पालकी में बेटियां, कांधे पर गंगाजल... अलख बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ की
संजीव कुमार अपनी भांजी और बेटी को पालकी में बिठाकर 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का संदेश देते हुए अनोखी कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। यह यात्रा हरिद्वार से श ...और पढ़ें

पुरकाजी से कांवड़ लेकर गुजरता हुआ संजीव कांवड़िया। जागरण
HighLights
संजीव कुमार ने अपनी बेटियों संग अनोखी कांवड़ यात्रा शुरू की।
पालकी में बैठी बेटियां दे रहीं 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का संदेश।
यह यात्रा हरिद्वार से पुरकाजी होते हुए बेटियों का महत्व बता रही।
जागरण संवाददाता, पुरकाजी (मुजफ्फरनगर)। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश... आस्था और प्रेम की पालकी में लेकर कांवड़ यात्रा हरिद्वार से पुरकाजी होते हुए गुजरी। अलीगढ़ के खैर बिलखोरा निवासी किसान संजीव कुमार 22 जुलाई से अपनी 10 वर्षीय भांजी देवांसी और आठ वर्षीय बेटी राधा को पालकी में बिठाकर कांवड़ यात्रा पर हैं। इस अनोखी कांवड़ के जरिए वे बेटियों का महत्व बता रहे हैं।
संजीव का कहना है कि आज भी समाज में बेटे-बेटी में फर्क किया जाता है। इसी सोच को बदलने के लिए उन्होंने यह जोड़ा कांवड़ उठाई है। एक पालकी में उनकी भांजी देवांसी बैठी हैं, जो जेवर के श्याम नगर की रहने वाली हैं। दूसरी पालकी को उनकी पत्नी बीना देवी खींच रही हैं, जिसमें उनकी लाड़ली राधा विराजमान हैं। दोनों बच्चियों की पालकी में ही गंगाजल रखा है।
संजीव बताते हैं कि बेटियां बोझ नहीं, घर की लक्ष्मी और देश का भविष्य हैं। लोग कहते हैं बेटा परिवार का वंश चलाता है, लेकिन बेटियां दो परिवारों को रोशन करती है। भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की कि बेटियां पढ़-लिखकर माता-पिता का नाम रोशन करें। इसी संकल्प के साथ पति-पत्नी दोनों ने कांवड़ उठाई है। रास्ते भर बम- बम भोले और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नारे गूंज रहे हैं।
कांवड़ के साथ हरियाणा के कोसली निवासी सरिता 11 लीटर और गुड़गांव निवासी सुमन 10 लीटर गंगा जल लेकर चल रही हैं। सभी भोलेनाथ के जयकारों के साथ पुरकाजी मार्ग से गुजरते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। पालकी में बैठी देवांसी और राधा भी बार-बार हाथ जोड़कर भक्तों का अभिवादन कर रही हैं। लोगों ने जगह-जगह इनका फूलों से स्वागत किया।