देरी होती है। वेयरहाउस की व्यवस्था होने पर पहले से उपलब्ध स्टाक के कारण ऐसे जोखिम काफी हद तक कम हो जाएंगे। इससे ऑर्डर रद होने या होल्ड होने की आशंका भी घटेगी।
ईपीसीएच अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना का उद्देश्य केवल तेज आपूर्ति सुनिश्चित करना नहीं है, बल्कि भारतीय हस्तशिल्प को यूरोप में एक स्थायी और विश्वसनीय आपूर्ति नेटवर्क उपलब्ध कराना भी है। इससे छोटे और मध्यम निर्यातकों को विशेष लाभ मिलेगा, जो सीमित संसाधनों के कारण विदेशों में अपनी अलग लाजिस्टिक व्यवस्था विकसित नहीं कर पाते हैं।
पायलट प्रोजेक्ट के अनुभव का मिलेगा लाभ
ईपीसीएच इस परियोजना को शुरू करने में पहले से संचालित एक्सपो बाजार पायलट प्रोजेक्ट के अनुभव का लाभ उठाएगा। परिषद ने वेयरहाउस संचालन और स्थानीय लाजिस्टिक व्यवस्था के लिए एक्सपो बाजार के सहयोग से माडल तैयार किया है। इसी के आधार पर नीदरलैंड में स्थायी वेयरहाउस स्थापित होगा। वेयरहाउस में उत्पादों के भंडारण का खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी, जिससे निर्यातकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।