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बेटे की मौत के बाद नहीं देखा गया बहू का सूनापन, सास ने करवाई दूसरी शादी; चर्चा का विषय बनी यूपी की सुनीता

Published: Thu, 24 Sep 2026 12:55 PM (IST)Updated: Thu, 24 Sep 2026 01:00 PM (IST)

मुजफ्फरनगर के खतौली में एक सास ने अपने बेटे की मृत्यु के बाद बहू को बेटी का दर्जा देते हुए ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. सास सुनीता ने बहू मीनाक्षी को बेटी मानकर पुनर्विवाह कराया।

  2. बेटे की असामयिक मृत्यु के बाद बहू का जीवन संवारा।

  3. यह कदम समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश बन गया।

जागरण संवाददाता, खतौली (मुजफ्फरनगर)। समाज में सास और बहू के रिश्ते को लेकर कई तरह की बातें बनाई जाती हैं, लेकिन मुजफ्फरनगर के खतौली कस्बे से एक ऐसी मिसाल सामने आई है जिसने इंसानियत और प्यार की नई परिभाषा लिख दी है। यहां एक सास ने अपने युवा बेटे को खोने के बाद भी अपनी हिम्मत नहीं हारी और अपनी पुत्रवधू के ढलते जीवन में खुशियों का नया रंग भरने के लिए उसका पुनर्विवाह कराया।

कस्बे के मुहल्ला दयालपुरम की रहने वाली सुनीता के परिवार पर बीते कुछ समय में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। पहले उनके पति ओमपाल का साया सिर से उठ गया और फिर कुछ समय बाद ही उनके बेटे रोहित की संदिग्ध परिस्थितियों में असमय मौत हो गई। पति की मौत के बाद रोहित की पत्नी मीनाक्षी पूरी तरह से टूट चुकी थी। कम उम्र में ही बेसहारा हुई बहू के भविष्य को लेकर सुनीता बेहद चिंतित रहने लगीं।

बहू को बेटी माना और लिया बड़ा फैसला
सुनीता ने अपनी पुत्रवधू मीनाक्षी के आंसुओं को पोंछते हुए उसे केवल बहू न समझकर एक बेटी का दर्जा दिया। उन्होंने तय किया कि वह मीनाक्षी की पूरी जिंदगी अंधकार में नहीं बीतने देंगी। काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने मीनाक्षी का पुनर्विवाह कराने का साहसिक और सराहनीय निर्णय लिया।

आर्य समाज मंदिर में सादगी से संपन्न हुई शादी
सुनीता ने राजस्थान के कोटपुतली (नारायणपुर) निवासी सुरेश के पुत्र योगेश के साथ मीनाक्षी का रिश्ता तय किया। सोमवार को जीटी रोड स्थित आर्य समाज मंदिर में पूरे रीति-रिवाज और धार्मिक रस्मों के साथ दोनों का विवाह संपन्न कराया गया।

शादी के दौरान खुद सास सुनीता ने एक मां की भूमिका निभाते हुए मीनाक्षी के हाथ पीले किए और नए जोड़े को आशीर्वाद देकर सम्मानपूर्वक विदा किया।

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रिश्तेदार और स्थानीय लोग कर रहे सराहना
सास के इस बड़े दिल और आधुनिक सोच की हर तरफ जमकर तारीफ हो रही है। रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सुनीता ने जो कदम उठाया है, वह समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है।  

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