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    इस्लाम छोड़ सनातन अपनाने वाले परिवारों ने पहली बार शुरू की कांवड़ यात्रा, बोले- 'भोलेनाथ ने दिया नया जीवन'

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 06:15 AM (IST)

    बिजनौर, गाजियाबाद और दिल्ली के पूर्व मुस्लिम परिवारों ने सनातन धर्म अपनाने के बाद अपनी पहली कांवड़ यात्रा शुरू की है। ...और पढ़ें

    कम्हेड़ा गंगनहर पर कांवड़ लेकर जाते हुए पूर्व मुस्लिमों का जत्था

    कम्हेड़ा गंगनहर पर कांवड़ लेकर जाते हुए पूर्व मुस्लिमों का जत्था

    HighLights

    1. पूर्व मुस्लिम परिवारों ने सनातन धर्म अपनाकर पहली कांवड़ यात्रा की।

    2. शांति, बेटियों की सुरक्षा और हलाला से मुक्ति बताई वजह।

    3. हरिद्वार से गंगाजल लेकर गाजियाबाद मंदिर जाएंगे शिवभक्त।

    संवाद सूत्र, मुजफ्फरनगर। मुस्लिम से हिंदू बने बिजनौर, गाजियाबाद और दिल्ली के परिवारों का जत्था हर-हर महादेव के जयकारों के साथ पुरकाजी से होते हुए चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग से रवाना हुआ है। जत्थे में 20 से अधिक गाड़ियां शामिल रहीं।

    बैनर पर पूर्व मुस्लिम कांवड़ यात्रा भी लिखा है। इनका कहना है कि सनातन सर्वश्रेष्ठ है। यहां शांति और बेटियों की सुरक्षा है तथा हलाला जैसी कुरीतियाें से मुक्ति हैं। कांवड़ यात्रा धार्मिक यात्रा भी दुनिया के किसी धर्म में नहीं है। इस जत्थे का जगह-जगह स्वागत किया गया।

    मूल रूप से बिजनौर निवासी और अब गाजियाबाद में रहने वाले पूर्व मुस्लिम इमरोज आलम उर्फ राजन, शहजाद उर्फ शंकर, रजिया उर्फ सावित्री, अब्दुल समद अजय सहित 50 से अधिक महिलाएं और पुरुष हरिद्वार से पूर्व मुस्लिम कांवड़ यात्रा लेकर आए हैं। तीर्थनगरी हरिद्वार की हर की पैड़ी से पहली अगस्त को जत्थे ने गंगाजल उठाया है। चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग से यह जत्था पैदल यात्रा करते हुए गंतव्य की ओर बढ़ रहा है।

    सभी ने सनातन धर्म अपनाने के बाद पहली बार कांवड़ यात्रा पर है। इमराेज उर्फ राजन ने बताया कि चार साल पहले परिवार के साथ सनातन धर्म अपनाया था। तभी से बिजनौर छोड़कर गाजियाबाद में रह रहे हैं। जब से सनातन अपनाया है परिवार में शांति और समृद्धि है। यहां समानता और बेटियाें की सुरक्षित हैं।

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    रजिया उर्फ सावित्री बताती हैं, इस्लाम में महिलाओं के लिए ढेरों बंदिशे हैं, लेकिन सनातन में आजादी तथा समानता है। सबसे अच्छी बात यह है कि तीन तलाक और हलाला जैसी कुरीतियों से मुक्ति है। भोलेनाथ की कृपा से चार साल पहले नया जीवन मिला है, इस जीवन को भगवान शिव को समर्पित कर दिया है।

    गाजियाबाद निवासी शंकर का कहना है कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से नई दिशा मिली है। शिवभक्ति के साथ हिंदू परंपराओं का पालन कर रहे हैं। पहली बार कांवड़ यात्रा करने का अनुभव बेहद भावुक करने वाला और अविस्मरणीय है। सनातन में उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता और सुरक्षा मिली है। अपने रिश्तेदारों से सनातन धर्म अपनाने की अपील कर रहे हैं।

    जत्थे के नेतृत्व कर रहे आचार्य कुलदीप विद्यार्थी ने बताया कि कांवड़ यात्रा में 50 से अधिक वह लोग भी शामिल हैं, जो पूर्व में मुस्लिम थे और पिछले 10 सालों में सनातन धर्म को अपनाया है। ये सभी वर्तमान में गाजियाबाद और दिल्ली में रह रहे हैं। सभी शिवरात्रि पर गाजियाबाद के दूधेश्वर नाथ महादेव मंदिर में जलाभिषेक करेंगे।

    यह लोग मंदिर कमेटी और वीर सेवा दल से जुड़े हुए हैं। काफिले के साथ वीर सेवा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रसिक चौहान, वैभव और दिवाकर भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस जत्थे में मेरठ से भी कुछ ऐसे और लोग शामिल होंगे, जो पूर्व में मुस्लिम रहे, लेकिन सनातनी हैं।

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