Kanwar Yatra: मुजफ्फरनगर में यातायात परिवर्तन की तैयारी, Delhi-Dehradun Highway पर 6 अगस्त से वाहनों का संचालन बंद
कांवड़ यात्रा के कारण मुजफ्फरनगर में यातायात परिवर्तन होगा, जिससे 13 दिनों तक बड़े मालवाहक वाहनों की आवाजाही थम जाएगी। उद्यमी उत्पादन प्रभावित होने से ...और पढ़ें

HighLights
13 दिन बड़े मालवाहक वाहनों पर रहेगा प्रतिबंध।
उद्यमी कर रहे वैकल्पिक मार्गों की मांग।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। आस्था की डगर पर शिवभक्त कांवड़ियों की कदमताल आरंभ होने लगी है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़ियां शिवालयों की तरफ बढ़ रहे हैं। इसी बीच पुलिस-प्रशासन ने 28 जुलाई से यातायात परिवर्तन की तैयारी की है। जिसमें बड़े मालवाहक वाहनों के पहिए 13 दिन थम जाएंगे।
इसको लेकर उद्यमियों ने वैकल्पिक मार्ग की मांग रखी है। कार, स्कूटर तथा बाइक का पास मिलता है, लेकिन बड़े वाहनों को वैकल्पिक मार्ग नहीं मिलता है। इससे परेशानी बनती है, फैक्ट्रियों व इकाइयों में माल का आवागमन थमता है।
कांवड़ यात्रा को लेकर पुलिस-प्रशासन ने यातयात को लेकर विशेष कार्य योजना बनाई है। 28 जुलाई से जिले में यातायात परिवर्तन किया जा सकता है। जिससे छोटे-बड़े वाहनों का मार्ग बदला जाएगा। यातायात विभाग ने इसकी तैयारी की है। वहीं छह अगस्त से दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे पर पूर्णत: वाहनों का संचालन बंद हो जाएगा।
11 अगस्त तक हाईवे को कांवड़ियों के हवाले हो जाएगा। लगभग 13 दिनों तक यातायात पहिया जाम रहेगा। इसको लेकर जनपद के उद्यमियों ने अपने लिए वैकल्पिक मार्ग की मांग पुलिस-प्रशासन के समक्ष रखी है।
उद्यमियों का कहना है कि लगभग 10 दिन तक पूर्णत: उनके मालवाहक वाहनों का संचालन बंद रहता है। उन्हें कार, बाइक और स्कूटर के पास मिलते हैं, लेकिन वह कर्मियों के लिए काम आते हैं। जिससे उनकी इकाइयों में उत्पादन काम चलता तो है, लेकिन धीमी गति का रहता है।
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कच्चा माल आने में बनती है समस्या
जनपद में पेपर मिलों, लोहा उद्योगा समेत छोटे-बड़े लगभग 20 हजार उद्योग संचालित हैं। पेपर मिलों, लोहा उद्योगों का माल दिल्ली एनसीआर के अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड राजस्थान समेत मध्य प्रदेश तक जाता है। इसी तरह से दिल्ली समेत विभिन्न राज्यों से कच्चा माल आता है।
उद्यमियों की मांग है कि दिल्ली-देहरादून हाईवे पूरी तरह से कांवड़ियों के हवाले रहता है। इसके अलावा दिल्ली-करनाल हाईवे, दिल्ली-देहरादून इकोनोमिक कारिडोर तथा पानीपत-खटीमा राजमार्ग निकलता है। किसी एक हाईवे पर वैकल्पिक मार्ग दिया जा सकता है।
जिले के आंकड़ों पर एक नजर
- 128 से अधिक लोहा-बड़े उद्योग
- 30 से अधिक पेपर मिल्स
- 10 हजार से अधिक श्रमिक
जिले से निकल रहे हाईवे
- दिल्ली-देहरादून हाईवे
- दिल्ली-देहरादून इकोनोमिक कारिडोर
- पानीपत-खटीमा राष्ट्रीय राजमार्ग
- दिल्ली-सहारनपुर राज्य हाईवे
बोले उद्यमी..
कांवड़ यात्रा आस्था का सबसे बड़ा पर्व है। इसके लिए उद्यमी सहयोग करते हैं, लेकिन प्रशासन के स्तर से कांवड़ पास मिलते हैं। इनके माध्यम से स्थानीय मार्गों पर काम चल जाता है। मालवाहक वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग की सुविधा मिलनी चाहिए। जिससे इकाइयों का उत्पादन प्रभावित नहीं हो सके।
-पवन कुमार गोयल, चेयरमैन, सहारनपुर डिवीजनल।
कांवड़ यात्रा के दौरान पेपर मिलों का संचालन बंद रखना पड़ता है। मिलों में रद्दी नहीं पहुंच पाती है। फिनिश माल की डिलीवरी भी थम जाती है। इससे आर्थिक हानि होती है। प्रशासन के स्तर से वैकल्पिक मार्ग दिया जाए, भले ही यह थोड़ा लंबा मार्ग रहे। इससे इकाइयों का भी संचालन व उत्पादन प्रभावित नहीं होगा।
-पंकज अग्रवाल, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश पेपर मिल एसोसिएिशन।
कांवड़ यात्रा के लिए उद्यमियों और कारोबारियों को अपने माल का आवागमन करने के लिए वैकल्पिक मार्ग मिलना चाहिए। कांवड़ आस्था का विषय है, लेकिन लगभग 10 दिनों तक इकाइयों में उत्पादन की चाल धीमी पड़ जाती है। इसका उत्पादन के साथ काम पर प्रभाव पड़ता है।
-विपुल भटनागर, पूर्व चेयरमैन, आइआइए, मुजफ्फरनगर।
बेगराजपुर औद्योगिक क्षेत्र प्रमुख उद्योग स्थान है। कांवड़ यात्रा में सबसे अधिक यहीं पर प्रभाव पड़ता है। कर्मचारियों के आवागमन से लेकर मालवाहक वाहनों का आना-जाना प्रभावित होता है। दिल्ली-देहरादून हाईवे किनारे उद्योग क्षेत्र है। जिस कारण उद्योगों में काम धीमा पड़ जाता है।
-फकीरचंद मोघा, वरिष्ठ उद्यमी, बेगराजपुर।