क्रॉस एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के लिए बनेगा फ्लाईओवर, नोएडा-ग्रेनो और यमुना एक्सप्रेसवे का सफर होगा आसान
नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-148 और सेक्टर-153 के बीच 85 करोड़ रुपये की लागत से फ्लाईओवर बनाने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है। यह प्रोजेक्ट दो लाख लोगों के यातायात को सुगम बनाएगा।

कॉस एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के लिए बनेगा फ्लाईओवर। फोटो: आर्काइव
HighLights
सेक्टर-148 और 153 के बीच 85 करोड़ का फ्लाईओवर
दो लाख लोगों को मिलेगा सुगम यातायात का लाभ
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी होगी बेहतर
जागरण संवाददाता, नोएडा। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के किनारे बसे आधा दर्जन सेक्टर, 50 से अधिक सोसायटी और 20 गांवों की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्राधिकरण ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
सेक्टर-148 और सेक्टर-153 के बीच 85 करोड़ रुपये की लागत से फ्लाईओवर बनाया जाएगा। परियोजना को प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने शुक्रवार को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
फ्लाईओवर बनने से सेक्टर-148, 149, 150, 151, 152 और 153 समेत 20 गांवों के करीब दो लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
यमुना एक्सप्रेसवे की आसान कनेक्टिविटी
फ्लाईओवर का निर्माण नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए किया जाएगा। इसे लूप के माध्यम से नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के दोनों ओर बनी सर्विस रोड से जोड़ा जाएगा। इससे इन सेक्टरों और गांवों से आने-जाने वाले लोगों को एक्सप्रेसवे तक पहुंचने में आसानी होगी।
महाप्रबंधक सिविल एके अरोड़ा ने बताया कि फ्लाईओवर का उद्देश्य दोनों एक्सप्रेसवे के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। इसका लाभ सेक्टर-150 और 152 में स्पोर्ट्स सिटी के रूप में विकसित होने वाली 50 से अधिक सोसायटी को भी मिलेगा। इसके अलावा एक्सप्रेसवे के किनारे बसे 20 गांवों के निवासी भी इससे लाभान्वित होंगे।
छोटे अंडरपास पर निर्भरता होगी कम
वर्तमान में सेक्टर-148, 149, 150, 151, 152 और 153 समेत 20 गांवों की ओर जाने के लिए लोगों को नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के नीचे बने अंडरपास का इस्तेमाल करना पड़ता है। अंडरपास की सीमित क्षमता के कारण पीक आवर में वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। इससे जाम की स्थिति बनती है और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
फ्लाईओवर बनने के बाद यातायात का दबाव अलग-अलग मार्गों में बंट जाएगा। इससे सेक्टर-150 और 152 के साथ आसपास के क्षेत्रों के निवासियों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
डिजाइन की जांच के बाद तैयार होगी डीपीआर
प्राधिकरण जल्द फ्लाईओवर की ड्राइंग और डिजाइन तैयार करेगा। इसके बाद इसे आईआईटी जैसी तकनीकी संस्था से जांच और अनुमोदन कराया जाएगा। डिजाइन को मंजूरी मिलने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी।
डीपीआर के आधार पर टेंडर जारी कर निर्माण एजेंसी का चयन किया जाएगा। प्राधिकरण की योजना है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद करीब छह महीने में फ्लाईओवर का निर्माण पूरा कर लिया जाए।
परियोजना की प्रमुख बातें
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | सेक्टर-148 और सेक्टर-153 के बीच |
| लागत | 85 करोड़ रुपये |
| लाभार्थी | करीब दो लाख लोग |
| कवरेज | छह सेक्टर और 20 गांव |
| सोसायटियां | 50 से अधिक |
| कनेक्टिविटी | नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे |
| निर्माण लक्ष्य | टेंडर प्रक्रिया के बाद करीब छह महीने |
फ्लाईओवर बनने से स्पोर्ट्स सिटी में तेजी से बढ़ती आबादी को एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे की सीधी और सुगम कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। साथ ही मौजूदा अंडरपास पर वाहनों का दबाव कम होने से आसपास के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था भी बेहतर होगी।
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