कारगिल युद्ध: 3 पाकिस्तानी सैनिकों को मार बचाई थी पूरी बटालियन, नरेंद्र भाटी की शहादत पर हर किसी को गर्व
ग्रेटर नोएडा के सैंथली गांव के नरेंद्र भाटी ने कारगिल युद्ध में तीन पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराकर अपनी बटालियन को बचाया और वीरगति प्राप्त की। उनकी ...और पढ़ें
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नरेंद्र भाटी ने अपनी जान देकर सैकड़ों साथियों की जान बचाई। जागरण
HighLights
नरेंद्र भाटी ने कारगिल में तीन पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया।
उन्होंने अपनी बटालियन के सैकड़ों साथियों की जान बचाई।
शहीद नरेंद्र भाटी के नाम पर एक सड़क का नाम रखा गया।
अजब सिंह भाटी, ग्रेटर नोएडा। कारगिल की बर्फीली चोटियों पर जब देश की सरहद खतरे में थी, तब ग्रेटर नोएडा के सैंथली गांव के लाल नरेंद्र भाटी ने अपनी जान देकर सैकड़ों साथियों की जान बचाई।
21 जुलाई 1999 की रात उन्होंने तीन पाकिस्तानी फौजियों को ढेर कर दुश्मनों का हमला नाकाम किया और खुद वीरगति को प्राप्त हुए। आज भी उनकी शहादत की गाथा सुनकर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में हुए थे भर्ती
नरेंद्र भाटी का जन्म 2 जनवरी 1971 को किसान पिता चौधरी महीपाल सिंह भाटी और वीरमाता विशंबरी देवी के घर सैंथली गांव में हुआ था। जुलाई 1993 में वह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में भर्ती हुए।
1993 से 1999 तक देश के विभिन्न राज्यों में तैनाती के बाद अप्रैल 1999 में वह असम की सी-130 बटालियन में तैनात थे। छुट्टी पर गांव आए थे, लेकिन जवानों की छुट्टी रद कर उन्हें सीधे बारामूला भेज दिया गया।
बटालियन को पेट्रोलिंग की जिम्मेदारी दी गई
कारगिल युद्ध के दौरान सी-130 बटालियन को पेट्रोलिंग की जिम्मेदारी दी गई। बहादुरी के चलते नरेंद्र को बारामूला के डुडा बग और चनडुसा पोस्ट पर तैनात किया गया। 21 जुलाई 1999 की रात अचानक उनकी बटालियन पर ग्रेनेड से हमला हुआ। नरेंद्र ने फौरन सूचना दी कि पोस्ट के आसपास पाकिस्तानी सैनिक छिपे हैं।
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इसके बाद दोनों तरफ से गोलियों की बौछार शुरू हो गई। नरेंद्र बिजली की तेजी से दुश्मनों पर टूट पड़े। मुठभेड़ में एक गोली उनकी छाती और दूसरी पेट में लगी, लेकिन देशभक्ति के जज्बे ने उन्हें पीछे नहीं हटने दिया। जख्मी हालत में भी उन्होंने तीन पाकिस्तानी फौजियों को मार गिराया और अपनी पोस्ट को महफूज रखा।
पूरी बटालियन सुरक्षित रह गई
दुश्मनों के मंसूबों को नाकाम कर आखिरी सांस तक मोर्चे पर डटे रहे और भारत माता की गोद में सो गए। उनके इस बलिदान से पूरी बटालियन सुरक्षित रह गई। बलिदानी नरेंद्र भाटी को श्रद्धांजलि देने तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह, आरएसएस प्रमुख राजेंद्र सिंह राज्जू भैया, पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव और राजेश पायलट सैंथली गांव पहुंचे थे। उनके सम्मान में सैंथली से छौलस-नंगला तक जाने वाली 10 किमी लंबी सड़क का नाम भी उनके नाम पर रखा गया।
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वहीं, पत्नी सुरेश देवी, बेटे सुमीर और सुमित भाटी व बेटी संगीता जिन्हें आज भी अपने पिता की शहादत पर गर्व है। कारगिल के 527 शहीदों में नरेंद्र भाटी का नाम भी स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।