जन्म कहीं भी हो, कर्मों से महान बनता है मनुष्य : मोरारी बापू
मोरारी बापू ने मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ में श्रीराम कथा का शुभारंभ किया, जिसमें उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने कर्मों से महान बनता है, जन्म स्थान से नहीं। ...और पढ़ें

शुकतीर्थ में श्री शुकदेव आश्रम में श्री रामकथा के शुभारंभ पर मुरारी बापू को व्यास पीठ पर सम्मानित करते पीठाधीश्वर स्वामी ओमानन्द महाराज। जागरण
HighLights
जन्म नहीं, कर्म मनुष्य को महान बनाते हैं: मोरारी बापू।
शुकतीर्थ में छठी बार श्रीराम कथा का शुभारंभ।
मोरारी बापू ने कथा को 'मानस शुकतीर्थ' नाम दिया।
संवाद सूत्र, जागरण. मोरना ( मुजफ्फरनगर)। विश्व प्रसिद्ध सन्त एवं मानस मर्मज्ञ मोरारी बापू ने कहा कि जन्म कहीं भी हो, मनुष्य अपने कर्मो से महान बनता है। कर्म व जन्म दोनों महान हों, ऐसे व्यक्ति तुलसीदास जी हैं। तुलसीदास जी ने साधु की अनेक स्थानों पर वंदना की है। साधु के अपमान को भगवान कृष्ण ने भी बर्दाश्त नहीं किया। साधु का अपमान होने पर सुदर्शन चक्र चलाते थे।
मोरारी बापू शनिवार को पौराणिक तीर्थ नगरी शुकतीर्थ स्थित श्री शुकदेव आश्रम में श्रीराम कथा के शुभारंभ पर श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी से बढ़कर कोई वंदना करने वाला नहीं हो सकता। हम धरती को माता कहते हैं। इस प्रकार हम सब आपस में सहोदर हुए तो फिर निंदा किसी की बनती ही नहीं है।
शुकतीर्थ में वह छठी बार कथा सुना रहे हैं। पतित पावनी गंगा तट पर शुकदेव मुनि की तपोस्थली पर कथा करने का उन्हें गौरव प्राप्त हो रहा है। शुकदेव भगवान में अनेक गुण विद्यमान हैं। सूर्य जैसा तेजस्वी, जल जैसा तरल, आकाश जैसा व्यापक, पर्वत जैसा अटल, धरती जैसा सहनशील चरित्र है। भगवान की सेवा प्रत्यक्ष नहीं होती। मंत्रों के द्वारा हम भगवान की शरणागति प्राप्त करते हैं।
केवल साधु की सेवा प्रत्यक्ष होती है। गुरु की चरण रज की कृपा से नयन पवित्र हो जाते हैं। तब मनुष्य किसी की निंदा नहीं करता। सबकी वन्दना ही करता है। शुकदेव शब्द में शुक यानी तोता नामक पक्षी जुड़ा है पक्षी विचरण करते हैं। साधु भी विचरण करते हैं। रामायण में अनेक स्थानों पर तुलसीदास जी ने पक्षियों का विशेष वर्णन किया है।
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बापू ने रामचरितमानस की चौपाइयों “सुक सनकादि भगत मुनि नारद...” को आधार बनाते हुए इस कथा का नामकरण “मानस शुकतीर्थ” किया। उन्होंने कहा कि शुकतीर्थ शब्द की बार-बार अनुभूति होने के कारण यह नाम स्वाभाविक रूप से उदित हुआ है। उन्होंने कहा कि “मानस शुकतीर्थ” कथा के माध्यम से उक्त चौपाइयों के आश्रय में शुकतीर्थ की महिमा का विस्तारपूर्वक स्मरण और वर्णन किया जाएगा। कथा में मुख्य यजमान एनआरआई चेतन भाई सपत्नीक रहे। श्री रामकथा समिति के जिनेन्द्र गर्ग, प्रदीप जिंदल, अमित गोयल, सत्यप्रकाश रेशू आदि ने भी व्यासपीठ पूजन में सक्रिय सहभागिता निभाई।