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    इंजीनियर मौत केस: नोएडा में सभी विभागों ने एक-दूसरे पर डाला दोष, बचाव में लिखे 700 पेज; मामले में अब SIT लेगी फैसला

    Updated: Tue, 27 Jan 2026 08:45 AM (IST)

    नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की पानी से भरे प्लॉट में डूबने से मौत हो गई थी। बचाव दल की देरी और संसाधनों की कमी पर सवाल उठे ...और पढ़ें

    सेक्टर 150 में इसी जगह हुई दुर्घटना में इंजीनियर युवराज की गई थी जान। फोटो-  जागरण

    सेक्टर 150 में इसी जगह हुई दुर्घटना में इंजीनियर युवराज की गई थी जान। फोटो- जागरण

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    कुंदन तिवारी, नोएडा। सेक्टर-150 स्थित एससी 02 ए पर माल के बेसमेंट के लिए खोदे गए प्लॉट में भरे पानी में डूबने से 16 जनवरी की रात सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी। इंजीनियर दो घंटे तक अपनी जान बचाने के लिए कार के ऊपर लेटा रहा।

    बेबस पिता वहां मौजूद बचाव दल से जल्द पानी में उतर कर बेटे को बचाने की गुहार लगाता रहा। मौके पर पुलिस, दमकल, एसडीआरएफ के करीब 80 जवान मौजूद थे। आरोप है कि ठंडा पानी होने और संसाधन न होने के चलते बचाव दल के सदस्य पानी में नहीं उतरे। एक डिलीवरी ब्वाय मुनेंद्र पानी में उतरा। मामले ने तूल पकड़ा तो प्रदेश सरकार ने एसआईटी जांच के आदेश दिए।

    Yuvraj Mehta (2)

    आपदा प्रबंधन का मुखिया डीएम होता है। बचाव दल के पास संसाधन नहीं थे। डीएम चार दिन बाद मौके पर पहुंचे। इससे लोगों के निशाने पर दमकल, पुलिस और एसडीआरएफ के साथ जिला प्रशासन भी आ गया। सवाल यह उठा कि तमाम विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी में युवराज कैसे डूब गया।

    विभागों ने एक-दूसरे को ठहराया जिम्मेदार 

    बताया जाता है कि एसआईटी ने चारों विभागों से जवाब मांगा तो प्राधिकरण ने 150, पुलिस ने 450 व जिला प्रशासन ने 100 पेज का जवाब विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौपा। अपने जवाब में विभागों ने एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया। जिम्मेदारी दूसरों पर डालने का प्रयास किया। अपने अपने विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया।

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    शहरवासियों का कहना है कि मौके पर यदि सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल होता, जरा सी सूझबूझ दिखाई जाती तो निश्चित ही युवराज को डूबने से बचाया जा सकता था। रिपोर्टों में घटनाक्रम, कार्रवाई, ड्यूटी रोस्टर, कंट्रोल रूम रिकार्ड, काल डिटेल, रिस्पांस टाइम और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका का ब्यौरा शामिल होने का दावा किया जा रहा है।

    दो घंटे तक युवराज को गड्ढे से बाहर क्यों नहीं निकाला गया?

    भारी-भरकम पन्नों के बावजूद जमीनी सवाल जिंदा है कि दो घंटे तक युवराज को गड्ढे से बाहर क्यों नहीं निकाला गया। मौके पर रेस्क्यू में देरी किस स्तर पर हुई। कंट्रोल रूम और फील्ड टीम के बीच तालमेल क्यों टूटा। नोएडा प्राधिकरण का एनटीसी विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक इस बात पर जोर देते नजर आए कि हमने अपने अवर अभियंता को दोषी मान लिया है, इसलिए उसको शीर्ष अधिकारियों के निर्देश पर बर्खास्त कर दिया है।

    प्राधिकरण की इस कार्रवाई से विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने इत्तेफाक नहीं रखा है कि एक अवर अभियंता ही इस पूरे प्रकरण में कैसे दोषी हो सकता है। एसडीआरएफ के मौके पर मौजूद होने के बावजूद पानी में उतरने में देरी हुई, बिना जरूरी उपकरण के रेक्क्यू टीम मौके पर क्यों पहुंची, इसकी जिम्मेदारी अब तक तय क्यों नहीं हुई। यह सवाल भी कायम है।