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    नोएडा में खुली देश की पहली निजी फोरेंसिक लैब, एक ही छत के नीचे डिजिटल-फिजिकल और क्राइम सीन की जांच

    Updated: Wed, 15 Jul 2026 06:06 PM (IST)

    नोएडा में देश की पहली गैर-सरकारी फोरेंसिक लैब 'लक्सर एविडेंस लैब' शुरू हुई है, जो आम नागरिकों को डिजिटल, फिजिकल और क्राइम सीन मैनेजमेंट की जांच एक साथ ...और पढ़ें

    लैब में रिपोर्ट की जांच करते हुए। जागरण

    लैब में रिपोर्ट की जांच करते हुए। जागरण

    HighLights

    1. नोएडा में खुली देश की पहली गैर-सरकारी फोरेंसिक लैब।

    2. डिजिटल, फिजिकल, क्राइम सीन मैनेजमेंट जांच एक छत के नीचे।

    3. आम नागरिकों को मिलेगा सस्ता और तेज फोरेंसिक समाधान।

    आशीष चौरसिया, नोएडा। देश में प्रति वर्ष फोरेसिंक जांच की रिपोर्ट के विलंब के कारण अदालत में लंबित मामलों का ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है। हालांकि, अब देश में पहली बार आम नागरिक सीधे तौर पर डिजिटल, फिजिकल और क्राइम सीन मैनेजमेंट की फोरेंसिक लैब से जांच करा सकेंगे।
     
    नोएडा के सेक्टर 73 में लक्सर एविडेंस लैब शुरू हुई है, जिसको राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) की ओर से डिजिटल फोरेंसिक्स, फिजिकल फोरेंसिक्स और क्राइम सीन मैनेजमेंट की जांच करने की मान्यता प्राप्‍त है। यह देश की पहली गैर सरकारी लैब है। इसको राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) का सहयोग प्राप्त है।
     
    laxar evidence lab
     
    लैब के संस्थापक डॉ. इंद्रजीत राय कहते हैं कि देश में अब तक फोरेंसिक लैब का इस्तेमाल केवल पुलिस, कोर्ट या सरकारी जांच एजेंसियों तक सीमित था।
     
    हालांकि, उनकी लैब को डिजिटल फोरेंसिक्स, फिजिकल फोरेंसिक्स और क्राइम सीन मैनेजमेंट की जांच करने के लिए एक साथ मान्यता मिलने से पूरे देश के लोगों को लाभ मिलेगा।
    laxar evidence lab
     
    लैब की मदद से कोई भी व्यक्ति, वकील, कंपनी, बैंक, बीमा कंपनी, शिक्षण संस्थान, स्टार्टअप या जांच एजेंसी अपने सुबूतों की स्वतंत्र फोरेंसिक जांच करा सकती है। यह सुविधा आम नागरिक को मिलने से अदालती कार्यवाही में भी आसानी होगी।
     
    अपने साक्ष्यों की पुष्‍ट कराकर पेश किया जा सकेगा। आम नागरिक के साक्ष्यों की जांच को भारतीय संविधान की धारा 39 और 63 के तहत माना जाएगा और उनको कार्रवाई में शामिल किया जाएगा।

    इस तरह की जांच हो सकेगी

    लैब में डिजिटल और मोबाइल फोरेंसिक्स, क्लाउड फोरेंसिक्स, आडियो और वीडियो की सच्चाई परखना, फिंगरप्रिंट जांच, हैंडराइटिंग व हस्ताक्षर जांच, फोरेंसिक दस्तावेज जांच, क्राइम सीन जांच और मैनेजमेंट, टेक्निकल सर्विलांस काउंटर-मेजर्स और एक्सपर्ट की राय ले सकेंगे।
    dr. indrajeet roy
     
    डॉ. इंद्रजीत राय, संस्थापक, लक्सर लैब
     
    दुनिया के सबसे लंबे समय तक फोरेंसिक लैब में काम करने के लिए वर्ष 2023 में वर्ल्ड बुक आफ रिकॉर्ड्स से सम्‍मानित डॉ. इंद्रजीत राय बताते हैं कि लैब भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के नियमों के मुताबिक फोरेंसिक जांच और एक्सपर्ट राय देती है, जो कोर्ट की कार्यवाही और जांच में मदद करेगी। यह सब लागू कानूनों के दायरे में रहते हुए होता है।

    तीनों तरह की जांच कम खर्च में

    दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे की लैब में आम नागरिक जांच करा सकता है, लेकिन इन लैब में डिजिटल फोरेंसिक्स, फिजिकल फोरेंसिक्स और क्राइम सीन मैनेजमेंट की एक साथ जांच कराने की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके चलते जांच कराने में आम नागरिक को अधिक दौड़-भाग करने के साथ ही जेब पर अधिक खर्च बढ़ जाता है।
     
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    डॉ. राहुल सिंह, सीईओ, जिम्स सीएमई
     
    नोएडा में लैब में एक साथ तीनों जांच होने से लोगों को राहत मिलेगी। इससे अब लोग आसानी से एक ही स्थान पर तीनों तरह की जांच कम खर्च में करा सकेंगे। डॉ. इंद्रजीत राय कहते हैं कि लैब का मकसद सिर्फ फोरेंसिक टेस्टिंग तक सीमित नहीं है।
     
