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    मुजफ्फरनगर में मकान गिरने से शबनम बनी बेसहारा, कलेजे के टुकड़ों के साथ खोया सुहाग; जांच में जुटा प्रशासन

    Updated: Mon, 20 Jul 2026 10:07 AM (IST)

    मुजफ्फरनगर के हबीबपुर सीकरी में मकान गिरने से इस्लामुद्दीन और उसके उसके बच्चों की मौत हो गई, जिससे पत्नी शबनम पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इस आपदा में ...और पढ़ें

    मुजफ्फरनगर में छत गिरने के बाद जांच में जुटा प्रशासन

    मुजफ्फरनगर में छत गिरने के बाद जांच में जुटा प्रशासन

    HighLights

    1. मुजफ्फरनगर में मकान गिरने से इस्लामुद्दीन और तीन बच्चों की मौत।

    2. शबनम ने पति और चार बच्चे खोए, आर्थिक संकट गहराया।

    3. प्रशासन कर रहा जांच, पीएम ग्रामीण आवास योजना पर फोकस।

    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। सरकारी आंकड़ों के खूब दावे-इरादे हैं, जिनमें गरीब को छत मिलने की हुंकार भरी गई। शायद, इस्लामुद्दीन की दहलीज तक सरकारी सहायता ने पहुंचने से पहले ही मुंह मोड़ लिया। गरीब अपने आठ बच्चों का पेट भरने के लिए जिंदगी के साथ आर्थिक तंगी का बोझ उठाता था। पति समेत चार बच्चों की जिंदगी के साथ आशियाने को भी छीन लिया। अब महिला शबनम और उसकी बेटियों के सामने गुजर-बसर का संकट गहरा गया।

    फुगाना के गांव हबीबपुर सीकरी में इस्लामुद्दीन बच्चों का पेट पालने के लिए घोड़ा-तांगा चलाने के अलाव भट्ठे पर मजदूरी भी करता था। दो वक्त की रोटी-पानी का प्रबंध करने के लिए वह सुबह से शाम तक मेहनत की भट्ठी में स्वयं को तपाता था, उसके बाद बच्चों के गुजर-बसर का इंतजाम करता था। उसकी बड़ी बेटी शहजादी 14 वर्ष की है, जबकि सात बच्चे उससे छोटी आयु के हैं। रविवार शाम लगभग आठ बजे इस्लामुद्दीन की पत्नी शबनम और शहजादी पड़ोसी के घर गए थे।

    अचानक मकान गिरने की आहट सुनी तो पहले लगा कुछ धमाका हुआ है। दौड़कर दोनों मां-बेटी घर पहुंची तो यहां सबकुछ उजड़ चुका था। पिता, भाई-बहन की चींख-पुकार मलबे में दबकर रह गई। एक के बाद एक शव बाहर निकले तो शबनम बेहोश हो गई। क्षणभर में उसकी हंसती-खेलती जिंदगी गम के पहाड़ में तब्दील हो गई। मकान के साथ उसकी उम्मीद, गुजर-बसर का जरिया परिवार का मुखिया कफन में लिपट गया। पिता और भाइयों को देखकर शहजादी खुद को संभाल नहीं सकी। ग्रामीणों ने दोनों मां-बेटी का ढांढस बंधाया।

    बताया कि इस्लामुद्दीन की इतनी हैसियत नहीं थी कि वह पक्का लेंटर का मकान बना पाए। अपने बच्चों को धूप और बरसात से बचाने के लिए छत को गार्डर-सिल्ली से पक्का किया था। बरसात के साथ आई आपदा भरे-पूरे परिवार को तबाह कर गई। शबनम और उसकी बेटी की जान बच गई, लेकिन दो बेटियां रुकैय्या और सुमैय्या की सांसों पर भी संकट बना है।

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    यह देखकर हर कोई गमजदा हो गया। डीआइजी अभिषेक सिंह और मंडलायुक्त डा. रुपेश कुमार ने मकान गिरने के मामले की जांच की। वहीं चरथावल से समाजवादी पार्टी के विधायक पंकज मलिक ने आपदा पर दुख जताया है। विधायक ने कहा कि वह पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं। उनकी हर संभव सहायता कराई जाएगी।

    जांच करने में लगा प्रशासन

    आपदा की चपेट में आकर जिंदगी खोने वाले इस्लामुद्दीन के मकान को लेकर प्रशासन जांच में लगा है। प्रशासनिक स्तर पर जांच की जा रही कि इस्लामुद्दीन ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में आवेदन किया था या नहीं। ऐसा नहीं मिलता है तो उसके मकान को लेकर आगे की जा सकती है। फिलहाल बिखरे परिवार को आर्थिक सहायता देकर संभाला गया है। बताया कि इस्लामुद्दीन का सबसे पहली पत्नी का बेटा परिवार के साथ गांव में अलग रहता है।