मुख्यमंत्री योगी का निर्देश बेअसर, नोएडा में प्राधिकरणों की मिलीभगत से हजारों अवैध भवनों पर नहीं हुआ एक्शन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बावजूद नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अवैध पीजी, हॉस्टल और अन्य भवनों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। लखनऊ अग्निकां ...और पढ़ें
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नोए़डा में अवैध पीजी और कोचिंग सेंटर। जागरण
HighLights
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद अवैध भवनों पर कार्रवाई नहीं।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों पर मिलीभगत के आरोप।
अवैध पीजी, हॉस्टल में सुरक्षा मानकों की अनदेखी जारी।
धर्मेंद्र चंदेल, नोएडा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बावजूद नोएडा, ग्रेटर नोएडा में अवैध पीजी, कोचिंग सेंटर, हॉस्टल, रेस्त्रां, गेस्ट हाउस व अन्य भवनों पर प्राधिकरणों ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
नोएडा प्राधिकरण से तो अवैध भवनों से कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी मेधा रूपम द्वारा लिखा पत्र ही लापता हो गया। अवैध भवनों की गौतमबुद्ध नगर में भरमार है।
ममूरा गांव में घटना स्थल के आसपास भी दर्जनों अवैध पीजी बने हुए हैं, इनमें बड़ी संख्या में लोग रह रहे हैं। उनकी सांसें भी अटकी हुई हैं। घटना स्थल के अगल-बगल चले रहे बड़ी संख्या में अन्य पीजी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
प्राधिकरण अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ निर्माण
ज्यादातर भवन पिछले 15 वर्षों में बने हैं। इन्हें रोकने की जिम्मेदारी पूरी तरह से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण की है। तीनों ही जगह अधिकारियों ने जिम्मेदारी नहीं निभाई। यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि अवैध भवनों का निर्माण प्राधिकरण अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ।
आरोप है कि अवैध पीजी, हॉस्टल, कोचिंग सेंटर, गेस्ट हाउस व रेस्त्रां संचालकों से कुछ कर्मचारी हर महीने पैसे भी वसूलते हैं। बता दें कि लखनऊ के एक व्यवसायिक भवन में आग की घटना और 15 छात्रों की मौत के बाद मुख्यमंत्री ने हर जिले में अवैध भवनों में चल रहे कोचिंग सेंटर, पीजी, हॉस्टल, गेस्ट हाउस व रेस्त्रां आदि की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
वहीं, करीब तीन सप्ताह बीतने के बाद भी मुख्यमंत्री के आदेशों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। सिर्फ कुछ स्थानों पर जांच की औपचारिकता पूरी की दी गई। एक भी अवैध भवन न तो ध्वस्त किया गया है और न ही सील किया गया है।
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सिर्फ केयरटेकर पर ही होती है कार्रवाई
सेक्टर 66 की गलियों से लेकर मामूरा, सरफाबाद, निठौरी, हरौला और बरौला तक एक ही तस्वीर दिखती है। गांवों में हजारों भवन ऐसे बने हैं, जिनमें निर्माण मानकों की पूरी तरह से अनदेखी की गई है। न स्प्रिंकलर न अलार्म। तारों का जाल सीधा छत से होकर गया है। छोटे बिल्डरों ने ग्रामीणों से सस्ते में जमीन लेकर ऊंचे-ऊंचे भवन बना दिए हैं। निर्माण लागत बचाने के लिए नियमों की अनदेखी की दी गई है।
छह से आठ मंजिल की बिल्डिंग, नीचे दुकानें, ऊपर वन और टू बेडरूम। सीढ़ी इतनी तंग कि दो लोग एक साथ नहीं निकल सकते। आग बुझाने का यंत्र तो दूर, फायर एनओसी का कागज भी नहीं। इन्हीं बिल्डिंगों में हजारों लोग रहते हैं। कहीं भी इमरजेंसी गेट नहीं। एक बार आग लगी तो निकलने का रास्ता एक ही।
यह सब बनवाया किसने? भूखंड मालिकों ने। बनने के बाद किराये पर चढ़ा दिए। केयरटेकर संचालन करते हैं। घटना होने पर कार्रवाई भी उसी पर होती है। भवन मालिक साफ बच निकलते हैं।
किराया मोटा, सुरक्षा नदारद
गौतमबुद्ध नगर में नगर निगम जैसी व्यवस्था नहीं होने के चलते कागजी रूप से प्राधिकरण व्यवस्था का भी फायदा उठा रहे। पांच मंजिल यानि 15 मीटर से कम होने के चलते अग्निशमन विभाग के नियम से भी बच रहे। अधिकांश जगह कई भूखंड का जोड़कर हजार वर्ग मीटर तक में 60-70 कमरों तक के पीजी चल रहे हैं।
हादसे को लेकर एक वरिष्ठ पुलिसकर्मी ने बताया कि नोएडा के हर गांव का यही हाल है। लोगों ने घेर की जगह पर पांच मंजिला तक भवन बनाए। जानकारों के मुताबिक सात हजार रुपये की दर से भवन मालिक को भुगतान होता है, जबकि ठेकेदार जैसा ग्राहक और वैसी परिस्थिति का फायदा उठाकर कमरों को बेचता है। एक कमरे में दो-दो युवकों को आठ-नौ हजार रुपये में किराये पर देता है।
आगे क्या
- मकान मालिक की जवाबदेही तय हो
- बिना फायर एनओसी और कंप्लीशन सर्टिफिकेट किराये पर देने पर कार्रवाई हो
- किरायेदारों के लिए हेल्पडेस्क, ताकि वो खुद जांच सकें कि बिल्डिंग सुरक्षित है या नहीं
- पुरानी बिल्डिंगों का स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य हो
जागरण के सवाल
- जिले में पीजी, होटल, कोचिंग को लेकर रिकार्ड कब तैयार होगा।
- इन जगहों पर सुरक्षा के मानकों के दायरा का पालन कौन कराएगा।
- पुलिस की बीट पुलिसिंग की ओर से क्या सख्ती बरती जा रही।
- पीजी, कमरों में रहने वालों की क्षमताओं का निर्धारण और कार्रवाई कैसी होगी।