    सरकारी फोरेंसिक संसाधनों के बोझ को कम करना, बेहतर फोरेंसिक सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना, पुलिस-प्रशासन और अदालतों की मदद करना, कंपनियों को धोखाधड़ी और साइबर जांच में सहयोग देना और कानूनी विवादों में नागरिकों को वैज्ञानिक सुबूत के जरिये ताकत देना भी लैब का मकसद है।
     
    डॉ. इंद्रजीत का दावा है कि एक साल में 20 हजार केस साल्व करने की क्षमता के साथ लैब संचालित होगी। उत्तर प्रदेश सरकार से भी बात कर प्रदेश के मामलों की जांच कराए जाने की सहमति मांगी गई है।
     
    ramakant
     
    रमाकांत, पूर्व साइंटिस्ट, सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लैब (सीएफएसएल)

    मानक : क्‍वालिटी सिस्टम, टेस्टिंग के तरीके, इन्‍फ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी प्रक्रिया, दस्तावेज, स्टाफ की योग्यता और अंतरराष्ट्रीय मानकों को वैज्ञानिक तरीके से परखा गया है।
     
    लैब की मदद से आम नागरिक अपने पक्ष को कोर्ट में मजबूती से रख सकेगा। स्‍टार्टअप के रूप में शुरुआत करने वाली इस लैब को जिम्स की ओर से सहायता दी गई और आज उत्तर प्रदेश की अपने तरह की पहली लैब बनकर उभरी है। यह संस्थान के लिए गर्व की बात है। इससे देश के विभिन्न कोनों में बनी लैब में पड़ रहे बोझ को कम किया जा सकेगा और वेटिंग संख्या कम होने के साथ केस कम समय में सुलझ सकेंगे।
    - डॉ. राहुल सिंह, सीईओ, जिम्स सीएमई
     
    यह कामयाबी सिर्फ लक्‍सर लैब की नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से चलने वाले स्टार्टअप सिस्टम की भी है। हमारा मकसद हमेशा यही रहा है कि अंतरराष्ट्रीय मान्यता-प्राप्त फोरेंसिक साइंस हर उस नागरिक, कारोबारी, वकील और संस्थान तक पहुंचे, जो विज्ञानी सच जानना चाहता है।
    - डॉ. इंद्रजीत राय, संस्थापक, लक्सर लैब
     
    लगातार बढ़ते धोखाधड़ी के मामलों के कारण फोरेंसिक लैब पर लंबित केसों का बोझ तेजी से बढ़ा है। इस लैब में एक ही स्थान पर डिजिटल फोरेंसिक्स, फिजिकल फोरेंसिक्स और क्राइम सीन मैनेजमेंट की जांच होने से लोगों को लाभ मिलेगा। उप्र के साथ ही आसपास के अन्य प्रदेशों के लिए काफी मददगार साबित होगी।
    - रमाकांत, पूर्व साइंटिस्ट, सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लैब (सीएफएसएल)

    क्या कहता है एनसीआरपी का आंकड़ा?
     
    एनसीआरपी के अनुसार प्रति वर्ष 75,000 से 90,000 मामले सिर्फ ब्लैकमेलिंग, सेक्सटार्शन और डीपफेक से जुड़े आ रहे हैं। डीपफेक, ब्लैकमेलिंग, डिलीट डाटा रिकवरी के मामले साइबर क्राइम में ही शामिल किए जाते हैं।
     
    इस तरह के मामलों के चलते पुलिस व फोरेंसिक लैब के काम में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। बीते छह साल में डिजिटल धोखाधड़ी के माध्यम से 52,976 करोड़ रुपये का लोगों का नुकसान हुआ है।
     
    2023 के बाद से डीपफेक और एआइ फ्राड के मामले तेजी से बढ़े हैं। बुजुर्गों को निशाना बनाकर 3000 से अधिक केस सिर्फ पिछले साल दर्ज किए गए हैं।
     
    बीते छह महीने में बैंक फ्राड, हत्या, ठगी केस में 660 करोड़ का नुकसान पुलिस ने रोका है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडू और तेलंगाना में सबसे अधिक मामले मिल रहे हैं। अकेले यूपी में 2.75 लाख शिकायतें और 1443 करोड़ का नुकसान का हुआ है।

    लक्‍सर लैब से जांच का अनुमानित शुल्‍क है। अन्‍य लैब में 30 प्रतिशत अधिक है।

    डिजिटल साइबर का 30-35 हजार

    फिजिकल में 20-25 हजार

    क्राइम सीन 30-35 हजार

    कैप्‍शन :

    डा. राहुल सिंह, सीईओ, जिम्स सीएमई
    -लक्‍सर एविडेंस लैब में काम करते कर्मचारी
    -लैब में रिपोर्ट की जांच करते हुए
    -लक्‍सर एविडेंस लैब संस्‍थापक डा इंद्रजीत राय (बीच में) साथी कर्मचारी को तकनीक की जानकारी देते हुए।
    -डा. इंद्रजीत राय, संस्थापक, लक्सर लैब
    - रमाकांत, पूर्व साइंटिस्ट, सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लैब (सीएफएसएल)