पुलिस ने झूठा फंसाया था... अदालत ने जानलेवा हमले के दो आरोपितों को किया दोषमुक्त
मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने जानलेवा हमले के दो आरोपियों को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ ...और पढ़ें

(प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने जानलेवा हमले के दो आरोपियों को कर दिया बरी ।
न्यायालय ने पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए, कार्रवाई के आदेश।
पीड़ितों ने आरोपियों को पहचानने से इनकार किया, सबूतों का अभाव।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने तीन साल पहले ट्रक चालक और क्लीनर पर हुए जानलेवा हमले में दो आरोपितों को दोषमुक्त किया है। ट्रक चालक और क्लीनर पर हमले में आरोपित बनाया गया तीसरा आरोपित किशोर है, जिसकी फाइल को अलग कर दिया गया था। उस पर सुनवाई किशोर न्यायालय बोर्ड में विचाराधीन है, जबकि दो आरोपित दोष मुक्त हुए हैं।
ट्रक चालक व क्लीनर ने गवाही दी थी कि पकड़े गए आरोपितों को वह नहीं पहचानते हैं। वहीं, पुलिस ने दोनों से बरामद छुरी, तमंचे की विधि विज्ञान प्रयोगशाला से जांच नहीं कराई। न्यायालय ने पुलिस की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा किया है। निर्णय सुनाने के दौरान कहा कि न्याय की चौखट पर पद का नहीं, प्रमाण का सम्मान होता है। वर्दी सत्य की संरक्षक है, यदि वही असत्य का सहारा बन जाए तो सबसे गहरी चोट किसी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था के विश्वास पर पड़ती है।
न्यायालय ने यह भी कहा कि लोकतंत्र को सबसे बड़ा खतरा पुलिस स्टेट से होता है, क्योंकि जब पुलिस अधिकारी मनमाने तरीके से कार्य करने लगते हैं और मानवाधिकारों का हनन करते हैं तब लोकतंत्र को पुलिस स्टेट में तब्दील होने में समय नहीं लगता। बुलंदशहर के थाना बीबीनगर के गांव मंडोना निवासी ट्रक क्लीनर मंजीत कुमार पुत्र धर्मवीर ने 16 अगस्त 2023 को छपार थाने पर मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें कहा था कि वह अपने गांव निवासी चालक गुलबीर के साथ बिहार के कटिहार पूर्णिया से मुजफ्फरनगर जा रहे थे।
ट्रक को छपार के सिसौना के पेट्रोल पंप पर खड़ा करके रात लगभग 8:30 बजे ट्रक के केबिन में खाना बना रहे थे, तभी दो लोगों ने आकर उनके साथ मारपीट कर तमंचे से फायर किए थे। इसमें दोनों घायल हो गए थे। 25 अगस्त 2023 को पुलिस ने शराफत पुत्र लियाकत निवासी गांव पचपेडा तथा आसिफ पुत्र आस मोहम्मद निवासी मुहल्ला तारापुरी, लिसाड़ीगेट मेरठ को पकड़ा था। दोनों के विरुद्ध 23 अप्रैल 2024 को न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किया। आरोपित आसिफ जमानत पर बाहर है, वहीं शराफत जिला कारागार में निरुद्ध है।
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शनिवार को न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई। अभियोजन ने मुकदमा सिद्ध करने के लिए सात गवाह पेश किए, लेकिन आरोप सिद्ध नहीं हुए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरुज असगर ने तर्क दिया कि पुलिस ने दोनों को झूठा फंसाया है। वारदात स्थल से कोई खोखा-कारतूस नहीं मिले थे। बहस सुनने के दौरान अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर के न्यायालय ने दोनों आरोपित को दोषमुक्त कर दिया।
न्यायालय ने कहा कि विवेचक दारोगा नरेंद्र सिंह ने नियम-कानून को ताक पर रखकर झूठा आरोप-पत्र दाखिल किया। दोनों निर्दोष लोगों को जेल भेजा गया। न्यायालय ने कहा कि न्याय व्यवस्था की आधारशिला निष्पक्ष एवं ईमानदार विवेचना पर टिकी है। यदि किसी निर्दोष व्यक्ति को झूठे साक्ष्यों, मनगढ़ंत कथनों अथवा दुर्भावनापूर्ण विवेचना के माध्यम से अभियुक्त बनाकर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है तो ऐसी कार्रवाई न केवल उस व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन करती है, बल्कि सम्पूर्ण न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर आघात पहुंचाती है।
पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश
न्यायालय ने तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक नरेन्द्र सिंह, तत्कालीन थानाध्यक्ष छपार मुकेश कुमार तथा तत्कालीन पर्यवेक्षण अधिकारी एवं सीओ सदर यतेन्द्र नागर के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दिए हैं। आरोप पत्र में इनके नाम वर्णित नहीं हैं। एसएसपी, एडीजी मेरठ जोन, अपर मुख्य सचिव, गृह, उत्तर प्रदेश शासन तथा डीजीपी को आदेश की एक प्रति भेजी गई है। दोषमुक्त दोनों लोगों को भी स्वतंत्र किया है कि वह प्रयागराज हाई कोर्ट में पुलिस की कार्यशैली को लेकर अपना पक्ष रखने के साथ कार्रवाई कराने के लिए स्वतंत्र हैं।