'अगर नेता बनना है तो इस्तीफा दे दो...' ऊर्जा निगम के चीफ इंजीनियर पर भड़के कैबिनेट मंत्री
कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार और ऊर्जा निगम के चीफ इंजीनियर विनोद कुमार गुप्ता के बीच मुजफ्फरनगर में बिजली कटौती और जेई को बंधक बनाने के मामले पर तीखी बहस ...और पढ़ें

HighLights
मुजफ्फरनगर में बैठक में ऊर्जा निगम के चीफ से कहा, आपकी भाषा अधिकारी वाली नहीं।
कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने विकास भवन के सभागार में अधिकारियों की बुलाई थी बैठक।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। बिजली कटौती पर जेई को बंधक बनाने से शुरू हुआ प्रकरण कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार और ऊर्जा निगम के चीफ इंजीनियर के बीच तल्खी तक पहुंच गया।
मंत्री अनिल कुमार ने विकास भवन के सभागार में मंगलवार को अधिकारियों की बैठक बुलाई और चीफ इंजीनियर विनोद कुमार गुप्ता से कहा कि अगर नेता नेता बनना है तो इस्तीफा दो और सामने आओ। चीफ इंजीनियर उठकर बैठक से जाने लगे, लेकिन सीडीओ ने उन्हें रोक लिया। बाद में डीएम ने बैठक में पहुंचकर मामले को संभाला।
विकास भवन के सभागार में शाम चार बजे कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने विभागीय अधिकारियों की बैठक बुलाई, जिसमें विद्युत और पीडब्ल्यूडी के उच्चाधिकारियों को विशेष रूप से शामिल होने के लिए कहा गया। बैठक की शुरुआत में ही बिजली कटौती और जेई को बंधक बनाने के मामले में उपभोक्ताओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के मामले ने तूल पकड़ लिया।
कैबिनेट मंत्री ने चीफ इंजीनियर से कहा कि जिले का सत्यानाश कर दिया है। आपकी भाषा उचित नहीं है। अगर नेता बनना है तो इस्तीफा दो, आओ सामने। आपकी भाषा अधिकारी वाली नहीं, नेताओं वाली है। उन्होंने कहा कि आपने मीडिया में बयान दिया है कि मैं दबता नहीं, पीछे नहीं हटता, संभल भी देखा है, यह कौन सी भाषा है। उपभोक्ता और जनप्रतिनिधि से व्यवहार ठीक रखो। भाषा संवैधानिक होनी चाहिए न कि गुंडागर्दी वाली। सधे हुए शब्दों में बात करो।
चीफ इंजीनियर ने कहा कि बिजलीघरों का विद्युत भार बढ़ाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन लाइनलास के कारण वह निरस्त हो गया है। इसी दौरान रालोद कार्यकर्ताओं ने चीफ इंजीनियर को लेकर व्यक्तिगत टिप्पणी की, जिस पर वह सभागार से उठकर जाने लगे।
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तभी सीडीओ कंडारकर कमल किशोर देशभूषण ने कहा कि अनुशासन सभी को बनाना चाहिए। समस्या के बारे में बताएं। किसी अधिकारी के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी न की जाए। बैठक मर्यादा में हो।
इस पर कैबिनेट मंत्री और सांसद चंदन चौहान ने सभी से शांति बनाए रखने की बात कही। बैठक के बीच में डीएम उमेश मिश्रा पहुंचे। उनके सामने रालोद कार्यकर्ताओं ने चीफ इंजीनियर की कार्यशैली पर सवाल उठाए, जिसे लेकर कुछ समय के लिए हंगामा किया।
वहीं, बैठक में बिजली कटौती के अलावा पीडब्ल्यूडी की सड़कों की गुणवत्ता को लेकर सांसद और मंत्री ने नाराजगी जताई। डीएम से कहा कि हंसावाला मार्ग पर विद्युत खंभे नहीं हटाए और सड़क का निर्माण कर दिया। इसकी जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। बैठक में रालोद जिलाध्यक्ष संजय राठी, मंडल अध्यक्ष प्रभात तोमर, पूर्व मंत्री योगराज सिंह, कृष्णपाल राठी, सुधीर भारतीय, विदित मलिक मौजूद रहे।
इस वजह से मंत्री ने जताई नाराजगी
रविवार को बिजली कटौती पर गांधी वाटिका बिजलीघर पर लोगों ने हंगामा किया था। बिजलीघर के जेई ने लाइनमैन को बंधक बनाने का आरोप लगाते हुए नई मंडी थाने में तहरीर दी थी। इस पर कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने चीफ इंजीनियर से फोन पर बात कर मुकदमा दर्ज नहीं कराने की बात की। चीफ इंजीनियर ने इन्कार किया तो फोन पर खूब बहस हुई।
इस पर चीफ इंजीनियर ने मंत्री का फोन काट दिया। इसकी शिकायत मंत्री ने डीएम से की। मुकदमा दर्ज होने और मंत्री से बहस करने पर सोमवार को रालोद कार्यकर्ताओं ने चीफ इंजीनियर के कार्यालय पर जाकर बिजली काट दी और जमकर हंगामा किया था।
बंद कमरे में मंत्री, डीएम व चीफ की वार्ता
बैठक के बाद डीएम ने कैबिनेट मंत्री, चीफ इंजीनियर और रालोद जिलाध्यक्ष के साथ सभागार के बराबर वाले कक्ष में वार्ता की। इस मामले को अधिक तूल नहीं देने पर बातचीत की गई। 15-20 मिनट की वार्ता के बाद सभी विकास भवन से रवाना हो गए।