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ब्रज की प्राचीन विरासत का होगा वैज्ञानिक अध्ययन, 'डिस्कवरिंग ब्रज' परियोजना से खुलेंगे इतिहास के नए अध्याय

Published: Thu, 03 Sep 2026 10:59 PM (IST)

भारतीय पुरातत्व सोसायटी और ब्रिसेक चैंबर द्वारा 'डिस्कवरिंग ब्रज' परियोजना के तहत ब्रज के पुरास्थलों, मंदिरों, कुंडों और अमूर्त विरासत का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।

इतिहास के पन्नों में छिपी ब्रज की अनकही कहानियां अब दुनिया के सामने आएंगी।

इतिहास के पन्नों में छिपी ब्रज की अनकही कहानियां अब दुनिया के सामने आएंगी।

HighLights

  1. भारतीय पुरातत्व सोसायटी 'डिस्कवरिंग ब्रज' परियोजना का संचालन करेगी।

  2. ब्रज के पुरास्थलों, मंदिरों, कुंडों और घाटों का होगा अध्ययन।

  3. पद्मश्री डॉ. बीआर मणि करेंगे वैज्ञानिक शोध का नेतृत्व।

चेतना राठौर जागरण, नोएडा। जनमाष्टमी के अवसर पर ब्रज संस्कृति के प्रेमियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। भारतीय पुरातत्व सोसायटी ''डिस्कवरिंग ब्रज'' के तहत ब्रज के विभिन्न हिस्सों में फैले छोटे पुरास्थल, प्राचीन टीले, मंदिर, स्थापत्य अवशेष, कुंड, घाट और पुरानी संरचनाओं पर अध्ययन करने जा रहा है। परियोजना भारतीय पुरातत्त्व सोसायटी, नई दिल्ली और ब्रिसेक चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के संयुक्त प्रयास से होगा।

नेतृत्व पद्मश्री प्रो. डा बीआर मणि करेंगे। ब्रिसेक चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री अध्यक्ष डा. हरवंश चावला परियोजना को संस्थागत सहयोग, सांस्कृतिक पहल और व्यापक जन-सहभागिता के स्तर पर समर्थन प्रदान करेंगे। उनके नेतृत्व में पुरातात्विक अनुसंधान, क्षेत्रीय सर्वेक्षण, स्थल पहचान और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

पहचान से पर्यटन तक का अवसर

प्राचीन भारत में 16 महाजनपदों में से एक शूरसेन महाजनपद छठी शताब्दी ईसा पूर्व में स्थित इस ऐतिहासिक साम्राज्य का केंद्र वर्तमान उत्तर प्रदेश का ब्रज क्षेत्र था। इसकी राजधानी सुप्रसिद्ध नगरी मथुरा थी। अब इस महाजनपद की पुरातात्विक अध्ययन कर लोगों की आस्था को और मजबूती दी जाएगी।

ब्रज की विशेषता रखने वाली जिन धरोहरों तक पुरातत्व विभाग नहीं पहुंच सका है। वहां का वैज्ञानिक अध्ययन होगा। भगवान श्रीकृष्ण उठने, बैठते, खेलने, जंगल में गायों के साथ रहने आदि दिनचर्या पर पर अध्ययन होगा। इससे ऐतिहासिक प्रामाणिकता, पुरास्थलों और प्राचीन कुंडों की वैज्ञानिक जांच से ब्रज के इतिहास की कड़ियों को आपस में जोड़ना आसान होगा।

पहले अयोध्या राम की नगरी में अध्ययन करने वाले डाक्टर मणि अब श्याम की नगरी की वैज्ञानिक खोज कराने जा रहे हैं। उनके अनुसार परियोजना का उद्देश्य इसी तरह की विरासत की पहचान कर उनके संरक्षण की संभावनाओं को मजबूत करना है। ‘डिस्कवरिंग ब्रज’ केवल अतीत को दर्ज करने वाली परियोजना नहीं, बल्कि पहचान, शोध, दस्तावेजीकरण, संरक्षण और जन-जागरूकता को जोड़ने की पहल है। इसका दृष्टिकोण ब्रज को केवल धार्मिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में देखने तक सीमित नहीं रहेगा।

इन पर होगा अध्ययन

परियोजना का लक्ष्य ब्रज को एक समग्र पुरातात्त्विक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भू-दृश्य के रूप में समझना है। वृंदावन, गोवर्धन, गोकुल, बरसाना, नंदगांव, राधाकुंड, महावन और बलदेव जैसे प्रसिद्ध स्थलों एवं विभिन्न हिस्सों में फैले छोटे पुरास्थल, प्राचीन टीले, मंदिर, स्थापत्य अवशेष, कुंड, घाट और पुरानी संरचनाएं का भी अध्ययन होगा।

नदी के घाट समेटे हैं इतिहास

ब्रज की विरासत को केवल मंदिरों और मूर्तियों में तलाशना पर्याप्त नहीं होगा। यहां का पूरा भू-दृश्य अपने भीतर इतिहास समेटे हुए है। यमुना नदी, उसके घाट, प्राचीन कुंड और सरोवर, वन एवं उपवन, तीर्थ मार्ग और परिक्रमा पथ सदियों से ब्रज के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को आकार देते रहे हैं।

इसमें केवल मूर्त विरासत ही नहीं, बल्कि अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को भी महत्व दिया जाएगा। पुरास्थल, मंदिर, मूर्तियां, अभिलेख, घाट, कुंड और स्थापत्य अवशेष जहां मूर्त विरासत का हिस्सा होंगे, वहीं लोककथाएं, लोकगीत, धार्मिक और लोक अनुष्ठान, ब्रजभाषा, पारंपरिक ज्ञान, मेले-उत्सव, लोक प्रदर्शन, शिल्प परंपराएं और स्थानीय स्मृतियां भी अध्ययन के दायरे में आएंगी।

तीन से चार महीने में फंड आने के बाद परियोजना पर काम शुरू हो जाएगा। विलुप्त धरोहरों पर स्टड़ी की जाएगी, ताकि उन्हें पुर्नजीवित किया जा सकें। भारतीय पुरातत्त्व सोसायटी और ब्रिसेक चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के बीच 17 सितंबर को एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे। - पद्मश्री प्रो. डा बीआर मणि, वाइस चेयरमैन एवं महासचिव, भारतीय पुरातत्व सोसायटी

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