मुजफ्फरनगर के शिव चौक की अब तक 50 हजार कांवड़िए कर चुके परिक्रमा, एक करोड़ तक पहुंचेगी संख्या
मुजफ्फरनगर के शिव चौक पर अब तक 50 हजार कांवड़िए परिक्रमा कर चुके हैं, और अगले 10 दिनों में यह संख्या एक करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। ...और पढ़ें

शुक्रवार शाम शिवचौक मंदिर की परिक्रमा करते हरिद्वार से गंगाजल लेकर आए कांवड़िए
HighLights
50 हजार कांवड़िए शिव चौक परिक्रमा कर चुके हैं।
अगले 10 दिनों में संख्या एक करोड़ पहुंचेगी।
शिव चौक पर सीसीटीवी से निगरानी, कंट्रोल रूम शुरू।
आशु सिंह, मुजफ्फरनगर। गोमुख से कलश में गंगाजल भरकर चले हरियाणा के कांवड़िए कृष्ण कुमार शिव चौक पर रुके हैं। उनके साथ राजस्थान के श्याम सुंदर भी हैं। दोनों से जब हमने यहां रुकने का कारण पूछा तो कृष्ण कुमार बोले कि शिव मूर्ति की आधी (चंद्राकार) परिक्रमा करने के बाद आगे बढ़ने का नियम है।
कृष्ण कुमार की यह 21वीं कांवड़ है। इन दोनों श्रद्धालुओं की तरह ही लाखों कांवड़िए इस नियम को पूरा कर अपनी यात्रा पर आगे बढ़ते हैं। अब तक करीब 50 हजार कांवड़िए परिक्रमा कर गंतव्य की ओर बढ़ चुके हैं। एक अनुमान के अनुसार अगले 10 दिनों में यह संख्या एक करोड़ के पार पहुंचेगी।
शिव चौक का संचालन श्री शिव मूर्ति संचालक मंडल पंजीकृत के द्वारा किया जाता है। इसके प्रबंधक शंकर स्वरूप बंसल ने बताया कि शिव मूर्ति की स्थापना वर्ष 1956 में हुई थी। इस मूर्ति का निर्माण रामस्वरूप मिस्त्री ने किया था। यह मार्बल के छोटे टुकड़ों और सीमेंट से बनी है।
बताते हैं कि यह मूर्ति रात-रात में तैयार की गई थी। भोलेनाथ यहां महामृत्युंजय स्वरूप में प्रतिष्ठापित हैं। शुरुआत में यहां शिव मूर्ति और एक फव्वारा था। इस स्थान को शिवजी का फव्वारा बोला जाता था। इसके सामने अंगूरी टावर था। इस टावर के नीचे प्याऊ होती थी। टावर पर एक घड़ी भी लगी थी।
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1975 के बाद शिव चौक का कई चरणों में जीर्णोद्धार हुआ। सबसे पहले 1982-83 में मूर्ति के ऊपर छतरी बनवाई गई। इसके बाद 1991-92 में समिति का गठन हुआ और फिर यहां शिव परिवार प्रतिष्ठापना के साथ अन्य कार्य हुए। शंकर स्वरूप बताते हैं कि सर्वप्रथम कांवड़ सेवा शिविर शिव चौक के निकट स्थित हनुमान मंदिर में सूरज प्रकाश लोहिया और कन्हैया पान वाले की ओर से लगाया जाता था।
1992 के बाद ही कांवड़ियों की संख्या बढ़नी शुरू हुई और इसी के साथ शिविरों की संख्या भी बढ़ती चली गई। शिव चौक मंदिर की परिक्रमा की परंपरा भी तभी शुरू हुई।
वर्तमान में मंदिर में मुख्य पुजारी हरीश भारद्वाज समेत चार पुजारी सच्चिदानंद सेमवाल, हिमांशु भारद्वाज और विकास भारद्वाज हैं। दो सेवक हैं। मंदिर के कपाट सुबह चार बजे खुलते हैं और 10 बजे शयन होता है। कांवड़ यात्रा के दौरान रात 12 बजे शयन होता है।
कंट्रोल रूम शुरू
शिव चौक पर कंट्रोल रूम शुरू हो गया है। यहां 24 घंटे कांवड़ यात्रा पर सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जा रही है। कंट्रोल रूम पर पुलिस और नगर पालिका के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
यहां एलईडी स्क्रीन पर हरिद्वार से लेकर जनपद की सीमा तक की लाइव फुटेज देखी जा रही है। नगर कोतवाली प्रभारी ब्रजेश कुमार शर्मा ने बताया कि पिछले दो दिन में ही 20 से 22 हजार कांवड़िए शिव चौक से गुजरे हैं। यह संख्या निरंतर बढ़ती जाएगी। कितने कांवड़िए यहां से गुजरेंगे इसका आकलन फिलहाल नहीं हुआ है।