नोएडा में डेढ़ साल के बच्चे ने निगला नट-बोल्ट, डॉक्टरों की तत्परता से बची मासूम की जान
नोएडा के पीजीआईसीएच में डेढ़ साल के बच्चे ने खेलते हुए धातु का नट और बोल्ट निगल लिया। चिकित्सकों ने बिना चीरा लगाए रिजिड ओसोफैगोस्कोपी प्रक्रिया से सफ ...और पढ़ें

नोएडा के पीजीआईसीएच में डेढ़ साल के बच्चे ने खेलते हुए धातु का नट और बोल्ट निगल लिया।
HighLights
डेढ़ साल के बच्चे ने खेलते हुए निगला नट-बोल्ट।
नोएडा के पीजीआईसीएच में डॉक्टरों ने बचाई जान।
बिना चीरा रिजिड ओसोफैगोस्कोपी से सफलतापूर्वक वस्तुएं निकाली गईं।
जागरण संवाददाता, नोएडा। डेढ़ साल के एक बच्चे ने खेलते-खेलते धातु का नट और बोल्ट निगल लिया। बच्चे को समय रहते स्नातकोत्तर बाल चिकित्सा एवं स्वास्थ्य संस्थान (पीजीआईसीएच) लाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने उपचार कर दोनों वस्तुएं निकाल मासूम की जान बचाई।
बुधवार को बच्चे के स्वजन चाइल्ड पीजीआई लेकर पहुंचे। चिकित्सकों को बच्चे ने नट और बोल्ट निगलने की बात बताई। बाल नाक-कान-गला रोग विभाग की टीम ने बच्चे की तुरंत जांच की। जांच में पता चला कि धातु की वस्तुएं अंदर फंसी हुई हैं, इसलिए डाक्टरों ने बिना देर किए उन्हें निकालने का निर्णय लिया।
बच्चे को आपरेशन थिएटर में ले जाकर सामान्य बेहोशी दी गई। इसके बाद रिजिड ओसोफैगोस्कोपी नामक प्रक्रिया की गई। इसमें मुंह के रास्ते एक विशेष पतली धातु की नली खाने की नली तक पहुंचाई जाती है। कैमरे और बारीक उपकरणों की मदद से फंसी हुई वस्तु को सीधे देखकर सुरक्षित निकाला जाता है। इस प्रक्रिया में शरीर पर कोई चीरा नहीं लगाया जाता।
बच्चे की हालत में तेजी से सुधार हो रहा
डॉ. अभिषेक के नेतृत्व में उनकी टीम वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. संध्या और डॉ. सिमरन ने बहुत तेजी और कुशलता से नट और बोल्ट को सुरक्षित बाहर निकाल दिया। प्रक्रिया के बाद बच्चा पूरी तरह स्थिर रहा, उसकी स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और उसे संतोषजनक हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
इस तरह की घटना में बच्चों की जान भी जा सकती है चिकित्सकों ने कहा कि नट-बोल्ट, सिक्के, बटन बैटरी और खिलौनों के छोटे हिस्सों जैसी वस्तुएं छोटे बच्चों की पहुंच से दूर रखें। बच्चे के कोई वस्तु निगलने का संदेह होने पर उसे घर पर निकालने की कोशिश न करें और तुरंत अस्पताल ले जाएं।