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ग्रेटर नोएडा में अब कैंसिल नहीं होंगे प्लॉट, अलॉटीज को मिला 2028 तक का मौका; NDRF को भी मिले घर

Published: Thu, 03 Sep 2026 08:49 PM (IST)

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने आवासीय भूखंड आवंटियों को भवन निर्माण के लिए 30 जून 2028 तक का समय दिया है, जो विलंब शुल्क के भुगतान पर मिलेगा।

ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने बैठक में कई अहम फैसले लिए। फोटो: आर्काइव

ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने बैठक में कई अहम फैसले लिए। फोटो: आर्काइव

जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने आवासीय भूखंड लेने के बाद तय समय में भवन निर्माण नहीं कराने वाले आवंटियों को बड़ी राहत दी है।

प्राधिकरण ने भवन निर्माण पूरा कर कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र लेने की समय सीमा बढ़ाकर 30 जून 2028 कर दी है। हालांकि, इस राहत के लिए आवंटियों को प्रचलित दर के अनुसार विलंब शुल्क का भुगतान करना होगा।

2028 तक निर्माण पूरा करने का मौका

ग्रेटर नोएडा में कई ऐसे आवंटी हैं, जिन्होंने रजिस्ट्री कराने के बाद भी निर्धारित समय सीमा में अपने भूखंड पर भवन निर्माण पूरा नहीं कराया है। ऐसे आवंटियों के सामने भूखंड का आवंटन निरस्त होने का खतरा था।

प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने बताया कि बोर्ड ने भवन निर्माण पूरा कर कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र लेने की समय सीमा 30 जून 2028 तक मान्य कर दी है। यह समय विस्तार वर्तमान में प्रचलित दर के अनुसार विलंब शुल्क जमा करने पर मिलेगा।

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित विस्तारित अवधि समाप्त होने के बाद भी यदि आवंटी कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र नहीं लेता है तो उसका आवंटन रद्द कर दिया जाएगा।

एनडीआरएफ को निश्शुल्क मिलेंगे 30 आवास

आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से शुरू करने के लिए एनडीआरएफ की गाजियाबाद स्थित 8वीं वाहिनी के रीजनल रेस्पांस सेंटर को सेक्टर ओमीक्रान-1ए में 30 आवास निश्शुल्क आवंटित किए जाएंगे।

एनडीआरएफ ने प्राधिकरण से भवन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। प्रस्ताव के अनुसार यहां तैनात कर्मी परिवार के साथ नहीं रहेंगे, बल्कि आपदा और आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए टीम के रूप में तैनात रहेंगे।

इन आवासों का उपयोग कैंप, परिसर और स्टाफ कार्यालय के रूप में किया जाएगा। टीम की तैनाती रोटेशन के आधार पर होगी। इससे प्राकृतिक आपदा, औद्योगिक दुर्घटना, भवन गिरने और बाढ़ सहित अन्य आपात स्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।

पांच साल तक मैकेनिकल स्वीपिंग

ग्रेटर नोएडा को धूल मुक्त बनाने और प्रदूषण की रोकथाम के लिए सेंट्रल और ईस्ट जोन की सड़कों पर पांच वर्ष तक मैकेनिकल स्वीपिंग कराई जाएगी।

यह निर्णय सीएक्यूएम और आईआईटी रुड़की के सुझाव के आधार पर लिया गया है। प्राधिकरण मशीनरी उपलब्ध कराएगा, जबकि उसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी। आईआईटी रुड़की के एस्टीमेट के आधार पर प्राधिकरण ने दोनों जोन के लिए ठेकेदार का चयन कर लिया है।

इन क्षेत्रों की सड़कों पर होगी मैकेनिकल सफाई

सेंट्रल जोन में सेक्टर ईटा-1, डेल्टा-1, डेल्टा-2, डेल्टा-3, केपी-4, जीटा-1, ईटा-2 के साथ बेगमपुर, बोड़ाकी, मकौड़ा, मलकपुर, मुबारकपुर, पाली, साकीपुर और लखनावली सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं।

ईस्ट जोन में सेक्टर-36, 37, म्यू-1, ज्यू-1, ज्यू-2, ज्यू-3, चाई-5 के साथ अस्तौली, डाबरा, चुहड़पुर, घरबरा, घोड़ी-बछेड़ा, जुनपत, जुनैदपुर, घंघोला देवला, अजायबपुर, अटाई मुरादपुर, दाउदपुर, खेरली, लड़पुरा, लुक्सर, मायचा, कनारसी, कासना, खानपुर, पौवारी, सलेमपुर गुर्जर, बिरौंडी और बिरौंडा सहित अन्य गांवों की सड़कें शामिल हैं।

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