मुजफ्फरनगर की दोना-पत्तल फैक्ट्री में कुपोषित कर दिए श्रमिक, प्रताड़ना की वजह से मानसिक हालत भी नहीं ठीक
मुजफ्फरनगर की दोना-पत्तल फैक्ट्री में 13 श्रमिकों को बंधक बनाकर प्रताड़ित किया गया, जिससे वे कुपोषित और मानसिक रूप से ...और पढ़ें

HighLights
13 श्रमिकों को दोना-पत्तल फैक्ट्री से मुक्त कराया गया।
श्रमिक कुपोषित और मानसिक रूप से अस्वस्थ पाए गए।
मुख्य आरोपी अंकित बालियान की तलाश जारी, SIT जांच।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। दोना-पत्तल फैक्ट्री के श्रमिकों पर हुए अत्याचार की हर रोज नई परत खुल रही है। उनके दिल और दिमाग में मां-बाप के साथ स्वजन की याद तैरती थी, लेकिन आंखों के सामने सुपरवाइजर जल्लाद बनकर खड़ा रहता था। बिजली रहने रहने तक काम कराया जाता था। रोज भोजन नहीं मिलता था, लेकिन यातना और पिटाई जरूर मिलती थी।
सुपरवाइजर शिवा त्यागी व मुख्य आरोपित अंकित बालियान हथौड़ों से वार करते थे और पेचकस से कमर और हाथ को चीर देते थे। डेढ़ साल की इस यातना से श्रमिकों की मानसिक हालत ठीक नहीं है, चिकित्सकीय जांच में वे कुपोषित पाए गए हैं। पुलिस उनका वृहद स्तरीय चिकित्सा परीक्षण करा रही है, जिसमें देखा जाएगा कि शरीर के अंदरूनी अंग तो प्रभावित नहीं हुए हैं।
बंधनमुक्त कराए गए श्रमिकों को कराया भोजन
इस बीच तितावी थाने पर गुरुवार को बंधनमुक्त कराए गए श्रमिकों को भोजन कराया गया। श्रमिकों को लंबे अरसे के बाद स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन किया। हलवा संग पूरी, छोले-आलू की सब्जी के साथ रायता खाकर श्रमिकों ने कहा कि उन्हें इस तरह का भोजन छह माह बाद नसीब हुआ है।
फैक्ट्री से भागे एक मजदूर की शिकायत पर पुलिस ने सोमवार को किसान सरकार हाउस नामक दोना-पत्तल फैक्ट्री में छापा मारकर 13 श्रमिकों को बंधनमुक्त कराया था। एसपी देहात अक्षय संजय महाडीक ने बताया कि श्रमिकों के चिकित्सकीय परीक्षण में शारीरिक रूप से कमजोरी के साथ चोट व घाव मिले हैं। खान-पान नहीं मिलने से शरीर में हड्डियां बची थीं, पोषण की कमी के कारण मांस सूख गया है।
उनकी मानसिक हालत भी ठीक नहीं है। बाहरी दुनिया देखकर वे चौंक गए थे। उनका व्यवहार बदल चुका था। इसके चलते मनोचिकित्सकों का पैनल लगाकर उनकी जांच और काउंसिलिंग कराई जा रही है। यातना और मारपीट से किसी श्रमिक का दिल, गुर्दों के साथ आंत समेत अन्य अंगों पर किस तरह का प्रभाव पड़ा है, इसकी जांच कराई जा रही है।
श्रमिकों का दावा दो लोगों को मरने के बाद फेंका गया
श्रमिकों ने दावा किया कि काम करने वाले दो साथियों को मरने के बाद बोरे में भरकर नहर या दूसरे स्थानों पर फेंका गया है। तितावी में नवंबर 2025 में मिले अज्ञात शव को एक श्रमिक अर्जुन उर्फ टोपी का मानते हुए पुलिस ने गैर इरादतन हत्या की धारा जोड़कर जांच आगे बढ़ाई है। उसके स्वजन की भी तलाश है, ताकि डीएनए सैंपल के बाद पुष्टि और साक्ष्य को मजबूत किया जा सके।
इस बीच गुरुवार को गांव मांडी में दोना-पत्तल फैक्ट्री की विशेष जांच दल (एसआइटी) ने कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है। फरार चल रहे मुख्य आरोपित अंकित बालियान की धरपकड़ के लिए पुलिस व एसओजी की टीम हरियाणा, उत्तराखंड से लेकर दिल्ली में डेरा डाले हुए है। आरोपित समेत उसके सहयोगियों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर रखा गया है।
फैक्ट्री में घुसते ही बदल देते थे नाम
आरोपित अंकित फैक्ट्री में श्रमिकों को बंधक बनाने के बाद उनके नाम बदल देता था। उनके आधार कार्ड, पहचान-पत्रों को जला दिया गया था। नैनीताल निवासी रामू ने बताया कि छह माह पहले वह अंबाला आया था। काम छूट गया तो उसे अंकित अपने साथ फैक्ट्री में लाया। उसका मोबाइल छीन लिया, आधार कार्ड समेत पहचान की चीजों को जला दिया। काम न करते तो बेल्टों से पीटते थे। चोकर की रोटी और उसके साथ केवल नमक और हरी या लाल मिर्च देते थे।
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