'खाना बाद में मिलता था, यातना पहले', मुजफ्फरनगर में बंधक मजदूरों की आपबीती; जला दिए आधार कार्ड, शरीर को पेचकस से गोदा
Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर में एक दोना-पत्तल फैक्ट्री से 13 बंधुआ मजदूरों को छुड़ाया गया, जिन्हें डेढ़ साल तक यातनाएं दी गईं और भूखा रखा गया।

मुजफ्फरनगर में बंधन मुक्त कराए गए मजूदर अपनी चोट दिखाते हुए। जागरण
HighLights
दोना-पत्तल फैक्ट्री से 13 बंधुआ मजदूर छुड़ाए गए।
मजदूरों को डेढ़ साल तक यातनाएं दी गईं, भूखा रखा गया।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। 'दिल और दिमाग में मां-बाप के साथ स्वजन की याद तैरती थी, लेकिन आंखों के सामने सुपरवाइजर जल्लाद बनकर खड़ा रहता था। बिजली आपूर्ति रहने तक काम कराया जाता था। रोज भोजन नहीं मिलता था, लेकिन यातना और मार जरूर मिलती थी।' यह दिल दहलाने वाली आपबीती दोना-पत्तल फैक्ट्री से मुक्त कराए गए श्रमिकों की है।

उन्होंने बताया कि सुपरवाइजर शिवा त्यागी व मुख्य आरोपित अंकित बालियान हथौड़ों से वार करते थे और पेचकस से कमर और हाथ को चीर देते थे।
एसपी देहात अक्षय संजय महाडीक, तितावी थाना प्रभारी प्रमोद कुमार व एसओजी प्रभारी मोहित चौधरी की टीम ने तीन दिन पूर्व तितावी के गांव मांडी में किसान सरकार हाउस दोना-पत्तल फैक्ट्री में छापा मारकर 13 श्रमिकों को बंधनमुक्त कराया था।
एक श्रमिक विक्रम कुमार फैक्ट्री मालिक प्रदीप बालियान, उसके पुत्र अंकित बालियान व सुपरवाइजर को चकमा देकर दीवार फांदकर पुलिस तक पहुंचा था। उसके बाद बंधक बनाए गए श्रमिकों को छुड़ाया गया। तीन दिन से पुलिस मामले की गहनता से पड़ताल में लगी है।
श्रमिकों के स्वजन से संपर्क कर उन्हें बुलाया गया। यहां कोई डेढ़ वर्ष तो काेई एक साल, छह माह से बंधक था। आरोपित खाना देने से पहले रोजाना श्रमिकों को पीटते थे। यातना देकर कमरों में रखा जाता था। जिससे श्रमिकों के शरीर का मांस सूख गया और हड्डियों का ढांचा सांस ले रहा था।
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मुक्त कराने के बाद थाने में इन मजदूरों के लिए निवास व भोजन का इंतजाम किया गया। 
दिल्ली से लाया था अंकित
बिहार के औरेया के गांव खजूरिया निवासी श्रमिक शिवम कुमार ने बताया कि सात माह पहले वह दिल्ली आया था, यहां पर उसका सामान चोरी हो गया था। यहां पर अंकित बालियान का युवक मिला और काम का लालच दिया। उसे फैक्ट्री में अंदर बंधक बना लिया और मारपीट कर काम कराया गया। उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती थी। डराया जाता था। वह स्वतंत्र हो सके हैं, इसके लिए पुलिस का आभार है।
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आधार कार्ड समेत पहचान की चीजों को जला दिया
उत्तराखंड के नैनीताल निवासी रामू ने बताया कि छह माह पहले वह अंबाला आया था। काम छूट गया तो उसे अंकित बालियान उसे अपने साथ डिस्पोजल बर्तन बनाने की फैक्ट्री में लाया था। उसका मोबाइल छीन लिया था। उनके आधार कार्ड समेत पहचान की चीजों को जला दिया था। काम नहीं करते तो बेल्टों से पीटते थे। हथौड़ा मारकर एक साथी का नाखून तोड़ दिया था। चोकर की रोटी देते थे, उसके साथ केवल नमक एवं हरी या लाल मिर्च देते थे।
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12 हजार रुपये प्रतिमाह देने का लालच दिया
आगरा निवासी सोनू चौहान ने बताया कि लगभग एक साल पहले दिल्ली काम के लिए आया था, लेकिन उसे काम नहीं मिला। रेलवे स्टेशन पर अंकित बालियान उसे मिला था। उसने काम करने के ऐवज में 12 हजार रुपये प्रतिमाह देने का लालच दिया और साथ ले आया। यहां फैक्ट्री में लाकर उसे बंधक बना लिया। फैक्ट्री मालिक लाइट जारी रहने तक काम किया जाता था। यहां सुविधा के बजाए उन्हें यातना देकर प्रतिदिन पीटा जाता था।
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